December 7, 2021

Such Ke Sath

सच के साथ

किसानों के समर्थन में ‘भारत बंद’ सफल, बीजेपी शासित राज्यों में भी रहा असर, कई नेता हिरासत में या नज़रबंद रहे

तीन नए कृषि क़ानूनों के विरोध में किसानों के आह्वान पर किए गए भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिला है। भाजपा शासित राज्यों में भी बंद को काफी समर्थन मिला। हालांकि इन राज्यों में सरकार ने पुलिस के जरिये बड़ी संख्या में किसान और राजनीतिक नेताओं को या तो हिरासत में लिया या फिर घर में नज़रबंद कर दिया।

भारत बंद’ सफल, सरकार को अब पता है कि उनके पास कोई रास्ता नहीं है। आज शाम किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने सिंघु बॉर्डर पर मीडिया से बातचीत में यह प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ये भी बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज हमें बैठक के लिए बुलाया है, हम इसमें भाग लेंगे।

कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया किसान नेता रुरदू सिंह मनसा ने दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हमारे ‘भारत बंद’ के आगे झुकी है।

स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने दावा किया कि 25 राज्यों में करीब 10,000 स्थानों पर ‘भारत बंद’ हुआ:

इसी के साथ पंजाब व अन्य राज्यों से और किसान धरना स्थल पर पहुंचने लगे हैं। किसान नेताओं ने कहा कि हम बुराड़ी नहीं जाना चाहते, हमें रामलीला मैदान जाने की अनुमति दी जाए क्योंकि हम दिल्ली और हरियाणा के लोगों को परेशान नहीं करना चाहते। आपको बता दें कि फिलहाल किसानों ने दिल्ली को लगभग चारों तरफ़ से घेर रखा है।

तीन नए कृषि क़ानूनों के विरोध और किसानों के समर्थन में आज दिन भर के भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिला। हालांकि चक्का जाम दिन में 11 बजे से तीन बजे तक ही था। इस बीच तमाम राज्यों से धरना, प्रदर्शन और बाज़ार बंद की तस्वीरें मिलीं। इस दौरान रेल और सड़क यातायात प्रभावित हुआ है। ट्रांसपोर्ट्स यूनियन भी किसानों के लिए इस बंद को समर्थन दिया था।  

आज के बंद को सभी प्रमुख विपक्षी राजनीतिक दलों, 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, भारत के बैंकों, बीमा क्षेत्र, विश्वविद्यालय और स्कूल के शिक्षकों/अधिकारियों, छात्रों, नौजवानों सहित महिलाओं, दलितों और आदिवासियों के संगठनों, सशस्त्र बलों के अवकाशप्राप्त सैनिकों, फ़िल्म उद्योग से जुड़े कामगारों, अनौपचारिक क्षेत्र और अनुबंध कामगारों, आदि सहित सैकड़ों अन्य संगठनों ने समर्थन दिया। यहां तक कि कवि, लेखक, पत्रकार भी लिख रहे हैं कि Poets for farmers, Writer for Farmers, Journalist for farmers.

भाजपा शासित राज्यों में भी बंद को काफी समर्थन मिला। हालांकि इन राज्यों में सरकार ने पुलिस के जरिये बड़ी संख्या में किसान और राजनीतिक नेताओं को या तो हिरासत में लिया या फिर घर में नज़रबंद कर दिया। दिल्ली में तो आम आदमी पार्टी ने यहां तक आरोप लगाया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तक को गृह मंत्रालय के आदेश पर घर में नज़रबंद कर दिया गया। हालांकि पुलिस ने इससे इंकार किया।

दिल्ली और दिल्ली के बॉर्डर पर आज दिनभर गहमागहमी रही। आज सुबह से लेकर शाम तक पंजाब और हरियाणा से ट्रैक्टर ट्रॉलियों व कारों में सवार होकर और किसान सिंघु बॉर्डर पर पहुंचते रहे। हालांकि लगातार 13 दिनों से सिंघु बॉर्डर पर डटे किसानों के लिये चावल, आटा, दाल, तेल, दूध, साबुन और दंतमंजन जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।

पानीपत से आए गुरजैंत सिंह ने कहा, “स्वाभाविक रूप से राशन की आपूर्ति प्रभावित होगी। लेकिन अगले दो-तीन महीनों के लिये हमारे पास पर्याप्त भंडार है। हम लंबे समय तक के लिये तैयारी के साथ आए थे।”

उन्होंने कहा कि लेकिन यह संख्या बढ़नी शुरू हो गई है और बहुत से लोग साइकिलों और बैलगाड़ियों आ रहे हैं।

दोपहर के भोजन के समय प्रदर्शनकारी कुछ गैर सरकारी संगठनों द्वारा संचालित लंगर में भोजन के लिये कतारबद्ध बैठे नजर आए।

भोजन के बाद कुछ किसान आराम करने के लिये ट्रॉलियों में चले गए जबकि कुछ अन्य मंच से भाषण दे रहे अपने नेताओं को सुनने लगे।

ट्रैक्टरों पर लगे स्पीकरों से पंजाबी और हरियाणवी गाने तेज आवाज में बज रहे थे जबकि क्षेत्र की सर्विस लेन में जीपों और कारों में युवा बैठे नजर आए।

बहुत से लोग वहां दैनिक उपयोग की वस्तुएं जिनमें अंत:वस्त्र, बालों में लगाने का तेल, क्रीम, मोजे और साबुन आदि शामिल हैं, लिये घूम रहे थे और जरूरतमंद प्रदर्शनकारियों को यह मुफ्त में वितरित कर रहे थे।

मोहाली से आए राजिंदर सिंह कोहली ने कहा कि उनकी संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है।

प्रदर्शनकारी किसान संघों के भारत बंद की वजह से सड़कों पर वाहन कम दिखे। ऐप आधारित कैब, ऑटो रिक्शा और डीटीसी बसें हालांकि रोड पर देखी जा सकती थीं। सिंघु बॉर्डर की तरफ जा रही सड़कों पर अधिकतर दुकानों बंद थीं।

