ताज़ा ख़बरें

UP:देवरिया उपचुनाव में बसपा,कांग्रेस के बाद भाजपा-सपा ने भी ब्राह्मण उम्‍मीदवारों पर लगाया दांव

देवरिया| सदर विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में बदले समीकरणों के चलते भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस  सभी ने ब्राह्मण प्रत्याशी पर दांव लगाया है। ऐसा पहली बार हो रहा है। समीकरणों के चलते सत्ता पक्ष व विपक्ष ने पहले तो पहले तो एक दूसरे के प्रत्याशियों का इंतजार किया फिर अपने पत्ते खोले।

1967 में अस्तित्व में आई देवरिया सदर सीट पर अब तक हुए 14 चुनावों पर नजर डालें तो यहां से सर्वाधिक छह बार पिछड़ों को प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है। इसके अलावा ब्राह्मण, भूमिहार और मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोग दो-दो बार तथा एक बार ठाकुर व एक बार श्रीवास्तव बिरादरी के जनप्रतिनिधि चुने जा चुके हैं। कानपुर के बिकरू काण्ड के बाद हाल के दिनों में प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं। इसका असर देवरिया में हो रहे उपचुनाव में भी देखने को मिल रहा है। इसी जातीय गणित में उलझे प्रमुख राजनीतिक दलों ने ब्राह्मणों पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं। हर कोई किसी तरह से इस वोट बैंक पर अपना कब्जा करने को आतुर दिख रहा है। खास कर सत्ता पक्ष व विपक्ष में ज्यादा छटपटाहट है। उधर कांग्रेस भी जहां अपने इस पुराने वोट बैंक को हथियाने की फिराक में है वहीं बसपा सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला अपनाते हुए जीत दर्ज करने की कवायद कर रही है। हलांकि 2002, 2007 व 2017 में भी बसपा यह फार्मूला अपना चुकी है लेकिन तब उसे सफलता नहीं मिली थी। इस बार बसपा के टिकट पर अभयनाथ त्रिपाठी मैदान में हैं। वह 2017 में भी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं।

1980 में भाजपा ने देवरिया सदर सीट से रामनवल मिश्र को प्रत्याशी बनाया था लेकिन तब वह छठवें स्थान पर रहे थे। अब पार्टी ने करीब 40 साल बाद एक बार फिर से डा. सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी को मैदान में उतारा है। वहीं सपा के लिए यह पहला अवसर है जब उसने इस सीट पर किसी ब्राह्मण को उतारा है। उसने पूर्व मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी को टिकट दिया है।  जहां तक कांग्रेस का सवाल है करीब 44 साल बाद उसने ब्राह्मण प्रत्याशी को मैदान में उतारते हुए मुकुन्द भाष्कर मणि को टिकट दिया है।

1969 में जीते थे दीप नारायण मणि
देवरिया सदर सीट पर 1969 में ब्राह्मण बिरादरी के दीप नारायण मणि पहली बार चौधरी चरण सिंह की पार्टी भारतीय किसान दल (बीकेडी) से विधायक चुने गए थे। इसके बाद 1989 में जनता दल के टिकट पर रामछबीला मिश्र ने यहां से जीत दर्ज की थी। अब इस बार देखना है किसके माथे पर जीत का सेहरा बंधता है।


विधानसभा चुनाव एक नजर में
वर्ष       जीते -हारे

1967-एसफी चिश्ती-कांग्रेस      डीएन मणि-निर्दल

1969-दीपनरायण मणि –बीकेडी         कृष्णा राय-एसएसपी

1974-कृष्णा राय–बीकेडी          दीपनरायण मणि-कांग्रेस

1977-कृष्णा राय–जेएनपी           महेन्द्र सिंह यादव-कांग्रेस

1980-रुद्रप्रताप सिंह–जेएनपी       शकील चिश्ती-आएनसीआई

1985-फजले मसूद—आएनसी      रामछबीला मिश्र–जेएनपी

1989-रामछबीला मिश्र–जेडी        दीनानाथ–बसपा

1991-रविन्द्र प्रताप मल्ल–भाजपा    सुबाष चन्द्र श्रीवास्तव-जेडी

1993-रविन्द्र प्रताप मल्ल–भाजपा    सुबाष चन्द्र श्रीवास्तव–जेडी

1996-सुबाष चन्द्र श्रीवास्तव–जेडी   रविन्द्र प्रताप मल्ल–बीजेपी

2002-दीनानाथ कुशवाहा-एनएलपी   रामनगीना यादव-सपा

2007-दीनानाथ कुशवाहा-सपा          कमलेश–बसपा

2012-जन्मेजय सिंह-भाजपा             प्रमोद सिंह–बसपा

2017- जन्मेजय सिंह- भाजपा       जेपी जायसवाल-सपा

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.