Category: अच्छी सोच

गरीबों का भला कैसे हो??

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को दी गई चाय पार्टी के अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि हमारे हर कार्य की दिशा कमजोर वर्गों के लाभ पर आधारित होगी […]

क्या अमीरी घटाए बगैर घट सकती है गरीबी…?

देश के 75 फीसदी गरीबों या देश के 75 फीसदी किसानों या देश के 75 फीसदी हिस्से, यानी गांवों के लिए क्या और कितनी मात्रा में करने का ऐलान हुआ। वैसे तरह-तरह […]

गंणतंत्र को भ्रष्टतंत्र से कब मिलेगी मुक्ति?

हिंदी के सबसे बड़े व्यंग्यकारों में से एक, हरिशंकर परसाई ने एक बार लिखा था, कि सबसे ज़्यादा विटामिन पैसे में होता है। हरिशंकर परसाई की ये बात, हमारे सिस्टम की नस-नस […]

गण पर हावी तंत्र

कवि मैथिलीशरण गुप्त ने लिखा है कि, ‘जो भरा नहीं भावों से बहती जिसमें रसधार नहीं, वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं…।’ प्रणाम है उन महान शहीद […]

गणतंत्र पर हावी होता भ्रष्टतंत्र

गणतंत्र दिवस 26जनवरी आज ही है। में सोच रहा हॅू कि आखिर हमारे भोले भाले नादान प्रधानमंत्री जी लाल किले की प्राचीर से गणतंत्र का झंडा फहरायेगे या भ्रष्टतंत्र का कहना मुश्किल […]

जातिगत संघर्ष: अतुल्य भारत पर एक दाग;

प्राचीन वैदिक समाज को श्रम विभाजन तथा सामाजिक जिम्मेदारियों के तहत चार वर्णों में विभाजित किया गया था। कालांतर में इनसे लाखों जातियां बन गईं। प्राचीन वर्ण व्यवस्था का सही या गलत […]

विज्ञान या भगवान? किसे मानें आइए जानते हैं!

लॉर्ड केल्विन 19वीं सदी के महान वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं.वो एक धर्मनिष्ठ ईसाई थे, जिन्होंने अपने धर्म और विज्ञान में सामंजस्य बिठाने का तरीका ढूंढा लेकिन इसके लिए उन्हें डार्विन सहित […]

वैश्वीकरण या पश्चिमीकरण

अभी तक का यथार्थ यही नज़र आता है कि वैश्वीकरण का अर्थ व्यापक रूप में पश्चिमीकरण ही है। कुछ एक देशों की व्यापारिक सफ़लता भी सिवाय औद्योगिक निर्यात के पश्चिम को और […]

देश, समाज और राजनीति के लिए बाधक है जातिवाद !

भारतीय राजनीति में जातिवाद भारतीय राजनीति की मुख्य विशेषता है: “परम्परावादी भारतीय समाज में आधुनिक राजनीतिक संस्थाओं की स्थापना ।’’ स्वाधीनता प्राप्ति के पश्चात् भारतीय राजनीति का आधुनिक स्वरूप विकसित हुआ । […]

आरक्षण एक कोढ़ है, जिसे ख़त्म करना जरुरी है, आरक्षण का काला चिटठा पढने के लिए क्लिक करें

भारत की राजनीती में आरक्षण एक अहम् मुद्दा बन चूका है। आरक्षण को लेकर सबका मत अपने स्वार्थ अनुसार है। जिसका जिस पक्ष में अपना हित दिख रहा होगा, वह उसी का […]