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वोडाफोन आइडिया बनी अब बनी Vi, बढ़ा सकती है टैरिफ

Vodafone Idea : वित्तीय संकट से जूझ रही टेलिकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea) अब Vi बन गई है। कंपनी ने आज इसकी घोषणा की। कंपनी ने साथ ही टैरिफ बढ़ाने का भी संकेत दिया है

नई दिल्ली |वित्तीय संकट से जूझ रही टेलिकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea) अब Vi बन गई है। कंपनी ने आज अपनी रिब्रांडिंग की घोषणा की। इस कंपनी का मालिकाना हक ब्रिटेन की वोडाफोन और आदित्य बिड़ला ग्रुप के पास है। जियो के आने के बाद दोनों कंपनियों ने आपस में विलय कर दिया था और वोडाफोन आइडिया नाम से कंपनी अस्तित्व में आई थी। कंपनी ने अब टैरिफ में भी बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं।

कंपनी के सीईओ रविन्दर टक्कर ने नए ब्रांड को लांच करते हुए कहा, ‘वोडाफोन आइडिया का विलय दो साल पहले हुआ था। हम तबसे दो बड़े नेटवर्क, हमारे लोगों और प्रोसेस के एकीकरण की दिशा में काम कर रहे थे। आज Vi ब्रांड को पेश करते हुए मुझे काफी खुशी हो रही है।’ कंपनी के सीईओ ने कहा कि यह अहम कदम है। इसका साथ ही एकीकरण की प्रक्रिया पूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि कंपनी पहले कदम के तौर पर टैरिफ में बढ़ोतरी के लिए तैयार है। नए टैरिफ से कंपनी को एआरपीयू सुधारने में मदद मिलेगी। यह अभी 114 रुपये है जबकि एयरटेल और जियो का एपीआरयू क्रमशः 157 रुपये और 140 रुपये है।

स्थापित किए नए बेंचमार्क
आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि 1990 के दशक के मध्य से अपने कई अवतारों में वोडाफोन और आइडिया ने अलग-अलग रहकर इस सेक्टर की ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई। बिड़ला ने कहा कि वोडाफोन और आइडिया ने नेटवर्क एक्सपीरियंस, रूरल कनेक्टिविटी, कस्टमर सर्विस और एंटरप्राइज मोबिलिटी सॉल्यूशंस में नए बेंचमार्क स्थापित किए हैं।

कंपनी की आज की घोषणाओं पर यूजर्स से लेकर शेयरधारकों तक की निगाहें लगी हुई थीं। Vodafone Idea ने इस बारे में शेयर बाजारों को यह जानकारी दी थी। वित्तीय संकट के कारण देश के कड़े प्रतिस्पर्धा वाले टेलीकॉम बाजार में कंपनी अपना वजूद बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। यही वजह है कि आज की घोषणाओं पर पूरी इंडस्ट्री की भी नजर थी।

निवेश की अटकलें
इससे पहले ऐसी रिपोर्ट्स आई थी कि अमेरिकी की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी ऐमजॉन और वेरिजॉन (Verizon) वोडाफोन आइडिया में 4 अरब डॉलर तक निवेश कर सकती हैं। हालांकि वोडाफोन आइडिया ने इन खबरों को खारिज कर दिया था। कंपनी ने कहा उसके निदेशक मंडल के समक्ष वर्तमान में ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।

कंपनी के बोर्ड ने हाल में इक्विटी शेयर जारी करके या ग्लोबड डिपोजिटरी रिसीट, अमेरिकन डिपोजिटरी रिसीट, फॉरेन करेंसी बॉन्ड्स, कंवर्टिबल डिबेंचर्स के जरिए 25,000 करोड़ रुपये जुटाने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दी थी। इससे नकदी संकट में फंसी VIL को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। जियो के आने के बाद से कंपनी के सब्सक्राइबर्स की संख्या में लगातार कमी आ रही है। साथ ही इसके एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (एआरपीयू) में भी कमी आई है।

वोडाफोन इंडिया लिमिटेड को उच्चतम न्यायालय ने समायोजित सकल आय (एजीआर) के भारी भरकम बकाये को चुकाने के लिए दस साल का वक्त दिया है। इसका 10 प्रतिशत कंपनी को चालू वित्त वर्ष में और बाकी का 10 किस्तों में अगले 10 साल में चुकाना है। वोडाफोन आइडिया पर 58,000 करोड़ रुपये से अधिक का एजीआर बकाया है। इसमें से 7,854 करोड़ रुपये का भुगतान अब तक कंपनी कर चुकी है।

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