अयोध्या

जनकपुरी:अयोध्या में भव्य राममंदिर का निर्माण शुरू होने के साथ ही रामायण सर्किट को रेलमार्ग से जोड़ने की कवायद भी तेज हो गई है

अयोध्या |नेपाल तिरपाल से ट्रेन निकाले तो रामायण सर्किट का प्रमुख धाम जनकपुर भी रेलमार्ग से जुड़ जाए। भारत से दो सेट डेमू ट्रेन 15 दिन पहले ही नेपाल पहुंच चुकी हैं। फिलहाल जयनगर में दोनों ट्रेनें तिरपाल में बांध कर खड़ी कर दी गई हैं। अभी ट्रेनों का संचालन शुरू करने के लिए नेपाल में प्रशासनिक कवायद चल रही है।

अयोध्या में भव्य राममंदिर का निर्माण शुरू होने के साथ ही रामायण सर्किट को रेलमार्ग से जोड़ने की कवायद भी तेज हो गई है। अब दोनों प्रमुख धाम मर्यादा पुरुषोत्तम की जन्मस्थली अयोध्यापुरी और माता जानकी की जन्मस्थली जनकपुर के बीच ट्रेनों के संचालन की उम्मीदें दिखने लगी हैं। इसके लिए भारतीय सीमा में स्थित अंतिम स्टेशन जयनगर से नेपाल में जनकपुर होते हुए कुर्था तक करीब 35 किमी का ट्रैक तैयार हो चुका है। यह ट्रैक तैयार किया है भारतीय रेल की सहयोगी कंपनी राइट्स ने।

राइट्स की ओर से इस प्रोजेक्ट का काम भारतीय रेलवे से रिटायर गोरखपुर के इंजीनियर फतेह बहादुर लाल की अगुवाई में शुरू हुआ था। भारत से दो सेट डेमू ट्रेन बीते 18 सितम्बर को ही जयनगर पहुंचने पर भारतीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी थी। नेपाल से रिश्तों को बताते हुए उन्होंने ट्वीट किया कि ‘नेपाल के साथ हमारे प्राचीन सांस्कृतिक और सौहार्द्रपूर्ण संबंध रहे हैं। संबधों को नया आयाम देते हुए रेलवे द्वारा नेपाल को 2 डेमू ट्रेन सेट दिये गये हैं। इनका उपयोग जयनगर, बिहार से कुर्था, नेपाल तक की रेलयात्रा के लिये किया जायेगा।’ 

नेपाल मामलों के जानकार यशोदा श्रीवास्तव बताते हैं कि ‘नेपाल में ट्रेन दौड़ाने को लेकर भारत के साथ चीन भी कोशिशें कर रहा है, लेकिन भारत-नेपाल के बीच सिर्फ रोटी बेटी का नहीं आस्था का भी संबंध है। जयनगर से जनकपुर तक जिस दिन ट्रेन सेव शुरू होगी, वह दोनों देशों के रोटी-बेटी के संबंधों को और मजबूत करने वाला पल होगा।’ 

सोनौली से भैरहवा के बीच दौड़ेगी ट्रेन
भारत-नेपाल की सरकार ने महराजगंज जिले के नौतनवा से सोनौली होते हुए भैरहवा तक रेल लाइन को लेकर भी कोशिशें तेज कर दी हैं। इसे लेकर दोनों देश की सरकारों ने पहले ही सहमति दे रखी है। करीब 16 किमी लंबी रेल लाइन से दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। सोनौली बार्डर पर इंट्रीग्रेटेड चेकपोस्ट का निर्माण भविष्य के रेलवे लाइन को लेकर किया जा रहा है। यह बार्डर दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख गेटवे है।


रेल नेटवर्क के विस्तार के लिए नेपाल में अलग से मंत्रालय के गठन की भी कवायद चल रही है। नेपाल में अलग-अलग रूट के लिए भारत और चीन दोनों देशों की परियोजनाएं चल रही हैं। नेपाल का भारत से पहला रेल समझौता 2019 में कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन से हुआ था। जिसके तहत कोकण रेल कारपोरेशन ने 84.65 करोड़ रुपये में चार बोगी और इंजन समेत दो सेट डीएमयू सवारी गाड़ी नेपाल को उपलब्ध करा दिया है। 

भारत ही मुहैया करा रहा तकनीकी स्टाफ
बिहार के जयनगर से नेपाल के जनकपुर धाम तक छोटी लाइन पर ट्रेन चार दशक पहले से दौड़ रही थी। वर्ष 1996 में राइट्स को ब्राड गेज के सर्वे की जिम्मेदारी मिली। दो वर्ष पूर्व जयनगर से जनकपुर होते हुए कुर्था तक ब्राड गेज लाइन बिछा दी गई है। इस रूट पर ट्रेन संचालन के लिए नेपाल को 26 तकनीकी स्टॉफ भारत सरकार मुहैया करा रही है। नेपाल रेलवे के जिम्मेदारों का दावा है कि जल्द ही पहली रेल सेवा का संचलन शुरू होगा।

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