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डॉ कफील खान भी प्रियंका गांधी के लिए चंद्रशेखर जितने ही ‘काम’ के तो नहीं?

नई दिल्ली |डॉक्टर कफील खान (Doctor Kafeel Khan) के मामले में भी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) की दिलचस्पी वैसी ही नजर आयी है, जैसी भीम आर्मी वाले चंद्रशेखर आजाद रावण (Chandra Azad Ravan) को लेकर दिखी थी. चंद्रशेखर आजाद और प्रियंका गांधी की मुलाकात का साफ तौर पर कोई ठोस नतीजा कभी सामने नहीं आ सका – डॉक्टर कफील को लेकर कांग्रेस महासचिव का इरादा बिलकुल वैसा ही है या फिर कुछ और भी?

डॉक्टर कफील खान और चंद्रशेखर आजाद रावण में उत्तर प्रदेश की राजनीति को लेकर एक खास कनेक्शन है – डॉक्टर कफील खान का मुस्लिम समुदाय से होना और चंद्रशेखर आजाद रावण का दलित तबके से आना. यूपी में दलित-मुस्लिम राजनीति को लेकर मायावती ने खूब प्रयोग किये और वो फेल हो चुकी हैं. अब मायावती अपने पुराने सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला दलित-ब्राह्मण गठजोड़ में दिलचस्पी दिखा रही हैं. सपा-बसपा गठबंधन खत्म कर देने के बाद अखिलेश यादव और मायावती दोनों ही एक ही रास्ते की तरफ बढ़ते नजर आ रहे हैं.

सवाल ये है कि प्रियंका गांधी वाड्रा की यूपी पॉलिटिक्स के लिए डॉक्टर कफील खान भी भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर जितने ही अहम हैं या कुछ ज्यादा?

डॉक्टर कफील के लिए प्रियंका गांधी की सक्रियता

हाईकोर्ट से डॉक्टर कफील की रिहाई के आदेश तो सुबह ही मिल गये थे, लेकिन अलीगढ़ जिला प्रशासन की तरफ से रिहाई का ऑर्डर सरकारी गति से पहुंचते पहुंचते आधी रात का वक्त हो चुका था. अपनी रिहाई के बाद डॉक्टर कफील खान ने यूपी सरकार पर तो अपनी भड़ास निकाली लेकिन स्पेशल टास्क फोर्स का तंज भरे लहजे में शुक्रिया भी कहा.

डॉक्टर कफील खान ने कहा, ‘STF का धन्यवाद जिन्होंने मुंबई से मथुरा लाते समय एनकाउंटर नहीं किया.’ असल में डॉक्टर कफील खान विकास दुबे एनकाउंटर की याद दिलाना चाह रहे थे जब उज्जैन से कानपुर ले जाते समय यूपी एसटीएफ ने एनकाउंटर किया था.

इंडिया टुडे से बातचीत में डॉक्टर कफील खान ने आपबीती सुनाई और जेल में शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित किये जाने का आरोप लगाया. बोले, ‘शुरू के 4-5 दिन तक तो खाना ही नहीं दिया गया… मैं बीआरडी ऑक्सीजन मामले के बाद जेल से बाहर आया तो मुझे राहत महसूस हुई थी – लेकिन इस बार मुझे आघात लगा है.’

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से डॉक्टर कफील खान की जमानत मंजूर होने और रिहाई के आदेश आते ही ट्विटर पर लिखा था – ‘डॉ. कफील खान की रिहाई के प्रयास में लगे तमाम न्याय पसंद लोगों और यूपी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को मुबारकबाद.’

जब डॉक्टर कफील मथुरा जेल से रिहा हुए तो प्रियंका गांधी वाड्रा ने फोन कर हालचाल जाना. प्रियंका गांधी वाड्रा से फोन पर बातचीत के दौरान डॉक्टर कफील ने गाढ़े वक्त में सपोर्ट के लिए उनका आभार भी जताया.

डॉक्टर कफील खान पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 12 दिसंबर, 2019 को CAA विरोधी प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा था. 29 जनवरी, 2020 को यूपी एसटीएफ ने डॉक्टर कफील खान को मुंबई से गिरफ्तार किया था. वैसे तो अलीगढ़ की अदालत ने डॉक्टर कफील की रिहाई का आदेश 10 फरवरी को ही दे दिया था, लेकिन फिर जिलाधिकारी ने NSA लगा दिया था. अगस्त में ही एक बार फिर अलीगढ़ प्रशासन की सिफारिश पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने NSA तीन महीने के लिए बढ़ा दिया था.

हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह की बेंट ने डॉक्टर कफील की मां नुजहत परवीन की याचिका पर उनकी रिहाई का आदेश दिया. रिहाई का आदेश देते वक्त हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की है – और वो टिप्पणी उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करती है.

हाईकोर्ट ने डॉक्टर कफील खान के AMU में दिये गये भाषण में कोई भड़काऊ बात नहीं पायी, उलटे उसे देश की एकता और अखंडता का सम्मान करने वाला बताया है. कोर्ट ने आदेश सुनाते हुए कहा था कि एनएसए के तहत डॉक्टर कफील को हिरासत में लेना और हिरासत की अवधि को बढ़ाना गैरकानूनी है.

रामायण का हवाला देते डॉक्टर कफील खान कहते हैं, ‘महर्षि वाल्मीकि ने कहा था कि राजा को राज धर्म के लिए काम करना चाहिये, लेकिन उत्तर प्रदेश में राजा राज धर्म नहीं निभा रहे हैं. बल्कि बाल हठ कर रहे हैं.’

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखी अपनी चिट्ठी में भी प्रियंका गांधी ने बिलकुल इसी अंदाज में उनके की चौपाई की दुहाई दी थी. गोरक्षपीठ के महंत योगी आदित्यनाथ को उनके गुरु की चौपायी याद दिलाते हुए लिखा था, ‘मुझे आशा है कि गुरु गोरखनाथ जी की यह सबदी आपको मेरे इस निवेदन को मानने के लिए प्रेरित करेगी.’

प्रियंका गांधी वाड्रा की तरह है लोक सभा में कांग्रेस ने नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी डॉक्टर कफील खान की रिहाई के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था. अपने पत्र में अधीर रंजन चौधरी ने कहा था, ‘डॉक्टर कफील के साथ नाइंसाफी हो रही है. मैंने भी नागरिकता कानून का सड़क से लेकर संसद तक विरोध किया, लेकिन मेरे उपर राजद्रोह का केस नहीं दर्ज हुआ.’ गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कई बच्चों की मौत के दौरान डॉक्टर कफील के प्रयासों की खूब सराहना हुई थी. स्थानीय मीडिया में उनको हीरो की तरह पेश किया गया जब ऑक्सीजन की कमी होने पर वो अपने दोस्त डॉक्टरों की मदद से ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर बच्चों की जान बचाने की कोशिश की थी, लेकिन यही चीज डॉक्टर कफील खान पर भारी पड़ी. डॉक्टर कफील खान को न सिर्फ नौकरी से निकाल दिया गया, बल्कि लापरवाही के लिए गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया. फिर भड़काऊ भाषण के आरोप में जेल भेजे जाने के बाद वो फिर से रिहा किये जा चुके हैं.

कांग्रेस डॉक्टर कफील की रिहाई का पूरा क्रेडिट लेने में जुटी हुई है. मथुरा के पूर्व विधायक प्रदीप माथुर और यूपी अल्पसंख्यक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष शाहनवाज आलम रिहाई से पहले ही जेल पहुंच गये थे. डॉक्टर कफील के बाहर आते ही कांग्रेस नेताओं ने उनको माला पहनाया और मिठाई खिलाकर स्वागत किया – और उसके फौरन बाद उनको लेकर जयपुर चले गये. राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है और अशोक गहलोत मुख्यमंत्री हैं.

यूपी में दलित-मुस्लिम राजनीति

मार्च, 2019 में भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आजाद रावण को आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में गिरफ्तार किया गया था. जब तबीयत बिगड़ने लगी तो मेरठ के अस्पताल में भर्ती कराया गया था. तब प्रियंका गांधी ने अस्पताल पहुंच कर भीम आर्मी के नेता से वैसे ही कुशल-क्षेम पूछी थी जैसे अभी डॉक्टर कफील खान से फोन पर.

आम चुनाव के बाद अगस्त, 2019 में दिल्ली में रविदास मंदिर तोड़े जाने के विरोध में भीम आर्मी के कार्यकर्ता रामलीला मैदान में जुटे थे. देखते ही देखते वे उग्र रूप धारण कर लिये और पत्थरबाजी करने लगे, जिस पर पुलिस ने चंद्रशेखर रावण सहित कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया.

