Category: Republic day

मानवाधिकार और पुलिस सुधार

मानवाधिकार और पुलिस सुधार कानून के राज पर कितनी ही भाषणबाजी के बावजूद, मानवाधिकारों की सुरक्षा और उन्हें प्रोत्साहन के लिए संवैधानिक प्रावधानों और संस्थानों की मौजूदगी के बावजूद यह तथ्य है […]

बस्ती: पुलिस लाइन में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया गणतंत्र दिवस

  बस्ती| गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर मुख्य अतिथि श्री आशुतोष निरंजन जिलाधिकारी बस्ती द्वारा पुलिस लाइन बस्ती में आयोजित कार्यक्रम में ध्वजारोहण कर परेड का निरीक्षण किया गया व पुलिस […]

हमारे संविधान के केंद्र में सामाजिक हित तो हैं लेकिन, उसके सबसे बड़े पैरोकार गांधी नहीं हैं, जानिए

ग्राम स्वराज का सपना देखने वाले गांधी ने ब्रिटिश संसद को वेश्या तक कह डाला था. पर नेहरू, गांधी का प्रजातंत्र और यूरोप का लोकतंत्र दोनों नहीं चाहते थे।   सच के […]

Republic Day 2020 : राजपथ पर राष्ट्रपति ने फहराया झंडा, परेड में 21 तोपों की दी गई सलामी

नई दिल्ली|आज गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में दिल्ली के राजपथ पर खास उत्सव का आयोजन किया गया है. इस आयोजन मंद देश की बढ़ती हुई सैन्य ताकत, सांस्कृतिक रूप से मूल्यवान विरासत […]

रिपोर्ट : भारत में सौ में केवल 24 हैं कामकाजी महिलाएं

जेंडर गैप रिपोर्ट 2020 के तहत भारत में 82% पुरुषों की तुलना में केवल 24% महिलाएं ही कामकाजी हैं। केवल 14% महिलाएं नेतृत्वकारी भूमिकाओं में हैं और भारत का इस इंडेक्स में […]

जन्म दिन: क्यों सुभाष चंद्र बोस की मौत का दावा आधुनिक भारत के सबसे बड़े रहस्यों में से एक है

कहा जाता है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत 1945 में ताइवान में हुए विमान हादसे में हो गई थी. लेकिन इस बात पर संदेह करने के कारण मौजूद हैं.   […]

क्या दुनिया का कोई देश वैसा धर्मनिरपेक्ष है जैसा होने की उम्मीद कई लोग भारत से करते हैं..

भारत में ‘धर्म’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ का अर्थ वह नहीं है जो लैटिन से निकले अंग्रेज़ी शब्दों ‘रिलिजन’ और ‘सेक्युलर’ का है।     सच के साथ|26 जनवरी का दिन भारत में गणराज्य […]

पत्रकार जिन्होंने लोकतंत्र की हत्या की; जानिए

पत्रकारिता की संवैधानिक मान्यता नहीं है, लेकिन हमारे देश के लोग पत्रकारिता से जुड़े लोगों पर संसद, नौकरशाही और न्यायपालिका से जुड़े लोगों से ज़्यादा भरोसा करते हैं. हमारे देश के लोग […]

गणतंत्र की चार चुनौतियां क्या है?

यदि 1947 में भारत कोई स्टार्ट-अप होता तो, सर्वाधिक जोखिम उठाने वाले किसी उद्यमी पूंजीपति ने भी इस दुस्साहसिक प्रयोग में निवेश नहीं किया होता। स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में हमारे शुरुआती […]

गंणतंत्र को भ्रष्टतंत्र से कब मिलेगी मुक्ति?

हिंदी के सबसे बड़े व्यंग्यकारों में से एक, हरिशंकर परसाई ने एक बार लिखा था, कि सबसे ज़्यादा विटामिन पैसे में होता है। हरिशंकर परसाई की ये बात, हमारे सिस्टम की नस-नस […]