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Black Hole:गुरुत्वाकर्षण तरंगों के इस्तेमाल के द्वारा सबसे शक्तिशाली ब्लैक होल के टकराव का पता लगा लिया गया है ..

गुरुत्वाकर्षण तरंगों के इस्तेमाल के द्वारा सबसे शक्तिशाली ब्लैक होल के टकराव का पता लगा लिया गया है 

तकरीबन 70 लाख वर्ष पूर्व की घटना को अमेरिका में मई माह में लेज़र इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल वेव ऑब्जर्वेटरी (एलआईजीओ) के जरिये और इटली में पीसा के पास वीआईआरजीओ वेधशाला के जरिये पता लगा लिया गया है।

सच के साथ |आज ब्रह्माण्ड की उम्र जितनी है उसकी आधी आयु में दो ब्लैक होल्स आपस में टकराकर एक-दूसरे से गुंथ गए थे। इनमें से एक में 85 सूर्यों का द्रव्यमान था और करीब 150 सौर द्रव्यमानों के बराबर (सूर्यों के द्रव्यमान) के तौर पर उनका एकल ईकाई के तौर पर विलय हो गया था।

 गुरुत्वाकर्षण तरंगों की मदद से खगोलविद तकरीबन 70 लाख वर्ष पूर्व हुई इस घटना का पता लगा पाने में सफल रहे हैं। यदि ब्लैक होल के क्षेत्र में अध्ययन को देखें तो यह दो ब्लैक होल्स के बीच में हुई अब तक ज्ञात सबसे ताकतवर, सबसे अधिक दूरी पर और सबसे भयानक टकराहट के रूप में पता चली है। ये निष्कर्ष दो पत्रों में प्रकाशित किये गए हैं, इनमें से एक फिजिकल रिव्यु लैटर और दूसरा द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित हुई हैं, जो 2 सितम्बर को प्रकाश में आये हैं। 

इस घटना का पता मई में जाकर लगा था और इसका नाम GW190521 रखा गया। इस व्यापक पैमाने पर हुई घटना का पता लगाने का काम अमेरिका में लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल वेव ऑब्जर्वेटरी (एलआईजीओ) और इटली में पीसा के निकट वीआईआरजीओ (VIRGO) वेधशाला द्वारा संपन्न किया गया।

मोनाश विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया में सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी इल्या मेंडेल के शब्दों में यह “आश्चर्यजनक तौर पर अप्रत्याशित” घटना है, जो ‘मध्यवर्ती द्रव्यमान” ब्लैक होल के अस्तित्व की पुष्टि करता है। सैद्धांतिक तौर पर पहले से ही मध्यवर्ती द्रव्यमान ब्लैक होल के अस्तित्व की भविष्यवाणी हो रखी थी, लेकिन इस खोज ने इसे पुष्ट करने का काम किया है। सामान्य तौर पर सूरज जैसे तारों की तुलना में मध्यवर्ती द्रव्यमान ब्लैक होल में तुलनात्मक तौर पर द्रव्यमान काफी अधिक होता है, किन्तु आकाशगंगाओं के मध्य में पाए जाने वाले ‘अतिविशाल ब्लैक होल्स’ की तुलना में वे इतने विशाल नहीं होते।

GW190521 के विलय वाली घटना की दूरी की गणना इसके पता लगाने वाले बिंदु से 150 बिलियन ट्रिलियन आँकी गई है।

गुरुत्वाकर्षण तरंगों की मदद से कैसे इस घटना का पता लगाया जा सका?

गुरुत्वाकर्षण तरंगों को अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा अपने सापेक्षता के सिद्धांत के हिस्से के तौर पर एक शताब्दी पूर्व ही प्रस्तावित किया गया था, जिसे उनके सबसे महत्वपूर्ण कामों में गिना जाता है। ये तरंगे लगातार ब्रह्माण्ड को तरंगित करती रहती हैं। जब कभी कोई विशालकाय और विध्वंसकारी घटना अंतरिक्ष में घटित होती है, जैसाकि ब्लैक होल के ढहने के दौरान घटित हुई थी, तो ये घटनाएं समूचे ब्रह्माण्ड को समेटने वाले अन्तरिक्ष समय के कपड़े में लहर या तरंगें उत्पन्न करती हैं। आइंस्टीन के सिद्धांत के अनुसार, ब्रह्मांड की कल्पना किसी विशाल सादे कपड़े के तौर पर कर सकते हैं। एक कपड़ा बनाने वाले कपास या अन्य धागे के स्थान पर ब्रह्मांड के लिए बना यह वस्त्र अंतरिक्ष-समय मैट्रिक्स से बना होता है। कुछ हिंसक और बड़े पैमाने पर घटनाएं ब्रह्माण्ड में घटित होती रहती हैं, और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे कब घटित हुईं, लेकिन वे अंतरिक्ष-समय के कपड़े में लहरें बनाती रहती हैं। यही वे गुरुत्वाकर्षण तरंगें होती हैं। एलआईजीओ और वीआईआरजीओ जैसी गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाने वाले डिटेक्टर्स के जरिये इन तरंगों का पता लग पाता है, जिनमें से कुछ तो यहाँ से अरबों और खरबों किलोमीटर की दूरी पर और कई अरब वर्ष पूर्व घटित हुई थीं। किसी बिंदु पर जाकर ये यात्रा तरंगें इन डिटेक्टरों को लांघती हैं, जिसके जरिये इन लहरों की पहचान संभव हो पाती है।