बंद के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने सभी बॉर्डरों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये थे।

ऑटो, टैक्सी संघ भी बंद में शामिल रहे


दिल्ली सर्वोदय चालक संघ के अध्यक्ष कमलजीत गिल ने दावा किया कि उसके अधिकतर सदस्य हड़ताल पर हैं। यह संगठन ओला और उबर जैसी ऐप आधारित टैक्सी के चालकों का प्रतिनिधित्व करता है।

दिल्ली टैक्सी टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने कहा कि दिल्ली राज्य टैक्सी सहकारी समिति और कौमी एकता कल्याण संघ समेत अनेक संघों से जुड़े वाहन चालक हड़ताल पर हैं।

दिल्ली ऑटो रिक्शा संघ और दिल्ली प्रदेश टैक्सी संघ के महासचिव राजेंद्र सोनी ने कहा, ‘‘हमारे सभी ऑटो और टैक्सियां सामान्य तरीके से चल रहे हैं। हम किसानों और उनकी मांगों का समर्थन करते हैं लेकिन हड़ताल से आम आदमी को समस्या होगी।’’

आईजीआई हवाईअड्डा टैक्सी संघ के अध्यक्ष किशनजी ने बताया कि काली-पीली टैक्सियों का परिचालन सामान्य है और ये हड़ताल में शामिल नहीं हैं।

वाम और कांग्रेस समर्थकों ने बंगाल में सड़कों, रेल पटरियों को किया जाम

कोलकाता: कांग्रेस और वाम दलों के समर्थकों ने मंगलवार को किसानों द्वारा आहूत ‘भारत बंद’ के समर्थन में राज्य में कई स्थानों पर रेल पटरियों को जाम किया और सड़कों पर धरना दिया।

बंद का असर राज्य में देखने को मिला, जहां निजी वाहन सड़कों से नदारद रहे और बस, टैक्सी जैसे सार्वजनिक वाहनों का परिचालन सामान्य से कम रहा।

कोलकाता में, माकपा के कार्यकर्ताओं और एसएफआई तथा डीवायएफआई के सदस्यों ने लेक टाउन, कॉलेज स्ट्रीट, जादवपुर और श्यामबाजार फाइव प्वाइंट क्रॉसिंग जाम की ।

वहीं कांग्रेस समर्थकों ने उत्तर 24 परगना जिले के मध्यग्राम चौमथा में, पश्विम मेदिनीपुर में पंसकुरा, हावड़ा जिले में बाली, मुर्शिदाबाद में बहरामपुर और खड़गपुर में सड़के जाम की, जहां पुलिस उन्हें वाहनों की आवाजाही बाधित ना करने के लिए कहती दिखी।

पूर्वी रेलवे के सियालदह खंड में जादवपुर और मध्यग्राम और हावड़ा खंड में रिशरा और बर्धमान में उन्होंने रेल की पटरियां भी जाम कर दीं।

वाम दल और कांग्रेस समर्थकों ने केन्द्र के कृषि कानूनों के खिलाफ नारे भी लगाए।

माकपा के वरिष्ठ नेता सुजान चक्रवर्ती ने जादवपुर में एससी मलिक रोड के पास 8बी बस स्टैंड से एक रैली की अगुवाई की।

उत्तर बंगाल के कई हिस्से, जहां भाजपा ने अपने एक समर्थक की रैली के दौरान हत्या के खिलाफ सोमवार को 12 घंटे का बंद बुलाया था, वहां भी सन्नाटा पसरा दिखा।

महाराष्ट्र के अनेक हिस्सों में एपीएमसी बंद रही

मुंबई: भारत बंद के समर्थन में महाराष्ट्र के अनेक हिस्सों में कृषि उपज विपणन समितियां (एपीएमसी) बंद रहीं। पुणे, नासिक, नागपुर और औरंगाबाद जैसे बड़े शहरों में थोक मंडियां बंद रहीं। कई शहरों में खुदरा मंडियां भी बंद रहीं।

नवी मुंबई के वाशी और कल्याण में भी एपीएमसी बंद रहीं। यहां से मुंबई के लिए सब्जियों और फलों की आपूर्ति होती है। थोक व्यापारी बंद का समर्थन कर रहे हैं।

सामान्य दिनों में हजारों ट्रक राज्यभर में सब्जी, फल, अनाज और मसालों की आपूर्ति करते हैं।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) के अंतर्गत आने वाले ठाणे और पालघर जिलों में सार्वजनिक सेवाएं प्रभावित हुईं।

सत्तारूढ़ शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस ने बंद का समर्थन किया था।

मुंबई में बसें और लोकल ट्रेन समेत सार्वजनिक परिवहन सेवाएं बंद से लगभग अप्रभावित रहीं। क्योंकि राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारियों से सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को बाधित नहीं करने की अपील की थी।

ऑटोरिक्शा एवं टैक्सी संघों ने भारत बंद को समर्थन दिया है हालांकि उन्होंने भी सेवाएं जारी रखने का फैसला लिया।

गुजरात में भारत बंद का मिला जुला असर दिखा

अहमदाबाद: राज्य में कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी) के कार्यालय खुले रहे। हालांकि अमरेली और मोरबी के वांकानेर में कांग्रेस के नियंत्रण वाले बाजार बंद रहे। पुलिस ने बताया कि अमरेली, जामनगर, राजकोट, गांधीनगर, सूरत, मोरबी, देहगाम, भावनगर और मोदासा में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

प्रमुख मार्गों एवं राजमार्गों पर पुलिस की तैनाती होने के बावजूद गुजरात के ग्रामीण इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने सुबह तीन राजमार्गों को बाधित किया और मार्ग पर जलते हुए टायर रख दिए। इससे मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।

भारत बंद को देखते हुए राज्य सरकार ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 लगाई थी जिसके तहत चार से अधिक लोगों के एकत्रित होने पर प्रतिबंध है।

