क्राइम्स

शोले में इकलौता था, लेकिन यूपी में सौ ‘गब्बर’ हैं…फिर भी डरे-सहमे हैं

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लखनऊ|फिल्म शोले तो याद होगी… रामगढ़ का गब्बर भी, जिसका खौफ दिखाकर गांव की औरतें अपने बच्चों को सुलाती थीं। वाकई शोले के गब्बर का बड़ा खौफ था। गब्बर की आहट से पचास कोस तक धरती कांपती थी, ऐसा गब्बर खुद दावा करता था। उस गब्बर का साम्राज्य ध्वस्त किया था ठाकुर बलदेव सिंह। यूपी में भी कई इलाकों में शोले दहक रहे हैं, एक-दो नहीं, पूरे सौ गब्बर अपने-अपने इलाके में सौ-सौ कोस तक दहाड़ते हैं। किसी-किसी का इलाका और भी ज्यादा बड़ा है। अपहरण, फिरौती, रंगदारी, हत्या, बलात्कार जैसे संगीन अपराध यूपी के सौ गब्बरों के लिए चींटी मसलने से ज्यादा कुछ नहीं। शोले के गब्बर के खौफ को ठाकुर बलदेव और जय-वीरू की जोड़ी ने खत्म किया था। इतिहास खुद को रीमेक कर रहा है। यूपी में भी गब्बरों के खिलाफ भगवा चोले में एक ठाकुर खड़ा हुआ है। ठाकुर की पहली मार का असर यह हुआ कि जेल में कैद होने के बावजूद रंगबाजी करने वाले गब्बर भीगी बिल्ली की मानिंद डरे-सहमे दुबक बैठे हैं।

 

गब्बरों की जेल के अंदर अय्याशी और बनाया सिंडिकेट

गब्बर.. यानी कुख्यात बाहुबली। हत्या-अपहरण-फिरौती-रंगदारी जैसे दर्जनों संगीन मामलों में वांछित हार्डकोर अपराधी। राजनीति के साथ चोली-दामन का रिश्ता रखने वाले ऐसे बाहुबलियों को पिछली सरकार ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठने के बाद गिरफ्तार तो किया, लेकिन मन-माफिक जेलों में कैद किया। नतीजा यह हुआ कि बाहुबलियों ने अपनी ताकत और रसूख की बदौलत जेल के अंदर अय्याशी के इंतजाम जुटा लिए। ज्यादातर बाहुबली अपने गृह जनपद या पड़ोसी जिले में कैद थे, ऐसे में गुर्गों की आमद-दरफ्त तेज थी। बाहुबलियों की अपने गुर्गों से मुलाकात विशेष कक्षों में होती थी। रोजाना दर्जनों चेले अपने आका से मिलने आते। कोई पैर दबाता था तो कोई मदिरा पिलाता था। गुर्गों की भीड़ में हार्डकोर क्रिमिनल भी पहुंचते थे। आका के हुक्म पर अगले दिन किसी व्यापारी से उगाही होती थी। इंकार करने पर हत्या या अपहरण। अक्सर ही जेलों के आकस्मिक निरीक्षण के दौरान बरामद शराब की बोतल, कंडोम के रैपर, ब्लेड, मोबाइल हैंडसेट, दर्जनों सिम तथा अन्य गैजेट्स चुगली करते हैं कि जेल के अंदर से बाहुबली अपना ‘धंधा’ करते रहे हैं।

 

योगी आदित्यनाथ ने झटके में बाहुबलियों को दिखाई औकात

योगी आदित्यनाथ ने यूपी की सत्ता संभालने के बाद कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बड़ा कदम उठाया। उन्होंने जेलों में बंद 100 कुख्यात बाहुबलियों की जेल बदलने का आदेश जारी कर दिया। डीजी-जेल को सख्त हिदायत थी कि बाहुबलियों की जेल बदलते समय दो बातों का खास ख्याल रखा जाए। अव्वल उन्हें गृह जनपद से बहुत दूर स्थानांतरित किया जाए, दूसरा जेल बदलने से पहले यह पुख्ता कर लिया जाए कि उक्त जनपद/इलाके से बाहुबली का पुराना कनेक्शन नहीं होना चाहिए। इस फरमान के बाद बनारस-आजमगढ़-मऊ के इलाके में ज्यादा सक्रिय मुख्तार अंसारी को लखनऊ जेल से बांदा जेल, इलाहाबाद-कौशांबी-भदोही में आतंक का पर्याय अतीक अहमद को नैनी जेल से देवरिया जेल, पूर्वांचल के खौफ मुन्ना बजरंगी को झांसी जेल से पीलीभीत जेल, औरैया के बिगड़ैल नेता शेखर तिवारी को बाराबंकी जेल से महाराजगंज जेल भेज दिया गया। यह नाम सिर्फ उदाहरण हैं। मौलाना अनवारुल हक, मुकीम उर्फ काला, उदयभान सिंह उर्फ डॉक्टर, टीटू उर्फ किरणपाल, रॉकी उर्फ काकी और आलम सिंह जैसे 90 अन्य दबंग-कुख्यात बाहुबलियों को ‘काला-पानी’ भेज दिया गया है।

