September 24, 2022

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Basti Circles: मण्डलायुक्त ने खाली पड़े खेत में तोरिया फसल की बुवाई हेतु मिनीकिट का किया वितरण

मण्डलायुक्त ने खाली पड़े खेत में तोरिया फसल की बुवाई हेतु मिनीकिट का किया वितरण

बस्ती 14 सितंबर। मण्डलायुक्त गोविंदराजू एन.एस. ने मण्डल में अवर्षण एवं कम वर्षा के कारण जिन कृषकों द्वारा अपने धान के खेत की पल्टाई की गयी है अथवा खाली पड़े खेत में तोरिया फसल की बुवाई हेतु विकास खण्ड बस्ती सदर के कृषको लालजी चौधरी, गिरजेष ग्राम-चमरौहा (सियरापार), राधे श्याम, भागीरथी, ग्राम-सूसीपार, हरीराम, ग्राम-लकड़ा, शेषनाथ चौधरी, मिठाई लाल, विनोद कुमार, ग्राम-चननी सियारेखास एवं श्रीचन्द्र, ग्राम-मिश्रौलिया को तोरिया प्रजाति पी0टी0-508 का मिनीकिट (02 किग्रा0 पैकिंग) का वितरण किया।

संयुक्त कृषि निदेषक अविनाष चन्द्र तिवारी ने कृषकों को तोरिया फसल की अधिक उत्पादकता प्राप्त करने हेतु सुझाव दिया कि खेतों की जुताई मिट्टी पलट करने वाले हल से करने के उपरान्त बीज की बुआई लाइन में करें, फसल को भूमि जनित रोगो से बचाने के लिए ट्राइकोडर्मा 2 प्रतिशत डब्लू पी की 2.5 कि0ग्रा0 प्रति हेक्टेयर 50 से 60 कि0ग्रा0 सडी गोबर की खाद में मिलाकर नमी रखते हुए एक सप्ताह के पश्चात भूमि की जुताई के समय मिट्टी में मिला दिया जाए, 02 कि0ग्रा0 प्रति एकड़ की दर से तोरिया की लाइन में बुवाई करें।

उन्होने बताया कि सिंचित क्षेत्रों में 100 कि0ग्रा0 नाइट्रोजन, 50 कि0ग्रा0 फास्फोरस प्रति हेक्टेयर देना चाहिये। फास्फेट का प्रयोग सिंगल सुपर फास्फेट के रूप में अधिक लाभदायी होता है क्योंकि इसमें 12 प्रतिशत गंधक की भी उपलब्धता होती है। फास्फोरस की पूरी मात्रा तथा नत्रजन की आधी मात्रा अन्तिम जुताई के समय तथा नत्रजन की शेष मात्रा पहली सिंचाई (बुवाई के 25 से 30 दिन बाद) टाप ड्रेसिंग के रूप में देना चाहिये।

बुवाई 30 से0मी0 की दूरी पर एवं 3 से 4 से0मी0 की गहराई पर कतारों में करना चाहिए। बुवाई के 15 दिनों के अन्दर घने पौधों को निकालकर पौधों की आपसी दूरी 10 से 15 सें0मी0 कर देनी चाहिए। खरपतवार नष्ट करने के लिए 3.3 ली0 प्रति हे0 पेन्डीमेथिलीन 30 प्रतिषत ई.सी. का प्रयोग बुवाई के 03 दिन के अन्दर प्रयोग करें।

माहू का प्रकोप होने पर मोनोक्रोटोफास 0.75 ली0 तथा क्वीनॉलफास 1.5 ली0 प्रति हे0 से उपचारित करना चाहिये। जब 75 प्रतिषत फलियां सुनहरे रंग की हो जाएं तो फसल को काटकर सुखाकर व मड़ाई करके बीज अलग करना चाहिए।

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