राज्य में कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी)के कार्यालय खुले रहे। हालांकि अमरेली और मोरबी के वांकानेर में कांग्रेस के नियंत्रण वाले बाजार बंद रहे।

पुलिस ने बताया कि अमरेली, जामनगर, राजकोट, गांधीनगर, सूरत, मोरबी, देहगाम, भावनगर और मोदासा में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

प्रमुख मार्गों एवं राजमार्गों पर पुलिस की तैनाती होने के बावजूद गुजरात के ग्रामीण इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने सुबह तीन राजमार्गों को बाधित किया और मार्ग पर जलते हुए टायर रख दिए। इससे मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।

छानी गावं के पास प्रदर्शनकारियों के एक अन्य समूह ने अहमदाबाद-वडोदरा राष्ट्रीय राजमार्ग को बाधित किया।

एक अन्य मामले में प्रदर्शनकारियों ने भरूच और दाहेज को जोड़ने वाले राजमार्ग को नंदेलाव के पास बाधित किया।

झारखंड में भी मिला-जुला असर

रांची (झारखंड): नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के ‘भारत बंद’ के आह्वान का झारखंड में मंगलवार को मिला-जुला असर दिखा।  यहां लगभग सभी सरकारी कार्यालय खुले रहे, लेकिन निजी संस्थान एवं दुकानें आंशिक तौर पर बंद रहीं। राज्य में स्थानीय यातायात अधिकतर सामान्य है, लेकिन अंतरराज्यीय यातायात ठप रहा।

राज्य की राजधानी रांची, धनबाद, हजारीबाग, जमशेदपुर, पलामू, दुमका, बोकारो, साहिबगंज और पाकुड़ समेत सभी 24 जिलों में बंद का मिला-जुला असर दिखा और कहीं से भी किसी प्रकार की अप्रिय घटना का समाचार नहीं है।

सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस एवं राष्ट्रीय जनता दल के साथ वामपंथी दलों ने बंद का समर्थन किया और रांची समेत अनेक शहरों में इसके समर्थन में प्रदर्शन किए।

झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष तथा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रविवार को बयान जारी कर बंद का पूर्ण समर्थन किया था और कहा था कि किसानों की मांगें पूरी तरह उचित हैं और उनकी पार्टी इसका पूर्ण समर्थन करती है।

इसी प्रकार कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने बंद का समर्थन करते हुए कहा कि किसानों के साथ केन्द्र की मोदी सरकार लगातार नाइंसाफी कर रही है।  उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पहले भूमि अधिग्रहण कानून लाकर 2015 में किसानों को बदहाल करने की कोशिश की और अब कृषि कानून लाकर वह किसानों को पूंजीपतियों का गुलाम बनाना चाहती है।

राजद और वामपंथी दलों ने भी केन्द्र सरकार पर किसान विरोधी होने के आरोप लगाये और भारत बंद का समर्थन किया।

दुमका में पट्टाबाड़ी चौक पर झामुमो ने सड़क बाधित कर बंद का समर्थन किया।

पलामू में बंद के दौरान भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व झारखंड प्रदेश सचिव कृष्ण देव सिंह ने पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में आरोप लगाया कि ब्रिटिश कंपनी चुनिंदा व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखकर ही कायदे-कानून बनाया करती थी, ताकि कृषि क्षेत्र में सत्ता का एकाधिकार स्थापित हो और यही काम मोदी सरकार कर रही है।

किसान सभा के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सिंह ने पलामू प्रमंडलीय मुख्यालय मेदिनीनगर में दर्जनों समर्थकों के साथ प्रदर्शन किया।

उत्तर प्रदेश में मिला-जुला असर

लखनऊ (उप्र): नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों द्वारा मंगलवार को आहूत ‘भारत बंद’ का उत्तर प्रदेश में मिलाजुला असर दिखा। भारत बंद का विभिन्न विपक्षी राजनीतिक दलों ने समर्थन किया।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बंद का कोई खास असर नहीं दिखा, लेकिन प्रदेश के अन्य विभिन्न जिलों में बंद का कहीं कम, तो कहीं ज्यादा असर दिखाई दे रहा है।

लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) के विधान परिषद सदस्य राजपाल कश्यप, आनंद भदौरिया, सुनील साजन और आशु मलिक भारत बंद के समर्थन में विधान भवन परिसर में स्थित चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के सामने बैठे।

भारत बंद का समर्थन कर रही कांग्रेस के प्रदेश मीडिया समन्वयक ललन कुमार ने बताया कि सरकार इस बंद को दबाने पर पूरी तरह उतारू है और राज्य के विभिन्न जिलों में देर रात से ही कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी का सिलसिला शुरू कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि गोरखपुर में बंद का समर्थन कर रहे प्रदेश महासचिव विश्व विजय सिंह समेत सैकड़ों कार्यकर्ता गिरफ्तार कर लिए गए।

कुमार ने बताया कि आज़मगढ़ जिला अध्यक्ष प्रवीण सिंह और उपाध्यक्ष दिनेश यादव को नजरबंद कर दिया गया है जबकि ग़ाज़ीपुर शहर अध्यक्ष और चित्रकूट के जिला अध्यक्ष को गिरफ्तार कर लिया गया है। सहारनपुर और कानपुर नगर में भी कांग्रेस पदाधिकारियों की गिरफ्तारी हुई है।

इस बीच, भारतीय किसान यूनियन (राधे गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष राधे लाल यादव ने कहा कि सरकार किसानों की आवाज को दबाने के लिए भारत बंद को विफल करने के मकसद से हर हथकंडा अपना रही है।

उन्होंने कहा कि भारत बंद को विफल बनाने के लिए उनकी यूनियन के कार्यकर्ताओं की भी धरपकड़ की गई है।

इस बीच, राष्ट्रीय किसान मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेखर दीक्षित ने कहा कि उनके संगठन के पदाधिकारियों को उन्नाव, सीतापुर, हरदोई ,औरैया, कन्नौज, प्रयागराज, गाजियाबाद तथा अन्य शहरों में पुलिस ने नजरबंद किया है, जो लोकतंत्र की हत्या जैसा है।