तब भी प्रियंका गांधी भीम आर्मी के बचाव में आयीं और चंद्रशेखर की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए ट्विटर पर लिखा, ‘दलितों की आवाज का ये अपमान बर्दाश्त से बाहर है. ये एक जज्बाती मामला है उनकी आवाज का आदर होना चाहिये.’ बाद में भी जेल में चंद्रशेखर रावण की तबीयत खराब होने पर प्रियंका गांधी ने एम्स में इलाज कराये जाने की मांग की. प्रियंका गांधी के चंद्रशेखर से मिलने के बाद उनको कांग्रेस की तरफ से लोक सभा चुनाव लड़ाये जाने की चर्चा रही. चंद्रशेखर के वाराणसी दौरे के बाद उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी चुनाव लड़ने की चर्चा हुई, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.

अस्पताल से बाहर निकलने पर प्रियंका गांधी से मीडिया ने सवाल पूछे तो बोलीं कि ये मुलाकात कोई राजनीतिक नहीं है. प्रियंका गांधी ने कहा था – ‘हमें इस लड़के का जोश पसंद है और देख कर अच्छा लगा कि वह संघर्ष कर रहा है.’

प्रियंका गांधी की चंद्रशेखर से मुलाकात से बीएसपी नेता सबसे ज्यादा गुस्से में रहीं. तब भी और बाद में दिल्ली में चंद्रशेखर के प्रदर्शनों को मायावती रिजेक्ट करती रही हैं – और बहुजन समाज को ऐसे लोगों से सावधान रहने की सलाह देती रही हैं. तब तो मायावती इतने गुस्से में थीं कि अमेठी और रायबरेली में राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ उम्मीदवार उतारने पर तुली हुई थीं और उसके लिए अखिलेश यादव को काफी मेहनत करनी पड़ी.

देखा जाये तो प्रियंका गांधी की भीम आर्मी नेता से मुलाकात या सपोर्ट करते रहने का कोई ठोस नतीजा अब तक सामने नहीं आया है – हां, चंद्रशेखर रावण के प्रति समर्थन जता कर प्रियंका गांधी हर बार चिढ़ाने में कामयाब जरूर रही हैं.

अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या डॉक्टर कफील खान के साथ भी कांग्रेस वैसा ही करने जा रही है?

नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे लोगों के साथ हुए पुलिस एक्शन के खिलाफ प्रियंका गांधी शुरू से ही आवाज उठाती आ रही हैं. लॉकडाउन लागू होने से पहले प्रियंका गांधी पुलिस एक्शन के शिकार लोगों के घर भी जाती रही हैं. डॉक्टर कफील खान भी उसी के चलते 7 महीने जेल काटने के बाद बाहर आये हैं.

डॉक्टर कफील को हाथों हाथ कांग्रेस इसलिए ले रही है क्योंकि 2022 की तैयारी कर रहीं प्रियंका गांधी की नजर यूपी के करीब 20 फीसदी मुस्लिम वोट पर है. यूपी विधानसभा की 403 सीटों में से करीब 70 विधानसभा क्षेत्रों में 20-30 फीसदी मुस्लिम आबादी रहती है और करीब 75 सीटों पर इससे ज्यादा – इस तरह करीब 150 सीटों पर मुस्लिम वोट का असर महसूस किया जाता रहा है. 2012 में जब अखिलेश यादव यूपी के मुख्यमंत्री बने तो ऐसे इलाकों की 72 सीटें समाजवादी पार्टी को मिली थीं, लेकिन 2017 में ये सभी बीजेपी के हिस्से में चली गयीं.

दलित राजनीति के साथ साथ मायावती मुस्लिम वोटों के लिए काफी मशक्कत कर चुकी हैं, लेकिन उनके दलित-मुस्लिम फैक्टर का हर बार दम निकल जाता रहा है. कांग्रेस की नजर अब उसी दलित-मुस्लिम वोट बैंक पर है. शायद इसलिए भी क्योंकि मायावती अब फिर से दलित-ब्राह्मण गठजोड़ की तरफ लौटने की कोशिश कर रही हैं – और सपा-बसपा गठबंधन टूट जाने के बावजूद अखिलेश यादव भी वही राह पकड़े देखे जा रहे हैं.

डॉक्टर कफील खान की रिहाई को लेकर अखिलेश यादव ने भी खुशी का इजहार किया है, ‘उम्मीद है झूठे मुक़दमों में फंसाये गये आजम खान जी को भी शीघ्र ही इंसाफ मिलेगा.’

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