GW190521 घटना ने भी कुछ 70 लाख वर्ष पहले ब्रह्मांड के स्पेस-टाइम फैब्रिक में इसी प्रकार की गुरुत्वाकर्षण तरंगों को जन्म दिया था, जिसे एलआईजीओ-वीआईआरजीओ डिटेक्टर ने पता लगा लिया था। इन संकेतों को प्राप्त करने के बाद, जोकि आम लोगों की कल्पना के लिए अत्यंत क्षणिक साबित हो सकती हैं-तकरीबन एक सेकंड के दसवें हिस्से के बराबर। इसके बाद जाकर इनका संगणनात्मक विश्लेषण किया गया और खगोलविद किसी निष्कर्ष पर पहुँच सके थे।

गुरुत्वाकर्षण डिटेक्टर्स कैसे काम करते हैं?

गुरुत्वाकर्षण तरंग डिटेक्टर में एक लेजर बीम होती है जो दो विभिन्न रास्तों में विभाजित होती हैं। लेजर इन अलग-अलग रास्तों में शीशे के बीच में आगे-पीछे उछलती रहती हैं, और दो प्रकाश पुंज अंततः एक फोटोडेटेक्टर को भेजे जाते हैं। जब कोई गुरुत्वाकर्षण तरंग डिटेक्टर के बीच से गुजरती है, तो इससे सारा प्रबन्धन बिगड़ जाता है। नतीजे में यात्रा करने वाली लेजर बीम अपनी लंबाई में थोड़ी भिन्नता प्रदर्शित करती है जिसका फोटोडेटेक्टर के जरिये पता लग जाता है। गुरुत्वाकर्षण तरंगों के सिद्धांत के अनुसार जब इस तरह की लहर किसी स्थान को पार करती है तो यह उस स्थान को थोड़ा कम कर या फैलाकर इसे थोड़ा-बहुत संशोधित कर देती है। स्थान में इस प्रकार के बदलाव के कारण लेजर बीम से अलग-अलग लम्बाई हासिल होती है।

हालांकि आइंस्टीन ने एक शताब्दी पूर्व ही गुरुत्वाकर्षण तरंगों की भविष्यवाणी कर दी थी, लेकिन व्यावहारिक तौर पर 2015 में ही इसका पता लगाया जा सका था, जिसके चलते 2017 में एलआईजीओ के संस्थापकों को भौतिकी के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार भी हासिल हुआ था।

ब्लैक होल का निर्माण तब संभव होता है जब तारे मरने लगते हैं, जिसका अर्थ यह है कि जब तारे अपनी परमाणु उर्जा खत्म कर चुके होते हैं तो ऐसे में वे विस्फोटक कोर के पतन से गुजर रहे होते हैं, जोकि अंततः एक ब्लैक होल के स्वरुप को धारण कर लेते हैं। तारों की भौतिकी का अनुमान है कि 65 से 120 के बीच के सौर द्रव्यमानों वाले तारों में ब्लैक होल का निर्माण संभव नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि उस द्रव्यमान श्रेणी में खत्म होने वाले सितारे खुद को नष्ट कर सकते हैं और ब्लैक होल निर्मित होने के लिए और कुछ भी शेष नहीं रह जाता है।

यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो ऐसे में वर्तमान डिटेक्शन के अध्ययन में जिन 85 सौर द्रव्यमानों की गणना की गई है वे परस्पर विरोधी साबित हो सकती हैं। एक संभावना यह भी हो सकती है कि यह ब्लैक होल के विलय के पहले की घटना का नतीजा रहा हो।

इस पर टिप्पणी करते हुए ग्लासगो यूनिवर्सिटी, यूके के प्रोफेसर मार्टिन हेंड्री ने कहा था- “यहां पर हम विलय के एक पदानुक्रम के बारे में बात कर रहे हैं, जो हो सकता है कि बड़े और भी बड़े ब्लैक होल निर्मित करने का एक संभावित मार्ग हो सकता है। इसलिए, कौन इस बात को जानता है? संभव है कि इन 142-सौर-द्रव्यमान वाले ब्लैक होल का विलय किसी दूसरे बेहद व्यापक परिमाण वाले ब्लैक होल के साथ हो गया हो। एक निर्माण प्रक्रिया के हिस्से के तौर पर जो रास्ता इन अति-विशाल ब्लैक होल की ओर ले जाता है, हो सकता है कि हम जिनके बारे में सोचते हैं कि वे आकाशगंगाओं के दिल में हैं।” उनकी टिप्पणियों से इस बात के संकेत मिलते हैं कि ब्रह्मांड के विकसित होने के तरीकों में इनके विकासक्रम के भी अपने मायने हैं।

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