Category: संपादकीय

भगत सिंह: औद्योगिक विवाद अधिनियम और श्रमिकों का शोषण

भगत सिंह, औद्योगिक विवाद अधिनियम और श्रमिकों का शोषण आज इतिहास अपने आप को दोहरा रहा है। ब्रिटिश  औद्योगिक विवाद अधिनियम और वर्तमान केंद्र सरकार के श्रम संहिता विधेयक और कृषि सुधार […]

संसद सत्र: न महामारी की चर्चा, न बेरोज़गारी की बात, सिर्फ़ ख़तरनाक बिलों की बरसात

संसद सत्र: न महामारी की चर्चा, न बेरोज़गारी की बात, सिर्फ़ ख़तरनाक बिलों की बरसात सरकार संसद के मौजूदा सत्र में जिन बिलों को पारित कराने जा रही है वे देश की […]

संपादकीय:श्रमिकों के मूलभूत अधिकारों को नकारने की कोशिश

श्रमिकों के मूलभूत अधिकारों को नकारने की कोशिश इन कानूनों के कारण जब ट्रेड यूनियनें कमजोर पड़ जाएंगी, हड़ताल करना असंभव हो जाएगा, श्रमिकों पर हमेशा काम से हटाए जाने की तलवार […]

भगत सिंह : “एक ना एक शम्मा अंधेरे में जलाये रखिये, सुब्ह होने को है माहौल बनाये रखिये”

भगत सिंह : “एक ना एक शम्मा अंधेरे में जलाये रखिये, सुब्ह होने को है माहौल बनाये रखिये” अंधेरा गहरा है, लेकिन भगत सिंह को जब याद करते हैं तो उनके पसंदीदा […]

अन्नदाताओं के हितों की रक्षा क्यों ज़रूरी है?

अन्नदाताओं के हितों की रक्षा क्यों ज़रूरी है? सरकार द्वारा पारित नए कानून भारतीय कृषि और इससे जुड़े करोड़ों लोगों को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में सिर्फ नेताओं के आश्वासन से […]

जानिए, किसानों ने भारत बंद क्यों किया?

जानिए, किसानों ने भारत बंद क्यों किया? अभी तक का कॉन्ट्रैक्ट खेती का अनुभव बताता है कि कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें मजबूत व्यापारियों के पक्ष में झुकी होती है। किसानों का मुनाफा होने […]

भूदान, ग्रामदान, उद्योगदान, जीवनदान और विचारदान वाले विनोबा भावे का यह दान आखिर गया कहां!

इन अभियानों में अगर विनोबा लाखों लोगों को प्रेरित कर पाए तो सिर्फ इसलिए कि गांधीजी के जाने के बाद भारतीय समाज के सभी तबकों का उनपर सहज और सबसे ज्यादा भरोसा […]

तमाम दावों के बावजूद दुनिया में हमारी हिंदी कहां है?

चीन में चीनी भाषा न जानने पर विदेशियों को नीचा देखना पड़ता है. भारत में हिंदी जानने पर उन्हें नीचा देखना पड़ सकता है. सच के साथ |भाषाई आधार पर हम दुनिया […]

गहरे संकट में उच्च शिक्षा

सच के साथ |भारत में उच्च शिक्षा किस तरह बदहाल है, इस पर अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की एक रिपोर्ट से रोशनी पड़ी है। यह विडंबना ही है कि एक […]

कोरोना की मारी न्याय-व्यवस्था

सच के साथ |कोविड-19 की महामारी से भारतीय न्याय व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। देश के ज्यादातर हिस्सों में अभी भी कोर्ट परिसर अपेक्षाकृत सूने नजर आते हैं। जहां लॉक़डाउन है, […]