June 18, 2021

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CBI के नए बॉस:1985 बैच के IPS सुबोध कुमार जायसवाल CBI के नए डायरेक्टर बनाए गए; दो साल होगा कार्यकाल; पीएम के अध्यक्षता में लगाई गई मुहर

CBI के नए बॉस:1985 बैच के IPS सुबोध कुमार जायसवाल CBI के नए डायरेक्टर बनाए गए; दो साल होगा कार्यकाल,पीएम के अध्यक्षता में लगाई गई मुहर

 

नई दिल्ली|1985 बैच के IPS सुबोध कुमार जायसवाल को CBI का नया डायरेक्टर बनाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई हाई लेवल कमिटी की मीटिंग में इसका फैसला लिया गया। इस कमिटी में भारत के चीफ जस्टिस एनवी रमना और लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी शामिल थे।

मंगलवार को पर्सनल मिनिस्ट्री ने उनकी नियुक्ति का ऑर्डर जारी किया। उन्होंने बुधवार को पदभार ग्रहण भी कर लिया। CBI डायरेक्टर का पद फरवरी से खाली था। तभी से अतिरिक्त निदेशक प्रवीण सिन्हा इसके अंतरिम प्रमुख थे।

2022 में रिटायर होंगे
CBI चीफ की दौड़ में उत्तर प्रदेश के DGP एचसी अवस्थी, SSB के DG कुमार राजेश चंद्रा और गृह मंत्रालय के विशेष सचिव वीएसके कौमुदी आगे चल रहे थे, लेकिन आखिर में सुबोध कुमार जायसवाल का नाम फाइनल किया गया। वे दो साल तक इस पद पर रहेंगे। सुबोध कुमार जायसवाल महाराष्ट्र के DGP और ATS चीफ रह चुके हैं। अभी वह CISF के डायरेक्टर जनरल हैं। 58 साल के जायसवाल 2022 में रिटायर होंगे।

जासूसों के मास्टर माने जाते हैं जायसवाल
सीनियर IPS ऑफिसर सुबोध जायसवाल बेदाग छवि के अफसर माने जाते हैं। पुलिस सेवा में बेहतरीन काम के लिए उन्हें 2009 में प्रेसिडेंट पुलिस मेडल से भी नवाजा जा चुका है। जायसवाल को जासूसों का मास्टर भी कहा जाता है। उन्होंने रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) में भी अपनी सेवाएं दी हैं। वह कैबिनेट सचिवालय में अतिरिक्त सचिव भी रह चुके हैं। जायसवाल ने कई बड़े मामलों की जांच लीड की है।

मुंबई पुलिस में रहते हुए वह करोड़ों रुपए के जाली स्टंप पेपर घोटाले की जांच करने वाली स्पेशल टीम के चीफ थे। साल 2006 में हुए मालेगांव विस्फोट की जांच भी सुबोध कुमार जायसवाल ने ही की थी। वह प्रधानमंत्री, पूर्व PM और उनके परिवारों की सुरक्षा करने वाले स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के इंटेलिजेंस ब्यूरो में भी काम कर चुके हैं।

तीन बार NDA के एग्जाम में नाकामयाब हुए थे
36 साल के कैरियर में चार प्रधानमंत्रियों के साथ काम कर चुके सुबोध कुमार ने एक कार्यक्रम में बताया था कि वे झारखंड के छोटे से गांव से हैं। ग्रेजुएशन और MBA करते हुए उन्होंने तीन बार नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) का एग्जाम दिया, लेकिन तीनों बार नाकामयाब रहे। उन्होंने तब बताया था कि UPSC का एग्जाम क्लियर करने के बाद उन्हें पता नहीं था कि इसके बाद नौकरी कौन सी मिलनी है।

इस आधार पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने दिया दखल

 

नए सीबीआई प्रमुख के चयन के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था. इस समिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीजेआई एनवी रमना और लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी शामिल थे. इस समिति ने सोमवार को सुबोध कुमार जायसवाल, केआर चंद्रा और और वीएसके कौमुदी का नाम शॉर्टलिस्ट किया था. हालांकि इस लिस्ट के लिए वाईसी मोदी और अस्थाना की संभावना को खारिज कर दिया गया जबकि वो पहले इस पद के प्रबल दावेदार बताए जा रहे थे.

 

सीजेआई रमना ने चयन प्रक्रिया के दौरान उत्तर प्रदेश के डीजीपी के चयन को लेकर 2019 में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का हवाला देते हुए सीबीआई प्रमुख के पद के लिए वाईसी मोदी और अस्थाना की संभावना को खारिज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार ऐसे किसी भी अधिकारी को किसी विभाग के प्रमुख के पद पर नियुक्त ना किया जाए जिसके वर्तमान पद से रिटायरमेंट के छह महीने से भी कम का समय बचा हो. वाईसी मोदी और अस्थाना दोनों ही के वर्तमान पद से रिटायरमेंट के छह महीने से भी कम का समय बचा है.

 

अधीर रंजन चौधरी ने चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल

 

लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आपत्ति जाहिर की. कांग्रेस नेता ने एक नोट जारी करते हुए कहा, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने अंतिम समय में 109 उम्मीदवारों की लिस्ट में से 16 नाम शॉर्टलिस्ट किए थे. हालांकि उन्हें केवल चुनिंदा नामों को चुनने और उन्हें आगे बढ़ाने का वैधानिक अधिकार नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि DoPT जानबूझकर इस चयन के लिए चुनी गयी उच्च स्तरीय समिति के काम को प्रभावित कर रही है.

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