अखण्ड भारत

Independence Day Special: देवरिया के इस गांव ने खट्टे कर दिए थे अंग्रेजों के दांत, बेटे बेटियों ने दी थी कुर्बानी

देवरिया|1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम में सरयू नदी के नजदीक बसे पैना गांव के वीर सूपतों ने अंग्रेजी हुकूमत से बगावत कर दी। आजमढ़ से सरयू नदी के जरिए बरहज भेजी जा रही अंग्रेज सरकार की रसद और हथियार लूट ली। इस घटना से बौखलाई अंग्रेजी हुकूमत ने ठाकुर सिंह के तीरंदाजों, लठैतों और तलवारबाजों को सबक सिखाने की ठान ली। अंग्रेज सैनिकों ने पैना गांव पर हमला कर दिया। पैना की माटी के वीर सपूतों ने भी मोर्चा संभाल लिया और अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए।

 

 

अंग्रेजी पलटन की संख्या अधिक थी। सैकड़ों वीर सपूत शहीद हो गए। अंग्रेज सैनिकों ने बहू-बेटियों को निशाना बनाना चाहा तो देश के स्वाभिमान और अपने सतीत्व की रक्षा के लिए वीरंगनाओं ने सरयू नदी में छलांग लगा दी। अंग्रेजों ने जल-जौहर करने वाली बहू-बेटियों पर गोलियां बरसाई जिससे वहां सरयू नदी का पानी लाल हो गया।

 

 

बलिया के वीर सपूत मंगल पांडेय ने स्वतंत्रता संग्राम की अलख जगा दी थी। देश भर में आजादी की भावना ऐसी भी कि छोटी-छोटी रियासतें ही नहीं जमींदारों ने भी अंग्रेजों को देश से मार भगाने की ठान ली। वर्तमान समय में देवरिया जिले का पैना गांव जो तब गोरखपुर में ही था, यहां के जमींदार भी इस आग हवा देने में पीछे नहीं रहे। 31 मई 1857 को पैना गांव के जमींदार ठाकुर सिंह, शिवव्रत सिंह, पलटन सिंह, शिवजोर सिंह और अयोध्या सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों युवाओं ने ईस्ट इंडिया कम्पनी के आधिपत्य को अस्वीकार कर विद्रोह कर दिया। यही वक्त था जब दिल्ली के सम्राट बहादुर शाह जफर, अवध के नवाब जिनके अधीन गोरखपुर का इलाका भी था, बगावत का विगुल बजा चुके थे।

 

 

पैना के वीर सपूतों न केवल गोरखपुर से आजमगढ़ नदी यातायात को बरहज में अवरुद्ध कर दिया बल्कि घाट पर कब्जा कर लिया। यहां से नाव से गुजर रहा अंग्रेजी हुकूत का खजाना, रसद और हथियार लूट लिया। तब अंग्रेजी सेना की प्रमुख छावनी आजमगढ़ में थी। गोरखपुर जिले का खजाना भी आजमगढ़ में ही रहता था। यही वजह थी कि 28 जून 1857 को पूरी कमिश्नरी में मार्शल लॉ घोषित कर दिया गया। उधर 26 जुलाई 1857 को इस्ट इंडिया कम्पनी के सिगौली रेजीमेंट में शामिल देश के सैनिकों ने विद्रोह कर मेजर होम्स को मार डाला। सलेमपुर में जाकर अंग्रेजों की अफीम कोठी भी लूट ली। पैना गांव के वीरों की इन गतिविधियों से अंग्रेज अफसर बौखला गए और 31 जुलाई 1857 को पैना गांव पर हमला बोल दिया।

 

 

पैना के वीरों ने छुड़ा दिए अंग्रेजों के छक्के
अंग्रेजी पलटन ने पैना गांव पर हमला बोल दिया। पैना के जाबाजों ने खूब लोहा लिया। काफी संख्या में अंग्रेज सैनिकों को मार गिराया। हालांकि पलटन में सैनिकों की संख्या काफी अधिक थी। एक-एक कर पैना के सपूत शहीद होते गए। अंग्रेजों ने पूरे गांव को तबाह कर दिया। गांव में आग लगा दी। बड़ी संख्या में लोग मारे गए।

 

 

बहू-बेटियों ने किया जल-जौहर
पैना गांव के वीर सपूतों अंग्रेजी पलटन से गांव के उत्तर में लोहा ले रहे थे और इधर पलटन के एक हिस्से के सैनिकों ने भूखे भेड़िए की तरह गांव की महिलाओं पर हमला कर दिया। अचानक बड़ी संख्या में गांव से निकलर बहू-बेटियां खुद को बचाते हुए सरयू तट पर पहुंच गईं। देश की अस्मिता और अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए इन बहू-बेटियों ने उफनाई सरयू नदी में छलांग लगा दी। इस बीच अंग्रेज फौज भी वहां पहुंच गई। सैनिकों ने जल-समाधि ले रहीं वीरांगनाओं पर गोलियां बरसा दी। नदी में समा रहीं महिलाओं का शरीर गोलियों से छलनी हो गया और वहां आस-पास नदी का पानी लाल हो गया।

 

 

पैना के शहीदों की याद में बना है शहीद स्मारक
पैना गांव के वीर सपूतों की कहानी यहां आस-पास के दस-बीस कोस गांवों के लोगों की जुबां पर रहती है। उनके प्रति सम्मान में ग्रामीणों का सीना गर्व से फूल जाता है। शहीदों की याद में यहां शहीद स्मारक बनवाया गया है जो इस माटी के लोगों को अपने पूर्वजों के बलिदान की याद दिलाता रहता है।

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