 

इतनी दूर मुलाकात करने पहुंचे लोगों की एसटीएफ बनाएगी कुंडली

योगी आदित्यनाथ को यकीन है कि दूर-दराज के इलाकों में स्थानांतरित करने के बाहुबलियों का सिंडिकेट कमजोर होगा। जेल प्रशासन को सख्त आदेश है कि बाहुबलियों को नई जेल में कोई भी अवैध सुविधा मिली तो सीधे जेल अधीक्षक पर गाज गिरेगी। आला अफसर भी नपेंगे। बहरहाल, डीजी-जेल से साप्ताहिक रिपोर्ट मांगी गई है कि बाहुबलियों से कौन-कौन मिलने पहुंच रहा है। ऐसे लोगों के इतिहास-वर्तमान को खंगालने की जिम्मेदारी एसटीएफ को सौंपी गई है। तनिक भी संदेह होने पर अमुक बाहुबली से दूर की जेल में मुलाकात करने पहुंचे अमुक को दबोचकर सिंडिकेट की कमर को तोडऩे का सिलसिला जारी रहेगा।

 

जेल में भर्ती अपराधियों का दिमाग भी ठीक करेंगे योगी

सरकार को खबर मिली है कि बीमारी के नाम पर तमाम बड़े अपराधी जेल के अस्पताल या किसी अन्य अस्पताल में भर्ती हैं। हकीकत में गंभीर बीमारी जैसी कोई बात नहीं है, लेकिन कुछ कैमिकल की मदद से या डॉक्टरों की रिपोर्ट पर बड़े अपराधी जेल के बजाय अस्पतालों में आराम फरमा रहे हैं। अस्पताल से सिंडिकेट ऑपरेट करना ज्यादा आसान रहता है। अब ऐसे अपराधियों का दिमाग ठीक किया जाएगा। यूपी पुलिस के एडिशनल डायरेक्टर जनरल (जेल) जीएल मीणा बाहुबलियों के जेल के अंदर के सिंडिकेट को कबूल करते हैं। मीणा कहते हैं कि माफिया डॉन सलाखों के पीछे होते हैं, फिर भी हत्या, अपहरण, डकैती और फिरौती जैसे कृत्यों से अपने आतंक का राज बरकरार रखते हैं। मीणा ने बताया कि करीब 100 कुख्यात कैदियों को विभिन्न जेलों में स्थानांतरित किया गया है। साथ ही 29 अप्रैल को राज्य के आगरा, वाराणसी और बरेली स्थिति मानसिक अस्पतालों में मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के आधार पर भर्ती विभिन्न विचाराधीन कैदियों की जांच के लिए कहा गया है। डॉक्टरों की टीम जांच के बाद एक सप्ताह में रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसके आधार पर अपराधियों को दोबारा जेल भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी तक 18 ऐसे विचाराधीन कैदियों की शिनाख्त हो चुकी है, जो बहानेबाजी के जरिए विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं।

 

फोन से डराते हैं, फिर गुर्गों के जरिए वसूली

पुलिस के मुताबिक मुलाकात करने आए गुर्गों के मोबाइल के जरिए बाहुबली किसी कारोबारी, ठेकेदार या सरकारी अधिकारी को डराता है, वसूली भेजने के लिए कहता है। हुक्म मानने से आनाकानी करने पर बाहुबली धमकाता है, कई मर्तबा तो हमला होता है और हत्या भी करने से परहेज नहीं होता है। ट्रांसफर करने का मकसद एक ही जेल में या मनमाफिक जेल में लंबे समय से बंद बाहुबली का नेटवर्क तोडऩा है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद 30 मार्च को कानून-व्यवस्था की पहली समीक्षा बैठक में सीएम योगी आदित्य नाथ ने सूबे के पुलिस और जेल अधिकारियों को कड़ाई बरतने का निर्देश दिया था।

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