मऊ से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक, भारत बंद के दौरान शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में बाजार बंद दिखाई दिए।

तीन नए कृषि क़ानूनों के विरोध और किसानों के समर्थन में आज दिन भर के भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिला। हालांकि चक्का जाम दिन में 11 बजे से तीन बजे तक ही था। इस बीच तमाम राज्यों से धरना, प्रदर्शन और बाज़ार बंद की तस्वीरें मिलीं। इस दौरान रेल और सड़क यातायात प्रभावित हुआ है। ट्रांसपोर्ट्स यूनियन भी किसानों के लिए इस बंद को समर्थन दिया था।  

आज के बंद को सभी प्रमुख विपक्षी राजनीतिक दलों, 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, भारत के बैंकों, बीमा क्षेत्र, विश्वविद्यालय और स्कूल के शिक्षकों/अधिकारियों, छात्रों, नौजवानों सहित महिलाओं, दलितों और आदिवासियों के संगठनों, सशस्त्र बलों के अवकाशप्राप्त सैनिकों, फ़िल्म उद्योग से जुड़े कामगारों, अनौपचारिक क्षेत्र और अनुबंध कामगारों, आदि सहित सैकड़ों अन्य संगठनों ने समर्थन दिया। यहां तक कि कवि, लेखक, पत्रकार भी लिख रहे हैं कि Poets for farmers, Writer for Farmers, Journalist for farmers.

भाजपा शासित राज्यों में भी बंद को काफी समर्थन मिला। हालांकि इन राज्यों में सरकार ने पुलिस के जरिये बड़ी संख्या में किसान और राजनीतिक नेताओं को या तो हिरासत में लिया या फिर घर में नज़रबंद कर दिया। दिल्ली में तो आम आदमी पार्टी ने यहां तक आरोप लगाया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तक को गृह मंत्रालय के आदेश पर घर में नज़रबंद कर दिया गया। हालांकि पुलिस ने इससे इंकार किया।

दिल्ली और दिल्ली के बॉर्डर पर आज दिनभर गहमागहमी रही। आज सुबह से लेकर शाम तक पंजाब और हरियाणा से ट्रैक्टर ट्रॉलियों व कारों में सवार होकर और किसान सिंघु बॉर्डर पर पहुंचते रहे। हालांकि लगातार 13 दिनों से सिंघु बॉर्डर पर डटे किसानों के लिये चावल, आटा, दाल, तेल, दूध, साबुन और दंतमंजन जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।

पानीपत से आए गुरजैंत सिंह ने कहा, “स्वाभाविक रूप से राशन की आपूर्ति प्रभावित होगी। लेकिन अगले दो-तीन महीनों के लिये हमारे पास पर्याप्त भंडार है। हम लंबे समय तक के लिये तैयारी के साथ आए थे।”

उन्होंने कहा कि लेकिन यह संख्या बढ़नी शुरू हो गई है और बहुत से लोग साइकिलों और बैलगाड़ियों आ रहे हैं।

दोपहर के भोजन के समय प्रदर्शनकारी कुछ गैर सरकारी संगठनों द्वारा संचालित लंगर में भोजन के लिये कतारबद्ध बैठे नजर आए।

भोजन के बाद कुछ किसान आराम करने के लिये ट्रॉलियों में चले गए जबकि कुछ अन्य मंच से भाषण दे रहे अपने नेताओं को सुनने लगे।

ट्रैक्टरों पर लगे स्पीकरों से पंजाबी और हरियाणवी गाने तेज आवाज में बज रहे थे जबकि क्षेत्र की सर्विस लेन में जीपों और कारों में युवा बैठे नजर आए।

बहुत से लोग वहां दैनिक उपयोग की वस्तुएं जिनमें अंत:वस्त्र, बालों में लगाने का तेल, क्रीम, मोजे और साबुन आदि शामिल हैं, लिये घूम रहे थे और जरूरतमंद प्रदर्शनकारियों को यह मुफ्त में वितरित कर रहे थे।

मोहाली से आए राजिंदर सिंह कोहली ने कहा कि उनकी संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है।

प्रदर्शनकारी किसान संघों के भारत बंद की वजह से सड़कों पर वाहन कम दिखे। ऐप आधारित कैब, ऑटो रिक्शा और डीटीसी बसें हालांकि रोड पर देखी जा सकती थीं। सिंघु बॉर्डर की तरफ जा रही सड़कों पर अधिकतर दुकानों बंद थीं।

बंद के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने सभी बॉर्डरों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये थे।

ऑटो, टैक्सी संघ भी बंद में शामिल रहे

दिल्ली सर्वोदय चालक संघ के अध्यक्ष कमलजीत गिल ने दावा किया कि उसके अधिकतर सदस्य हड़ताल पर हैं। यह संगठन ओला और उबर जैसी ऐप आधारित टैक्सी के चालकों का प्रतिनिधित्व करता है।

दिल्ली टैक्सी टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने कहा कि दिल्ली राज्य टैक्सी सहकारी समिति और कौमी एकता कल्याण संघ समेत अनेक संघों से जुड़े वाहन चालक हड़ताल पर हैं।

दिल्ली ऑटो रिक्शा संघ और दिल्ली प्रदेश टैक्सी संघ के महासचिव राजेंद्र सोनी ने कहा, ‘‘हमारे सभी ऑटो और टैक्सियां सामान्य तरीके से चल रहे हैं। हम किसानों और उनकी मांगों का समर्थन करते हैं लेकिन हड़ताल से आम आदमी को समस्या होगी।’’

आईजीआई हवाईअड्डा टैक्सी संघ के अध्यक्ष किशनजी ने बताया कि काली-पीली टैक्सियों का परिचालन सामान्य है और ये हड़ताल में शामिल नहीं हैं।

वाम और कांग्रेस समर्थकों ने बंगाल में सड़कों, रेल पटरियों को किया जाम

कोलकाता: कांग्रेस और वाम दलों के समर्थकों ने मंगलवार को किसानों द्वारा आहूत ‘भारत बंद’ के समर्थन में राज्य में कई स्थानों पर रेल पटरियों को जाम किया और सड़कों पर धरना दिया।

