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Covid-19:इस वजह से हो रही है कोरोना संक्रमितों की मौत, जानिए किन मरीजों पर सबसे ज्यादा मडरा रहा है खतरा

गोरखपुर|कोरोना वायरस फेफड़ों में रक्त के थक्के (क्लाटिंग) बनाकर लोगों की जान ले रहा है। सांस के मरीजों पर इसका असर सबसे अधिक है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कोरोना से हुई 69 मौतों में करीब 60 प्रतिशत मौतों में वजह यही सामने आई है। इससे डॉक्टर भी चिंतित हैं। उनका कहना है कि फेफड़ों में रक्त का थक्का बनने का कारण समझने के लिए किसी कोरोना पीड़ित के शव का पोस्टमार्टम कराना होगा, जिस पर पूरी तरह से रोक है। डॉक्टर सलाह दे रहे हैं कि सांस के मरीज बिल्कुल लापरवाही न बरतें।

 

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभाग के अध्यक्ष डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि कॉलेज में अब तक दो तरह के मरीज मिले हैं। पहले मरीज ऐसे हैं जिन्हें सांस लेने में थोड़ी तकलीफ थी, लेकिन इम्युनिटी अच्छी होने की वजह से उन्होंने खुद रिकवर कर लिया। दूसरे मरीज ऐसे मिले हैं, जिनको सांस लेने में तकलीफ हुई, लेकिन मरीजों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

 

मरीजों के ध्यान न देने की वजह से वायरस ने फेफड़ों को ज्यादा डैमेज कर दिया। दोनों फेफड़ों में गंभीर निमोनिया हो गया। ये लोग खुद को रिकवर नहीं कर पाए। इसके बाद फेफड़ों में रक्त का थक्का जम गया। इससे सांस लेने की नली बंद हो गई और मरीज की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि डबल निमोनिया की जानकारी तो एक्स-रे कराने से मिल जा रही है, लेकिन थक्के की सही जानकारी सही समय पर नहीं मिल पा रही है। यही वजह है कि सांस के मरीजों को पहले से ही अलर्ट करते हुए उन्हें जरूरी दवाएं दी जा रही हैं। ऐसे कई रोगियों की जान बचाई भी जा चुकी है।

 

वायरस खून को बना दे रहा ज्यादा गाढ़ा
डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि कोरोना वायरस की वजह से खून में थक्का बनने की प्रक्रिया तेज हो जा रही है। इसकी वजह से खून ज्यादा गाढ़ा हो रहा है। ऐसे मरीजों का ब्लड टेस्ट कराने में भी दिक्कत आ रही है क्योंकि खून धमनियों से निकलने के बाद जल्द ही जम जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक जिन मरीजों की मौत हुई है, उनमें कई ऐसे मरीज मिले हैं, जिनके फेफडों में क्लाटिंग मिली है। इसी क्लाटिंग की वजह को समझने के लिए पोस्टमार्टम जरूरी है, लेकिन कोरोना पीड़ित के पोस्टमार्टम पर रोक है।

 

माइक्रो क्लाट कहीं भी हो सकता है
डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि कोरोना वायरस शरीर में माइक्रो क्लाट बनाता है। यह क्लाटिंग कहीं भी हो सकती है। वायरस फेफड़े, हृदय, किडनी जैसी जगहों पर छोटे-छोटे क्लाट बनाकर इन अंगों को नुकसान पहुंचा रहा है। चिंता की बात यह क्लाट कहीं भी बन सकता है। ऐसे में सही समय पर इलाज बेहद जरूरी है, जिससे की मरीज की जान को बचाया जा सके।

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