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गोरखपुर:हवा में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड से बनेगी दवा, मिलेगा ईंधन, MMMUT ने विकसित की आर्टिफिशियल फोटोसिंथेसिस की तकनीक ; प्रो. राजेश यादव

हवा में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड से बनेगी दवा, मिलेगा ईंधन, MMMUT ने विकसित की आर्टिफिशियल फोटोसिंथेसिस की तकनीक ; प्रो. राजेश यादव

🧿सच के साथ | हवा में मौजूद जहरीली गैस कार्बन डाइऑक्साइड से अब कैंसर और पार्किंसन जैसी जानलेवा बीमारियों की दवा बनेगी। साथ ही मेथेनॉल के रूप में ईंधन का भी उत्पादन होगा। यह संभव हुआ है आर्टिफिशियल फोटोसिंथेसिस तकनीक से। इसे मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के केमिस्ट्री के शिक्षक डॉ. राजेश यादव और तीन शोध छात्राओं ने विकसित किया है। कई अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में यह रिसर्च प्रकाशित हो चुकी है। तकनीक को पेटेंट भी करा लिया गया है।

प्रकाश संश्लेषण के कांसेप्ट पर आधारित है आर्टिफिशियल फोटोसिंथेसिस तकनीक
प्रो. राजेश यादव ने बताया कि इस क्रिया का कॉन्सेप्ट भी हरे पौधों द्वारा किए जाने वाले प्रकाश संश्लेषण की तरह ही है। पौधे सूर्य के प्रकाश की मौजूदगी में कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण कर ऑक्सीजन और ग्लूकोज का निर्माण करते हैं। वहीं इस तकनीक को आर्टिफिशियल फोटोसिंथेसिस नाम दिया गया है। सूर्य के प्रकाश की मौजूदगी में ग्रेफिन, फॉर्मेड-डीहाइड्रोजनेट, निकोटिनामाइड कैडनिन डाइन्यूक्लियोटाइड के साथ फोटो कैटलिस्ट को मिलाकर तैयार किए गए मटेरियल की हवा से क्रिया कराई जाती है। इस दौरान फार्मिक एसिड और मेथेनॉल का उत्पादन होता है।

ग्रेफिन से बना दी पतली चादर
प्रो.राजेश ने बताया कि इस क्रिया के लिए सबसे पहले एक मीडिएटर (माध्यम) तैयार किया गया। इस मीडिएटर में ग्रेफिन, फॉर्मेड-डीहाइड्रोजनेट, निकोटिनामाइड कैडनिन डाइन्यूक्लियोटाइड के साथ फोटो कैटलिस्ट को मिलाकर मटेरियल तैयार किया गया। यह सिलिकॉन जैसी पतली परत की तरह तैयार हो गया।

दवा में होता है फार्मिक एसिड का प्रयोग
उन्होंने बताया कि फार्मिक एसिड का प्रयोग कैंसर को खत्म करने वाली दवा में होता है। इसके अलावा इससे पार्किंसन की दवा भी बनाई जाती है। इसी रसायन का प्रयोग खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए प्रिजर्वेटिव्स में होता है।

वातावरण स्वच्छ होगा, दवा व ईंधन मिलेगाI
प्रो. राजेश यादव ने बताया कि यह एक नई तकनीक है। यह एक पंथ दो काज की तरह है। यह हवा से कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा कम करेगी। इससे वातावरण स्वच्छ होगा। साथ ही दवा और मेथेनॉल के रूप में ईंधन का उत्पादन भी होगा। भविष्य में ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करेगी।

अंतरराष्ट्रीय जनरल में प्रकाशित हो चुकी है रिसर्च, शिक्षक ने कराया पेटेंट
इस रिसर्च में प्रो. राजेश यादव के साथ पूजा सिंह, चांदनी सिंह और सुरभि चौबे भी शामिल रहीं। यह शोध जर्नल ऑफ द अमेरिकन केमिकल सोसायटी, जर्नल ऑफ मटेरियल केमिस्ट्री-ए और एनवायरमेंटल केमिस्ट्री लेटर्स में प्रकाशित हो चुका है। डॉ. यादव ने इस तकनीक को पेटेंट भी कराया है।

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