अखण्ड भारत

मोदी कैबिनेट का फैसला: कर्मयोगी योजना को मंजूरी, जम्मू कश्मीर के लिए राजभाषा बिल भी पास

नई दिल्ली|प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसले पर जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि सरकार की ओर से जम्मू कश्मीर के लिए राजभाषा विधेयक लाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकारी अफसरों की कार्य क्षमता को बढ़ाने के लिए कर्मयोगी योजना को मंजूरी दी गई है। 

सरकारी अधिकारियों के काम करने की शैली में सुधार के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को ‘कर्मयोगी योजना को मंजूरी दे दी। इस मिशन के तहत नियुक्ति के बाद सिविल अधिकारियों समेत अन्य सरकारी कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें खास ट्रेनिंग दी जाएगी। केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि मिशन ‘कर्मयोगी’ के जरिए सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपना प्रदर्शन बेहतर करने का मौका मिलगा। जावड़ेकर ने कहा कि मिशन कर्मयोगी के तहत सिविल सेवा क्षमता निर्माण योजनाओं को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली एक परिषद को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री इस परिषद के सदस्य होंगे।

केंद्रीय मेंत्री ने नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी (NRA) के निर्णय का जिक्र करते हुए कहा, ‘पहले भर्ती के लिए अनेक परीक्षाएं छात्रों को देनी पड़ी थी। उसके बदले एक ही परीक्षा हो, ये सरकार द्वार किए गए सुधार का मूल उद्देश्य था। उसका स्वागत पूरे देश में हुआ। ये भर्ती से पहले का सुधार था, आज हम भर्ती के बाद के सुधार का निर्णय लेने जा रहे हैं।’  

केंद्रीय मंत्री ने कहा, पिछले सप्ताह सरकारी नौकरी में भर्ती के लिए अलग-अलग टेस्ट की प्रक्रिया को हटाने और इसके लिए एक ही टेस्ट लेने की बात हुई। आज कैबिनेट ने कर्मयोगी योजना को मंजूरी दी है, जो सरकारी अफसरों के काम को बढ़िया करने के लिए काम करेगी। ये सरकार की ओर से अधिकारियों की क्षमता को बढ़ाने की सबसे बड़ी योजना है। जावड़ेकर ने कहा, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसद में जम्मू कश्मीर राजभाषा विधेयक 2020 को पेश करने की मंजूरी दे दी है, जिसमें 5 भाषाएं उर्दू, कश्मीरी, डोगरी, हिंदी और अंग्रेजी आधिकारिक भाषाएं होंगी। यह सार्वजनिक मांग के आधार पर किया गया है। 

पीएम मोदी के नेतृत्व में एक एचआर काउंसिल का गठन किया जाएगा
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कर्मयोगी योजना के तहत सिविल सर्विस के लोगों के लिए नई तकनीक और उनकी क्षमता पर ध्यान देने की कोशिश की जाएगी। जिसके लिए व्यक्तिगत स्तर से लेकर संस्थागत स्तर तक विकास करने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि डीओपीटी के सचिव ने बताया कि इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एक एचआर काउंसिल का गठन किया जाएगा, जिसका काम पूरे मिशन के तहत नियुक्ति पर निर्णय लेना होगा। साथ ही इस योजना के लिए एक बड़े स्तर पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा। 

प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तीन एमओयू को मंजूरी दी है। इनमें से एक वस्त्र मंत्रालय और जापान के बीच गुणवत्ता मूल्यांकन पद्धति के लिए, दूसरा खनन मंत्रालय और फिनलैंड के बीच और तीसरा ऊर्जा मंत्रालय और डेनमार्क के बीच है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि जम्मू कश्मीर में डोगरी, हिंदी और कश्मीरी को आधिकारिक भाषाओं के रूप में शामिल करना न केवल लंबे समय से लंबित सार्वजनिक मांग को देखते हुए किया गया, बल्कि 5 अगस्त 2019 के बाद समानता की भावना को ध्यान में रखते हुए भी इस फैसले को लिया गया। 

पीएम मोदी को इस दूरदर्शी सुधार के लिए धन्यवाद देता हूं- गृह मंत्री अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, सिविल सेवाओं में परिवर्तनकारी परिवर्तन लाने के लिए, कैबिनेट ने आज कर्मयोगी योजना को मंजूरी दे दी। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस दूरदर्शी सुधार के लिए धन्यवाद देता हूं। यह समग्र और व्यापक योजना व्यक्तिगत और साथ ही संस्थागत क्षमता निर्माण पर केंद्रित होगी। 

मिशन कर्मयोगी के तहत सिविल सेवा अधिकारियों को क्रिएटिव, कल्पनाशील, इनोवेटिव, प्रो-एक्टिव, पेशेवर, प्रगतिशील, ऊर्जावान, सक्षम, पारदर्शी और तकनीकी तौर पर दक्ष बनाकर भविष्य के लिए तैयार किया जाएगा। अधिकारियों की स्किल बढ़ाना, इस योजना का प्रमुख लक्ष्य होगा। 

भर्ती होने के बाद कर्मचारियों, अधिकारियों की क्षमता में लगातार किस तरह से बढ़ोतरी की जाए, इसके लिए राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम (एनपीसीएससीबी) के तहत इस मिशन को शुरू किया गया है।

डीओपीटी के सचिव सी चंद्रमौली ने कहा, ‘यह योजना सरकार के ‘एक सिविल सर्वेंट को कैसा होना चाहिए’ विजन पर आधारित है। इस मिशन में व्यक्तिगत (सिविल सर्वेंट) और संस्थागत क्षमता निर्माण दोनों पर फोकस किया जाएगा। सेक्शन ऑफिसर से लेकर सचिव स्तर के कर्मचारी इस योजना का लाभ ले सकेंगे। 

केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप के बाद यह योजना लाई गई है। इससे कर्मचारियों के व्यक्तिनिष्ठ मूल्यांकन को समाप्त करने में मदद करेगा और उनका वैज्ञानिक तरीके से उद्देश्यपरक और समयोचित मूल्यांकन सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा, ”मिशन कर्मयोगी सरकारी कर्मचारियों को एक आदर्श कर्मयोगी के रूप में देश सेवा के लिए विकसित करने का प्रयास है ताकि वे सृजनात्मक और रचनात्मक बन सकें और तकनीकी रूप से सशक्त हों। उन्होंने कहा कि पहले यह पूरी प्रक्रिया नियम आधारित थी जो अब कार्य आधारित होगी। मिशन कर्मयोगी सिविल सेवकों की दक्षताओं के विकास के लिए ई-लर्निंग पर फोकस होगा।

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