Category: देश

सबसे ज्यादा अनपढ़ लोगों का देश

  यह दुखद सच्चाई पिछले दिनों एक सर्वेक्षण के जरिये सामने आई कि भारत अनपढ़ वयस्कों की सर्वाधिक आबादी वाला देश है। आंकड़ा बताता है कि अनपढ़ों की यह जनसंख्या उन्तीस करोड़ […]

तेजस एक्सप्रेस की अटेंडेंट्स की तस्वीरें देखकर हंस रहे हैं, तो ये पढ़ लीजिए

भारत की पहली कॉर्पोरेट ट्रेन तेजस की तस्वीरें आपने सोशल मीडिया पर देखी ही होंगी. ये ट्रेन लखनऊ से दिल्ली के बीच चलने लगी है. इस ट्रेन में मिलने वाली कई सुविधाएं […]

Bharat Petroleum बेचने को तैयार मोदी सरकार, Reliance Industries के मुकेश अंबानी लगा सकते हैं बोली

नोमुरा के नोट के अनुसार बीपीसीएल में हिस्सेदारी खरीदने के बाद रिलायंस को 25 फीसदी मार्केट शेयर हासिल हो जाएगा। इसमें 3.4 करोड़ टन की अतिरिक्त रिफाइनिंग क्षमता के साथ ही उसे […]

देश की दूसरी सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी BPCL को क्यों बेचने जा रही है सरकार?

सरकार सरकारी स्वामित्व की कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर डिसइन्वेस्टमेंट यानी विनिवेश की ओर तेज़ी से बढ़ रही है. 30 सितंबर, 2019 को सचिव स्तर की एक मीटिंग में फैसला हुआ कि सरकार- […]

अगर रावण आज के टाइम में होता, तो सबसे बड़ी दिक्कत उसे ये होती

  छोटेपन से हर दशहरे पर एक निबंध लिखने को ज़रूर मिलता था. विषय होता था, अपने अन्दर के रावण पर कैसे विजय पाएं. ले दे कर वही दस पांच पॉइंट होते […]

अगले जन्म में किस जाति में पैदा होने की इच्छा जताई थी गांधी ने?

  कल बाइक की चाभी छिटक कर नाली में गिर गई. मैंने बगल में पड़ी पॉलिथीन दस्ताने की तरह हाथ पर चढ़ाकर अपनी चाभी निकाली.   भरोसा कीजिए, नाली में हाथ डालकर […]

किसान सम्मान निधि के लिए वेबसाइट के माध्यम से अब किसान स्यवं ही कर सकते हैं आनलाइन आवेदन, संशोधन व परीक्षण

  कृषक बन्धु अब भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने अथवा आधार आदि में संशोधन स्वयं ही कर सकते हैं। यह जानकारी देते हुए जिलाधिकारी […]

भारत में निजीकरण की हिमायती सरकारों को एक बार ब्रिटेन का उदाहरण देखना चाहिए

  भारत में निजीकरण को अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी बूटी कहा जा रहा है लेकिन, इस नीति के अगुवा रहे ब्रिटेन की जनता का इससे मोहभंग होने लगा हैभारत ने 1991-92 के […]

नफा का निजीकरण और नुकसान का राष्ट्रीयकरण…

वर्तमान में निजीकरण अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अर्थनीति का एक अभिन्न अंग बन चुका है। कुछ वर्षों पूर्व तक जो देश पूर्ण राजकीय स्वामित्व वाली केन्द्र नियोजित अर्थव्यवस्था चला रहे थे उन देशों […]

निजीकरण व्यवस्था नहीं बल्कि पुनः रियासतीकरण है.

निजीकरण व्यवस्था नहीं बल्कि पुनः रियासतीकरण है.. मात्र 70 साल में ही बाजी पलट गई। जहाँ से चले थे उसी जगह पहुंच रहे हैं हम। फर्क सिर्फ इतना कि दूसरा रास्ता चुना […]