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सच के साथ

सच के साथ

महिला सशक्तिकरण: सच या झूठ —जाने

पिछले कई दिन से काफी कशमकश चल रही थी दिमाग में, समाज में  हम महिलाओं के प्रति सोच को लेकर एक महिला का चरित्र तय करने वाला समाज कौन होता है।अगर कोई […]

ग़रीब लोगों का अमीर देश बनता भारत

इतिहास के आइने से-समय है तो जरूर पढ़िए पोस्ट को कहा यह जाता है कि इंग्लैंड में शुरू हुई पहली औद्योगिक क्रांति के दौरान कोयले और स्टीम की शक्ति का इस्तेमाल किया […]

महाभारत से कर्म और लाइफ मैनेजमेंट के कुछ सूत्र सीख सकते हैं।

आज हम महाभारत से कर्म और लाइफ मैनेजमेंट के कुछ सूत्र सीख सकते हैं।सकारात्मक दृष्टिकोण-महाभारत का सबसे बड़ा सूत्र है सकारात्मक दृष्टिकोण। जो भी हो रहा है उसमेंसकारात्मक दृष्टि से देखें। उसमें […]

बलिदानी कौम-गुरुओं व सिक्ख भाइयों ने हमारे लिए क्या-2 किया ?

धर्म और देश की रक्षा में जीवन की आहुति देने वाली महान सिख परंपरा का जन्म ऐसे समय में हुआ था, जब भारत पर बर्बर इस्लामियों का कहर अपने चरम पर था। […]

राजनीति क्या है जाने…

अलग अलग लोग राजनीति के बारे में अलग अलग राय रखते है| राजनेता एवं राजनितिक पदाधिकारी के अनुसार यह एक प्रकार की जनसेवा है वही कुछ लोग राजनीति को दांव पेंच मानते […]

सभ्यता या असभ्यता- एक भारतीय आवाज

दोस्तो चित्र को  कम देखना बल्कि जो लिखा है उसको ध्यान से पढ़ना और विचार करना कहि ये सब हमारे घर तो नही हो रहा है ।। लड़कियो के अनावश्यक नग्नता वाली […]

शौर्य दिवस / बाबरी कलंक धराशायी – 6 दिसम्बर, 1992

भारत में विधर्मी आक्रमणकारियों ने बड़ी संख्या में हिन्दू मन्दिरों का विध्वंस किया। स्वतन्त्रता के बाद सरकार ने मुस्लिम वोटों के लालच में ऐसी मस्जिदों, मजारों आदि को बना रहने दिया। इनमें […]

धर्म और राजनीति

पिछले दो दिनों में फेसबुक पे मिला ज्ञान ….बंगाल बारूद के ढ़ेर पे बैठा है. बंगाल में लॉ एंड आर्डर फैल हो चुका है. बंगाल के हालात भयावह है. बंगाल की हालत […]

क्यों मोदी सरकार से खुश नहीं हैं किसान?

लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर हर विपक्षी दल अब किसानों की समस्याओं को उठा रहे हैं. लंबे समय से किसानों को भारतीय राजनीतिक परिदृश्य से एक […]

हमारी सरकारें और अदालतें – चींटी चाल क्यूं

कहते हैं टर्की का रहने वाला बाबर वहां नादिरशाह और चंगेज खां का रिश्तेदार था। जो भी हो उसने अयोध्या में जिस जमीन पर मस्जिद बनवाई, वह ज़मीन न तो उसकी पुश्तैनी […]