बंद का असर राज्य में देखने को मिला, जहां निजी वाहन सड़कों से नदारद रहे और बस, टैक्सी जैसे सार्वजनिक वाहनों का परिचालन सामान्य से कम रहा।

कोलकाता में, माकपा के कार्यकर्ताओं और एसएफआई तथा डीवायएफआई के सदस्यों ने लेक टाउन, कॉलेज स्ट्रीट, जादवपुर और श्यामबाजार फाइव प्वाइंट क्रॉसिंग जाम की ।

वहीं कांग्रेस समर्थकों ने उत्तर 24 परगना जिले के मध्यग्राम चौमथा में, पश्विम मेदिनीपुर में पंसकुरा, हावड़ा जिले में बाली, मुर्शिदाबाद में बहरामपुर और खड़गपुर में सड़के जाम की, जहां पुलिस उन्हें वाहनों की आवाजाही बाधित ना करने के लिए कहती दिखी।

पूर्वी रेलवे के सियालदह खंड में जादवपुर और मध्यग्राम और हावड़ा खंड में रिशरा और बर्धमान में उन्होंने रेल की पटरियां भी जाम कर दीं।

वाम दल और कांग्रेस समर्थकों ने केन्द्र के कृषि कानूनों के खिलाफ नारे भी लगाए।

माकपा के वरिष्ठ नेता सुजान चक्रवर्ती ने जादवपुर में एससी मलिक रोड के पास 8बी बस स्टैंड से एक रैली की अगुवाई की।

उत्तर बंगाल के कई हिस्से, जहां भाजपा ने अपने एक समर्थक की रैली के दौरान हत्या के खिलाफ सोमवार को 12 घंटे का बंद बुलाया था, वहां भी सन्नाटा पसरा दिखा।

महाराष्ट्र के अनेक हिस्सों में एपीएमसी बंद रही

मुंबई: भारत बंद के समर्थन में महाराष्ट्र के अनेक हिस्सों में कृषि उपज विपणन समितियां (एपीएमसी) बंद रहीं। पुणे, नासिक, नागपुर और औरंगाबाद जैसे बड़े शहरों में थोक मंडियां बंद रहीं। कई शहरों में खुदरा मंडियां भी बंद रहीं।

नवी मुंबई के वाशी और कल्याण में भी एपीएमसी बंद रहीं। यहां से मुंबई के लिए सब्जियों और फलों की आपूर्ति होती है। थोक व्यापारी बंद का समर्थन कर रहे हैं।

सामान्य दिनों में हजारों ट्रक राज्यभर में सब्जी, फल, अनाज और मसालों की आपूर्ति करते हैं।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) के अंतर्गत आने वाले ठाणे और पालघर जिलों में सार्वजनिक सेवाएं प्रभावित हुईं।

सत्तारूढ़ शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस ने बंद का समर्थन किया था।

मुंबई में बसें और लोकल ट्रेन समेत सार्वजनिक परिवहन सेवाएं बंद से लगभग अप्रभावित रहीं। क्योंकि राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारियों से सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को बाधित नहीं करने की अपील की थी।

ऑटोरिक्शा एवं टैक्सी संघों ने भारत बंद को समर्थन दिया है हालांकि उन्होंने भी सेवाएं जारी रखने का फैसला लिया।

गुजरात में भारत बंद का मिला जुला असर दिखा

अहमदाबाद: राज्य में कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी) के कार्यालय खुले रहे। हालांकि अमरेली और मोरबी के वांकानेर में कांग्रेस के नियंत्रण वाले बाजार बंद रहे। पुलिस ने बताया कि अमरेली, जामनगर, राजकोट, गांधीनगर, सूरत, मोरबी, देहगाम, भावनगर और मोदासा में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

प्रमुख मार्गों एवं राजमार्गों पर पुलिस की तैनाती होने के बावजूद गुजरात के ग्रामीण इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने सुबह तीन राजमार्गों को बाधित किया और मार्ग पर जलते हुए टायर रख दिए। इससे मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।

भारत बंद को देखते हुए राज्य सरकार ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 लगाई थी जिसके तहत चार से अधिक लोगों के एकत्रित होने पर प्रतिबंध है।

राज्य में कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी)के कार्यालय खुले रहे। हालांकि अमरेली और मोरबी के वांकानेर में कांग्रेस के नियंत्रण वाले बाजार बंद रहे।

पुलिस ने बताया कि अमरेली, जामनगर, राजकोट, गांधीनगर, सूरत, मोरबी, देहगाम, भावनगर और मोदासा में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

प्रमुख मार्गों एवं राजमार्गों पर पुलिस की तैनाती होने के बावजूद गुजरात के ग्रामीण इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने सुबह तीन राजमार्गों को बाधित किया और मार्ग पर जलते हुए टायर रख दिए। इससे मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।

छानी गावं के पास प्रदर्शनकारियों के एक अन्य समूह ने अहमदाबाद-वडोदरा राष्ट्रीय राजमार्ग को बाधित किया।

एक अन्य मामले में प्रदर्शनकारियों ने भरूच और दाहेज को जोड़ने वाले राजमार्ग को नंदेलाव के पास बाधित किया।

झारखंड में भी मिला-जुला असर

रांची (झारखंड): नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के ‘भारत बंद’ के आह्वान का झारखंड में मंगलवार को मिला-जुला असर दिखा।  यहां लगभग सभी सरकारी कार्यालय खुले रहे, लेकिन निजी संस्थान एवं दुकानें आंशिक तौर पर बंद रहीं। राज्य में स्थानीय यातायात अधिकतर सामान्य है, लेकिन अंतरराज्यीय यातायात ठप रहा।

राज्य की राजधानी रांची, धनबाद, हजारीबाग, जमशेदपुर, पलामू, दुमका, बोकारो, साहिबगंज और पाकुड़ समेत सभी 24 जिलों में बंद का मिला-जुला असर दिखा और कहीं से भी किसी प्रकार की अप्रिय घटना का समाचार नहीं है।

सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस एवं राष्ट्रीय जनता दल के साथ वामपंथी दलों ने बंद का समर्थन किया और रांची समेत अनेक शहरों में इसके समर्थन में प्रदर्शन किए।

झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष तथा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रविवार को बयान जारी कर बंद का पूर्ण समर्थन किया था और कहा था कि किसानों की मांगें पूरी तरह उचित हैं और उनकी पार्टी इसका पूर्ण समर्थन करती है।

इसी प्रकार कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने बंद का समर्थन करते हुए कहा कि किसानों के साथ केन्द्र की मोदी सरकार लगातार नाइंसाफी कर रही है।  उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पहले भूमि अधिग्रहण कानून लाकर 2015 में किसानों को बदहाल करने की कोशिश की और अब कृषि कानून लाकर वह किसानों को पूंजीपतियों का गुलाम बनाना चाहती है।

राजद और वामपंथी दलों ने भी केन्द्र सरकार पर किसान विरोधी होने के आरोप लगाये और भारत बंद का समर्थन किया।

दुमका में पट्टाबाड़ी चौक पर झामुमो ने सड़क बाधित कर बंद का समर्थन किया।

पलामू में बंद के दौरान भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व झारखंड प्रदेश सचिव कृष्ण देव सिंह ने पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में आरोप लगाया कि ब्रिटिश कंपनी चुनिंदा व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखकर ही कायदे-कानून बनाया करती थी, ताकि कृषि क्षेत्र में सत्ता का एकाधिकार स्थापित हो और यही काम मोदी सरकार कर रही है।

किसान सभा के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सिंह ने पलामू प्रमंडलीय मुख्यालय मेदिनीनगर में दर्जनों समर्थकों के साथ प्रदर्शन किया।

उत्तर प्रदेश में मिला-जुला असर

लखनऊ (उप्र): नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों द्वारा मंगलवार को आहूत ‘भारत बंद’ का उत्तर प्रदेश में मिलाजुला असर दिखा। भारत बंद का विभिन्न विपक्षी राजनीतिक दलों ने समर्थन किया।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बंद का कोई खास असर नहीं दिखा, लेकिन प्रदेश के अन्य विभिन्न जिलों में बंद का कहीं कम, तो कहीं ज्यादा असर दिखाई दे रहा है।

लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) के विधान परिषद सदस्य राजपाल कश्यप, आनंद भदौरिया, सुनील साजन और आशु मलिक भारत बंद के समर्थन में विधान भवन परिसर में स्थित चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के सामने बैठे।

भारत बंद का समर्थन कर रही कांग्रेस के प्रदेश मीडिया समन्वयक ललन कुमार ने बताया कि सरकार इस बंद को दबाने पर पूरी तरह उतारू है और राज्य के विभिन्न जिलों में देर रात से ही कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी का सिलसिला शुरू कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि गोरखपुर में बंद का समर्थन कर रहे प्रदेश महासचिव विश्व विजय सिंह समेत सैकड़ों कार्यकर्ता गिरफ्तार कर लिए गए।

कुमार ने बताया कि आज़मगढ़ जिला अध्यक्ष प्रवीण सिंह और उपाध्यक्ष दिनेश यादव को नजरबंद कर दिया गया है जबकि ग़ाज़ीपुर शहर अध्यक्ष और चित्रकूट के जिला अध्यक्ष को गिरफ्तार कर लिया गया है। सहारनपुर और कानपुर नगर में भी कांग्रेस पदाधिकारियों की गिरफ्तारी हुई है।

इस बीच, भारतीय किसान यूनियन (राधे गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष राधे लाल यादव ने कहा कि सरकार किसानों की आवाज को दबाने के लिए भारत बंद को विफल करने के मकसद से हर हथकंडा अपना रही है।

उन्होंने कहा कि भारत बंद को विफल बनाने के लिए उनकी यूनियन के कार्यकर्ताओं की भी धरपकड़ की गई है।

इस बीच, राष्ट्रीय किसान मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेखर दीक्षित ने कहा कि उनके संगठन के पदाधिकारियों को उन्नाव, सीतापुर, हरदोई ,औरैया, कन्नौज, प्रयागराज, गाजियाबाद तथा अन्य शहरों में पुलिस ने नजरबंद किया है, जो लोकतंत्र की हत्या जैसा है।

मऊ से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक, भारत बंद के दौरान शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में बाजार बंद दिखाई दिए।

हलधरपुर थानाध्यक्ष डीके श्रीवास्तव ने पहसा बाजार में बंद दुकानों को देख दुकानदारों से कहा कि जो भी दुकानदार दुकान खोलना चाहता है, वह खोल सकता है और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी।

सपा नेता आलोक सिंह ने कहा कि भारत बंद को समर्थन देने के कारण उनकी पार्टी के लोगों को पुलिस ने घर पर ही रोक दिया है।

कौशांबी से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक जिले में भारत बंद बेअसर रहा। जिले के प्रमुख बाजार रोज की तरह खुले रहे।

नोएडा भारत बंद के मद्देनजर पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं तथा किसान संगठनों से जुड़े लोगों को हिरासत में ले लिया या उन्हें नजरबंद कर दिया।  इस कार्रवाई की विभिन्न राजनीतिक संगठनों ने कड़ी निंदा की।

समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष वीर सिंह यादव को थाना सेक्टर-49 पुलिस ने सर्फाबाद गांव स्थित उनके आवास पर नजरबंद कर दिया। यादव ने कहा कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार पूरी तरह से किसान विरोधी है और यदि सरकार किसान विरोधी नहीं है, तो सरकार को किसान विरोधी कृषि कानूनों को अब तक वापस ले लेना चाहिए था।

