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सच के साथ

सच के साथ

मंदिर के लड्डू भी खाता हूं, मस्ज़िद की खीर भी खाता हूं। भूखा हूं साहब, मजहब कहां समझ पाता हूं!

बुराई धर्म में नहीं इंसानों में है। जो हम एक दूसरे के धर्म को नीचा दिखाने में लगे हुए हैं। मंदिर हो मस्जिद हो या कोई अन्य धर्मों के धार्मिक स्थल, वहां […]

प्रेरणाश्रोत : गरीबी के बावजूद भी ये लोग बने IAS

जब सुख सुविधाओं से संपन्न युवा अपने कीमती समय को आत्मसंतुष्टि में बिता रहे होते हैं ऐसे समय में वंचित छात्रों का भी एक समूह है जो अपने दृढ़ संकल्पों के साथ […]

देश में जाति और धर्म की हावी होती राजनीति

वर्तमान राजनीति केवल सत्ता आधारित हो गई है और मूल मुद्दे गायब हो गए हैं। हमारे नेताओं के पास कोई विजन नहीं है, जो लोगों को सही रास्ता दिखाए। कोई भी पार्टी […]

धर्म क्या है? यह एक व्यक्ति के जीवन लिए क्या महत्व रखता है।

कोई भी गुण जो इंसान की मान्यता या स्वयं की उपज हो, वो धर्म ही है . यह गुण स्वाभाविक भी हो सकता है. जैसे अगर आग जलती है तो हम ये […]

नौकरी पेशा महिलाओं का यौन उत्पीडन

यौन उत्पीडऩ का अर्थ केवल यौन संबंध, बलात्कार आदि ही नहीं है बल्कि इसमें वे सभी बातें निहित हैं जो पुरूषों की इन महिलाओं के प्रति यौन उत्कंठाएं दर्शाती हैं। यह उत्पीडऩ […]

राजनीति का अपराधीकरण

हमारे देश ने सैकड़ों वर्षों पश्चात् सन् 1947 में अंग्रेजी दासत्व से आजादी पाई थी । आजादी के समय देश के समस्त नेताओं ने गाँधी जी के ‘रामराज्य’ के स्वप्न को साकार […]

दलित और भारतीय राजनीति

दलित शब्द देखा जाय तो पीड़ित, शोषित, दबा हुआ शब्दों के भावार्थ को प्रदर्शित करता है तथा फलित शब्द के विलोम के तौर पर जाना जाता है। जिसका अर्थ है उच्च, प्रसन्न […]

प्रकृति के लिए मानव बना दानव

हमारे यहाँ प्रतिवर्ष 15 लाख हेक्टेयर वन नष्ट हो रहे हैं, जबकि प्रतिवर्ष वन लगाने की अधिकतम सीमा 3 लाख 26 हजार हेक्टेयर है। यही हाल रहा तो आगामी कुछ दशकों में […]

भारतीय पुलिस व्यवस्था और न्याय ;

यद्यपि भारत में प्राचीन काल से ही विधि की सर्वोच्चता रही है। सुदृढ़ गुप्तचर सेवा की सहायता से कानून को दूरस्त रखने की परम्परा भी बहुत पहले से चली आ रही है। […]

भारतीय राजनीति में जाति की चटनी का स्वाद ;

जातिवाद प्रत्येक धर्म, समाज और देश में है। हर धर्म का व्यक्ति अपने ही धर्म के लोगों को ऊंचा या नीचा मानता है। क्यों? यही जानना जरूरी है। लोगों की टिप्पणियां, बहस […]