Category: भारतीय शिक्षा प्रणाली

मिलिए देश के सबसे युवा IAS अधिकारियों से, जिनके परिवार ने उनके सपनों के लिए छोड़ दिया एक वक्त का खाना

देश के सबसे प्रतिष्‍ठित और चुनौतीपूर्ण एग्‍जाम में से एक है संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा. इस परीक्षा को क्रैक करना आसान काम नहीं होता है लेकिन […]

हमें मैकाले को कोसना चाहिए, पर हमारे पास क्या आज भी कोई विकल्प मौजूद है?

लॉर्ड मैकाले द्वारा बनाई गई भारतीय दंड संहिता और शिक्षा पद्धति को हम आज भी लेकर चल रहे हैं.   2018 को भारतीय इतिहास में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए कुछ अभूतपूर्व […]

मैकाले के प्रभाव और इस देश की शिक्षा पद्धति

मैकाले की प्रासंगिकता और भारत की वर्तमान शिक्षा एवं समाज व्यवस्था में मैकाले प्रभाव :मैकाले नाम हम अक्सर सुनते है मगर ये कौन था? इसके उद्देश्य और विचार क्या थे कुछ बिन्दुओं […]

सड़ता शिक्षा तंत्र- उभरते सवाल

शिक्षा पर बात करने से पहले एक सरल-सा किंतु महत्वपूर्ण आंकड़ा आपसे शेयर करना चाहूंगा। भारत की जनसंख्या करीब 1 अरब 25 करोड़ है एवं विश्व की जनसंख्या करीब 7 अरब है […]

अमेरिका में भारत का अध्ययन

भारत की स्वाधीनता से पहले अमेरिका में भारत का जितना अध्ययन होता था, उसके मुकाबले अब यह अध्ययन कुछ कम हो गया है. सन् 1939 में महान् संस्कृतविद डब्ल्यू नॉर्मन ब्राउन ने […]

बेटे के लिए पिता बेच रहा था किडनी, खबर देख BJP सांसद बोले- मैं उठाऊंगा पूरा खर्च, खुश हुआ बच्चा

गुजरात में नवसारी जिले के वांसदा तालुका में एक अंधा बाप अपने बेटे की पढ़ाई के लिए खुद की किडनी बेचने वाला था, मीडिया में यह खबर देखने के बाद एक भाजपा […]

आखिर आजादी के 71 वर्षों बाद भी ओबीसी समाज अपना हक क्यों नहीं प्राप्त कर पाया?

ओबीसी का बहुलांश हिस्सा न केवल सामाजिक-शैक्षणिक तौर पर पिछड़ा है, बल्कि संपत्ति और साधन विहीन भी है। इस समुदाय के एक बडे हिस्से के पास कोई हुनर भी नहीं है। आजादी […]

व्यापार और शिक्षा का व्यापार

हमारा लक्ष्य – जन-धन का सही उपयोग एवं राष्ट्रीय बौद्धिक विकास द्वारा आर्थिक स्वतन्त्रता जहाँ भी, कुछ भी आदान-प्रदान हो रहा हो, वह सब व्यापार के ही अधीन है। व्यक्ति का जितना […]

शिक्षा का कारोबार

बाजार अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह कि वह व्यक्ति, घटना, मूल्य, संस्कार यहाँ तक कि संवेदन को भी उत्पाद में बदल देती है। ऐसे में शिक्षा पाने और देने-दिलाने का उपक्रम […]

इस्लाम नहीं कबुला तो दीवार में चुनवा दिया..एक वीरगाथा

जान दे दी लेकिन इस्लाम कबूल नहीं किया- वर्ष 1705 में हुई इस घटना के वक्त बाबा जोरावर सिंह साहिब की उम्र 9 वर्ष थी और श्री फतेह सिंह साहिब की उम्र […]