Category: Motivesnol

राजस्थान पुष्कर मेला / 14 करोड़ रुपए का भीमकाय भैंसा; 13 सौ किलो वजन, काजू-बादाम और मक्खन खाता है..

राजस्थान के पुष्कर अंतरराष्ट्रीय पशु मेले में विभिन्न प्रजाति के करीब 5 हजार से अधिक पशु पहुंचे हैं, इनमें में मुर्रा नस्ल का भैंसा भीम भी है। इस भैंसे के रखरखाव और […]

प्राइमरी टीचर से आईएएस बनीं सीरत जैसा जीवट हर किसी के वश का नहीं

रोजाना तीस किलो मीटर बस से, फिर आठ किलो मीटर पैदल सफर तय कर तमाम विपरीत परिस्थितियों में प्राइमरी टीचर से आईएएस बन चुकीं सीरत फ़ातिमा जैसा जीवट हर किसी के वश […]

आनंद महिंद्रा के हौसले ने शिल्पा को कामयाबी की बुलंदी तक पहुंचाया

“एक दिन अचानक पति के लापता हो जाने से लाचार मंगलौर (कर्नाटक) की शिल्पा ने संकल्प लिया कि अब वह घर की गाड़ी खुद खीचेंगी। कर्ज जुटाया, महिंद्रा ग्रुप के सीईओ आनंद […]

एशिया की वह पहली महिला, जो पीडब्ल्यूडी विभाग में बनीं चीफ इंजीनियर!

भारत में इंजीनियरिंग का क्षेत्र आज भी पुरुष-प्रधान है। उच्च शिक्षा पर एक अखिल भारतीय सर्वेक्षण के अनुसार, आर्ट्स और साइंस के बाद इंजीनियरिंग में सबसे ज़्यादा दाखिले होते हैं, जिनमें सिर्फ़ […]

15 की उम्र में शादी, 18 में विधवा : कहानी भारत की पहली महिला इंजीनियर की!

एक मध्यम वर्गीय तेलगु परिवार में जन्मी ए ललिता की शादी तब कर दी गई थीं जब वह मात्र 15 वर्ष की थीं। 18 साल की आयु में ये एक बच्ची की […]

रानी रामपाल: गरीबी, विरोध और समाज के तानों से लड़कर, बनी भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान!

हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में स्थित शाहाबाद मारकंडा से ताल्लुक रखने वाली रानी रामपाल ने छह साल की उम्र में हॉकी खेलना शुरू किया था। आज वे भारतीय महिला हॉकी टीम की […]

महिला हॉकी कप्तान के पिता आज भी चलाते हैं घोड़ा गाड़ी, ऐसी है उनकी फैमिली

कुरुक्षेत्र: भारतीय महिला हॉकी टीम की फास्ट फॉरवर्ड प्लेयर रानी जहां फ्लाइट से ओलिंपिक खेलों के लिए रियो जा रही थीं। वहीं, उनके पिता रामपाल घोड़ा गाड़ी चला अपने काम में जुटे रहे। […]

कप्तान रानी रामपाल: मेरी टीम में हर खिलाड़ी कप्तान है

  खेलों की दुनिया की एक पुरानी कहावत है कि एक अच्छी टीम का कप्तान भी अच्छा होता है. पर इस कहावत का उल्टा यानी एक अच्छा कप्तान अपनी टीम को अच्छी […]

क्या सच में पैसा सबसे बड़ा होता है ?

सवाल जो या तो आपको पता नहीं, या आप पूछने से झिझकते हैं, या जिन्हें आप पूछने लायक ही नहीं समझते…     ‘पैसा सब कुछ तो नहीं लेकिन बहुत कुछ जरूर […]

दुनिया मेरे आगे: झूठ का परदा

मनोविश्लेषकों का कहना कि इस तरह के लोग दूसरों को प्रभावित करने के आशय से अपने और अपने काम, अपनी उपलब्धियों के बारे में इस प्रकार झूठी बातें बढ़ा-चढ़ा कर बताते हैं […]