October 27, 2021

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Air India: रतन टाटा का सपना सच हुआ, मिल गई एयर इंडिया

नई दिल्ली|टाटा ग्रुप को आखिरकार एयर इंडिया मिल ही गया। 1953 में राष्ट्रीयकरण के बाद यह कंपनी ग्रुप के हाथों से निकलकर सरकार के पास चली गई थी। एक तरह से यह एयर इंडिया की घर वापसी है। इसे खरीदने के लिए खासतौर पर टाटा ग्रुप और स्पाइसजेट के प्रमोटर अजय सिंह में मुकाबला था, लेकिन आखिरी बाजी रतन टाटा के ग्रुप के हाथ लगी। देश के सबसे पुराने कारोबारी समूहों में से एक ने इस कंपनी के लिए जो बोली लगाई थी, मंत्रियों के समूह ने उसे मान लिया। यह सौदा टाटा ग्रुप के लिए ऐतिहासिक है तो सरकार के लिए भी इसकी अहमियत कोई कम नहीं। सरकार ने निजीकरण को लेकर जिस ऐतिहासिक पहल का वादा किया था, उस लिहाज से यह बहुत बड़ा मुकाम है।

 

खबर है कि सरकार ने कंपनी को बेचने के लिए जो न्यूनतम कीमत तय की थी, टाटा ग्रुप ने उससे 3,000 करोड़ रुपये अधिक की बोली लगाई। स्पाइसजेट के अजय सिंह के मुकाबले तो रतन टाटा के ग्रुप ने 5,000 करोड़ रुपये ज्यादा सरकार को देने की पेशकश की। ग्रुप के पास पहले से इस क्षेत्र में पार्टनर्स के साथ विस्तारा और एयरएशिया इंडिया जैसी कंपनियां हैं। अब एयर इंडिया का नाम भी इसमें जुड़ जाएगा। इससे ग्रुप का एविएशन सेक्टर में दबदबा बढ़ेगा। यह रतन टाटा के लिए एक इमोशनल लम्हा भी होगा, जो खुद एक ट्रेंड पायलट हैं। ठीक जेआरडी टाटा की तरह। जेआरडी एयर इंडिया के चेयरमैन थे और सरकार के बुलावे पर वह इंडियन एयरलाइंस के बोर्ड में भी रहे थे। पहले एयर इंडिया का नाम यही हुआ करता था।

सौदे के बाद टाटा ग्रुप का इरादा सस्ती विमानन सेवा देने वाली एयरएशिया इंडिया को एयर इंडिया के तहत लाने का है। आगे चलकर विस्तारा भी इसका हिस्सा बन सकती है, जिसे ग्रुप ने सिंगापुर एयरलाइंस के साथ शुरू किया था। विस्तारा के 49 फीसदी शेयर सिंगापुर एयरलाइंस के पास हैं। एयरएशिया इंडिया में मलेशिया का एयरएशिया बीएचडी ग्रुप 16 फीसदी का हिस्सेदार है। वह अगले साल मार्च तक इस कंपनी से निकल जाएगा।
अखबार इकॉनमिक टाइम्स ने पहले बताया था कि अगर ग्रुप एयर इंडिया को खरीद पाती है तो वह समूचे एविएशन बिजनेस को एक कंपनी के अंदर लाएगी। उसका इरादा इस क्षेत्र की अव्वल कंपनी बनने का है। एयरएशिया इंडिया के ज्यादातर शेयर पहले से ही उसके पास हैं, इसलिए इसमें कोई दिक्कत पेश नहीं आएगी। इससे ग्रुप को एक और फायदा होगा। इस बिजनेस में मार्जिन यानी मुनाफा बहुत कम होता है। पूरे एविएशन बिजनेस को एक कंपनी के अंदर लाने से ग्रुप को मार्जिन बढ़ाने में मदद मिलेगी, इससे उसका खर्चा भी बचेगा।

अभी अगर 100 लोग देश के अंदर उड़ान भरते हैं तो उसमें से 26 एयर इंडिया, एयरएशिया इंडिया और विस्तारा की सेवा लेते हैं। इंडिगो इन तीनों कंपनियों से कहीं आगे है। हर 100 में से 57 यात्री उसके विमानों से उड़ान भरते हैं। टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया की खातिर बोली लगाने के लिए एक अलग इकाई बनाई थी। इसका नाम टैलेस लिमिटेड है। अभी यह पता नहीं चला है कि टाटा ग्रुप के एयरलाइन बिजनेस क्या इसी कंपनी के अंदर लाए जाएंगे।

टाटा ग्रुप का इरादा पहले सिंगापुर एयरलाइंस के साथ मिलकर विस्तारा के जरिये एयर इंडिया की बोली लगाने का था। सिंगापुर एयरलाइंस इसके लिए राजी नहीं हुई, लेकिन उसने टाटा ग्रुप को अकेले सरकारी कंपनी की बोली लगाने की अनुमति दे दी। दोनों के बीच जो साझेदारी हुई थी, उसकी शर्तों के मुताबिक यह जरूरी था। तभी टाटा ग्रुप अकेले एयर इंडिया की बोली लगा पाया। और इस तरह से टाटा परिवार का बरसों पुराना सपना पूरा होने जा रहा है।

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