October 27, 2021

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Basti News:न्यायपूर्वक किसी को दुःख देना अहिंसा तथा अन्यायपूर्वक किसी को सुख देना भी हिंसा;अदित्यनारायन गिरि

बस्ती 14 अक्टूबर। सामान्य रूप से किसी को दुख न देते हुए सबके सुख और कल्याण की कामना और प्रयत्न करना अहिंसा माना जाता है पर महर्षि पतंजलि ने योगदर्शन में अहिंसा की परिभाषा देते हुए कहा है कि न्यायपूर्वक किसी को दुःख देना अहिंसा तथा अन्यायपूर्वक किसी को सुख देना भी हिंसा कहलाती है अर्थात देशद्रोही को दण्ड देना अहिंसा है।

उक्त बातें भारत स्वाभिमान एवं आर्य समाज नई बाजार बस्ती द्वारा नगर थाने में आयोजित योग शिविर में पुलिसकर्मियों को अष्टांग योग की शिक्षा देते हुए योग शिक्षक अदित्यनारायन गिरि ने कही।थानाप्रभारी बाबू लाल प्रसाद सहित सभी थाना कर्मियों ने पूरे समर्पण के साथ योगासनों का अभ्यास किया और साप्ताहिक शिविर का अनुरोध किया।

समापन अवसर पर थानाध्यक्ष महोदय को सत्यार्थ प्रकाश पुस्तक भेंट किया गया। योग शिक्षक ने बताया कि योग का प्रथम सोपान यम है जिसका अर्थ बन्धनों से छूटना है इसके लिए इसके पाॅच विभागों अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह का पालन करना होता है। प्राणायाम कराते हुए योग मुद्राओं जैसे ज्ञान मुद्रा, शून्य मुद्रा, अपान मुद्रा, पृथ्वी मुद्रा एवं वरुण मुद्रा के लाभ बताते हुए बताया कि ज्ञान मुद्रा से स्मरण शक्ति तेज होती है तो शून्य मुद्रा कान सम्बन्धी रोगों में लाभदायक है। अपान मुद्रा वात रोग को मिटाती है जबकि पृथ्वी मुद्रा से शरीर का भार संतुलित होता है।

इसके अलावा कान दर्द एवं नेत्र विकार को दूर करने हेतु एक्यूप्रेशर उपचार बिन्दंओं के बारे में भी बताते हुए घरेलू औषधियों के बारे में भी बताया। ओम प्रकाश आर्य जिला प्रभारी भारत स्वाभिमान समिति बस्ती ने बताया कि पुलिस की सेवा अत्यन्त तनावपूर्ण होती है ऐसे में योग उनके लिए तनावमुक्त जीवन प्रदान करने वाला है। भारत स्वाभिमान और आर्य समाज समाज कल्याण के लिए निःशुल्क शिविरों की व्यवस्था करता रहेगा।

 

रिपोर्ट:गरुण ध्वज पाण्डेय

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