ग्रेटर नोएडा में सपा के जिला प्रवक्ता श्याम सिंह भाटी को पुलिस ने हिरासत में लिया है।  भाटी ने कहा कि सपा सरकार की दमनकारी नीतियों से घबराने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ भाजपा सरकार का यह रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है।  भाटी के अलावा सपा के युवजन सभा अध्यक्ष दीपक नागर और वरिष्ठ नेता जतन भाटी सहित दर्जनों नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले रखा है।

सपा नोएडा महानगर अध्यक्ष दीपक विग को भी थाना सेक्टर-24 पुलिस ने उनके आवास से हिरासत में ले लिया। विग ने भी पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष फकीर चंद नागर को पुलिस ने उनके सेक्टर 61 स्थित आवास से हिरासत में ले लिया।

सपा नोएडा (ग्रामीण) के जिलाध्यक्ष रेशपाल अवाना को थाना सेक्टर-20 पुलिस ने उनके निठारी गांव स्थित आवास से हिरासत में ले लिया।  अवाना ने कहा कि समाजवादी पार्टी पूरी तरह से किसानों के साथ है और उनके आंदोलन में कंधे से कंधा मिलाकर साथ देगी।

पुलिस ने समाजवादी पार्टी नोएडा महानगर के पूर्व अध्यक्ष राकेश यादव को सर्फाबाद गांव स्थित उनके आवास पर नजरबंद किया है। इसके अलावा भारतीय किसान यूनियन के नेता परविन्दर यादव को सेक्टर 116 में स्थित उनके आवास में नजरबंद किया गया है।

पुलिस ने युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम नागर, कांग्रेस महानगर अध्यक्ष शहाबुद्दीन एवं महासचिव रिजवान चौधरी को हिरासत में ले लिया।  इस बीच, आप के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र जादौन को भी हिरासत में लिया गया है।

जादौन ने कहा कि सरकार पूरी तरह से तानाशाह हो गई है और जनता की आवाज को पुलिस एवं प्रशासन के बल पर दबाने का काम कर रही है।

उत्तराखंड में ‘भारत बंद’ का कुछ जिलों में दिखा असर

देहरादून: कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों द्वारा मंगलवार को आहूत ‘भारत बंद’ का उत्तराखंड में मिलाजुला असर रहा जहां चमोली, पौड़ी, उत्तरकाशी तथा रूद्रप्रयाग जिलों में इसका बहुत कम प्रभाव देखने को मिला जबकि पिथौरागढ़ जिले में पूर्ण हड़ताल रही।

राजधानी देहरादून में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रीतम सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने राज्य पार्टी मुख्यालय से पल्टन बाजार तक जुलूस निकाला और बंद लागू कराने का प्रयास किया। इसे लेकर उनकी दुकानदारों से झड़प हो गयी और उन्होंने दुकानें बंद करने से मना कर दिया।

बाद में कांग्रेसजनों ने शहर के व्यस्ततम क्लॉक टॉवर इलाके में नए कृषि कानूनों के खिलाफ नारे लगाते हुए धरना दिया जिससे क्षेत्र में कुछ देर के लिए यातायात बाधित हुआ। पुलिस ने हालांकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सिंह और उनके समर्थकों को हिरासत में लेकर जल्द ही यातायात सुचारू किया। कांग्रेसजनों को पुलिस लाइंस ले जाया गया।

शहर में ज्यादातर बाजार और दुकानें खुले रहे जबकि कुछ जगहों पर कांग्रेस या अन्य विपक्षी दलों के धरनों के कारण थोडे—थोडे अंतराल के लिए यातायात अवरूद्ध हुआ ।

उधमसिंह नगर जिले में हालांकि, किसान संगठन बंद लागू कराने के लिए सड़कों पर उतरे लेकिन कोई अप्रिय या शांति भंग की स्थिति नहीं पैदा हुई ।

प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि बंद के दौरान कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी जिलों में कडी सुरक्षा के इंतजाम हैं।

उधमसिंह नगर जिले के जसपुर, काशीपुर, बाजपुर, गदरपुर, किच्छा, सितारगंज, खटीमा और नानकमत्ता में हालांकि ज्यादातर दुकानें और व्यवसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे।

वहीं चमोली, पौड़ी, उत्तरकाशी और रूद्रप्रयाग जैसे पहाड़ी जिलों में बंद का बहुत कम असर देखने को मिला लेकिन सीमांत पहाड़ी जिले पिथौरागढ़ में पूर्ण हड़ताल रही और मुख्य बाजार पूरी तरह से बंद रहे।

मध्यप्रदेश में ‘भारत बंद’ का मिला जुला असर

भोपाल: भाजपा शासित मध्यप्रदेश में किसान संगठनों द्वारा बुलाये गये तथा कांग्रेस व अन्य संगठनों द्वारा समर्थित भारत बंद का मिला जुला असर रहा। इस दौरान प्रदेश में छिटपुट विरोध प्रदर्शन भी हुए।

ग्वालियर जिले में एक कांग्रेस नेता के नेतृत्व में आंदोलनकारियों को खदेड़ने के लिये पुलिस ने पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दुकानदारों से दुकानें बंद करने की अपील करने के साथ कई शहरों में रैली निकाली। शहरों में दुकानें हालांकि आम तौर पर खुली रहीं।

केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के लोकसभा क्षेत्र मुरैना में बंद का मिला जुला असर देखा गया। यहां किसान अपनी उपज बेचने के लिये कृषि उपज मंडी तक नहीं पहुंच सके।

भोपाल सहित प्रदेश के कई हिस्सों में मंडियों का कामकाज प्रभावित रहा क्योंकि किसान अपनी उपज बेचने के लिये बाजार परिसर तक नहीं पहुंचे। भोपाल में सब्जी मंडी में हालांकि सामान्य दिनों की तरह कामकाज हुआ।

आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ताओं ने तोमर के निवास के बाहर धरना प्रदर्शन किया। पुलिस ने इस संबंध में 50 लोगों को हिरासत में लिया है।

राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के बैनर तले भोपाल में किसानों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शासकीय आवास तक एक मार्च निकालने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने इसे चूनाभट्टी इलाके में ही रोक दिया।

भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण यादव और जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कैलाश मिश्रा के नेतृत्व में न्यू मार्केट इलाके में विरोध प्रदर्शन किया।

मिश्रा ने दावा किया कि बंद के तहत पुराने भोपाल में अधिकांश बाजार बंद रहे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विभिन्न इलाकों में दुकानदारों से दुकानें बंद करने का आग्रह किया।

यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ठंड में दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों से मिलना चाहिये और किसानों की समस्याओं का समाधान करना चाहिये।

उन्होंने कहा, ‘‘केन्द्र को किसान विरोधी तीन नए कानूनों को वापस लेना चाहिये। कांग्रेस किसानों के साथ है।’’

इन्दौर में राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह की अगुवाई में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर के छावनी क्षेत्र स्थित संयोगितागंज अनाज मंडी में नये कृषि कानूनों पर विरोध जताते हुए मोदी सरकार और केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ नारे लगाए।

इस मौके पर सिंह ने कहा, “नोटबन्दी और जीएसटी लाने के बाद अब मोदी सरकार ने केवल बड़े-बड़े लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए कृषि क्षेत्र के काले कानून पेश किए हैं। इनके खिलाफ किसानों के साथ ही कृषि उपज मंडियों के हम्माल और तुलावटी सड़क पर हैं।”

उन्होंने मंडी परिसर में किसानों, हम्मालों और तुलावटियों से नये कृषि कानूनों को लेकर चर्चा भी की।

ग्वालियर जिले के डबरा से कांग्रेस विधायक सुरेश राजे ने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया और केन्द्र सरकार का पुतला जलाया। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछार छोड़ कर उन्हें खदेड़ दिया।

प्रदेश के श्योपुर, नरसिंहपुर, टीकमगढ़, विदिशा, राजगढ़, रीवा, भिंड, शहडोल, होशंगाबाद और अन्य जिलों में भी बंद का मिला जुला असर रहा। कई स्थानों पर कांग्रेस और किसानों द्वारा विरोध प्रदर्शन भी किये गये।

प्रदेश के गुना, बड़वानी, मंदसौर, झाबुआ, उमरिया और कुछ अन्य जिलों में बाजार खुले रहे।

इससे पहले, सुबह को होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन किया गया। क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन (केकेएमएस) के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग की।

राजस्थान में बंद का मिला जुला असर, जयपुर में भिड़े भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ता


जयपुर/कोटा/बीकानेर:
 किसान संगठनों द्वारा आहूत ‘भारत बंद’ का राजस्थान में मिलाजुला असर रहा। राज्य की सारी अनाज मंडिया व प्रमुख बाजार बंद रहे हालांकि कुछ इलाकों में दुकानें खुली दिखीं। वहीं राजधानी जयपुर में भाजपा के प्रदेश मुख्यालय के बाहर एनएसयूआई कार्यकर्ताओं की भाजपा युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं से झड़प हो गयी।

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया (एनएसयूआई) के कार्यकर्ता मंगलवार को भाजपा मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने के लिए एकत्रित हुए थे जहाँ भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं के साथ उनकी झड़प हो गई। वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने दोनों पक्षों को अलग-अलग किया।

एनएसयूआई के प्रवक्ता रमेश भाटी ने आरोप लगाया, “हम शांतिपूवक प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन भाजपा युवा मोर्चा के सदस्यों ने हमारे कुछ कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की।”

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां ने आरोप लगाते हुए ट्वीट किया कि कांग्रेस के ‘गुंडों’ ने भाजपा के मुख्यालय पर पथराव किया।

पुलिस उपायुक्त मनोज कुमार ने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने जबर्दस्ती भाजपा कार्यालय में घुसने की कोशिश की। पुलिस द्वारा उन्हें रोका गया। उन्होंने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने पत्थरबाजी की किसी घटना से इंकार कर दिया।

बंद के दौरान रोडवेज की बसें, ट्रक और मिनी बसे नहीं चलीं जबकि ऑटो रिक्शा और ई-रिक्शा आम दिनों की तरह सडकों पर दिखाई दिये।

राजधानी जयपुर में परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने अपने समर्थकों के साथ ट्रेक्टर और अन्य वाहनों के साथ बाजारों का दौरा कर दुकानदारों को बंद में शामिल होने की अपील की।

पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं ने जयपुर के मालवीय नगर, जवाहर लाल नेहरू मार्ग पर किसानों के समर्थन में वाहन रैली निकाली। कार्यकर्ताओं ने अपने हाथों में ‘नो किसान नो फूड’ के नारों वाली तख्तियां ले रखी थीं। राजधानी में सुबह कई दुकानें खुलीं लेकिन उन्हें बंद करवाया गया। शॉपिंग मॉल और कुछ रेस्तरां भी बंद रहे।

भारत बंद के दौरान कोटा संभाग में प्रमुख बाजार और व्यवसायिक प्रतिष्ठान आंशिक रूप से प्रभावित रहे।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कोटा के प्रमुख बाजारों में रैली निकाल कर व्यावसायिक संगठनों और दुकानदारों से किसानों को समर्थन करने की अपील की।

कोटा संभाग के बूंदी, बांरा, झालावाड़, और कोटा के कुछ हिस्सों में बाजार ओर दुकानें बंद रहीं वहीं अन्य स्थानों पर आमतौर की तरह खुली रहीं। इसी तरह का मिला जुला असर जोधपुर और बीकानेर संभागों में भी रहा।

बीकानेर संभाग में जिला मुख्यालय के प्रमुख बाजारों में कुछ दुकानों को छोड़कर व्यवसायिक प्रतिष्ठान खुले रहे। वहीं मंडिया बंद रहीं। जोधपुर संभाग में भी बंद का मिला जुला असर देखने को मिला।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

18 thoughts on “किसानों के समर्थन में ‘भारत बंद’ सफल, बीजेपी शासित राज्यों में भी रहा असर, कई नेता हिरासत में या नज़रबंद रहे

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