December 7, 2021

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CM योगी का फैसला, कोरोना काल में दर्ज हुए 3 लाख मुकदमें होंगे वापस, निर्देश जारी

लखनऊ |उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ा ऐलान किया है. योगी सरकार ने कहा है कि कोरोना महामारी के दौरान कोविड प्रोटोकाल व लॉकडाउन उल्लंघन से जुड़े तीन लाख से अधिक दर्ज मुकदमे वापस लेगी. लेकिन, वर्तमान व भूतपूर्व सांसदों, विधायकों व विधान परिषद सदस्यों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस नहीं होंगे. इसके लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं. यूपी के विधि एवं न्याय मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा है कि योगी सरकार के इस निर्णय से सामान्य नागरिकों को अनावश्यक अदालती कार्रवाई व फौजदारी प्रक्रिया की कार्रवाई से बड़ी राहत मिलेगी.

 

प्रमुख सचिव न्याय प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने मंगलवार को इस संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं. शासन ने अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था व अपर महानिदेशक अभियोजन आदि से इस संबंध में सूचना प्राप्त की है.

तीन लाख से ज्यादा दर्ज हैं मुकदमे

 

आपदा प्रबंध अधिनियम-2005, महामारी अधिनियम-1897 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा-188, 269,270, 271 व इससे संबद्ध अन्य कम गंभीर अपराध की धाराओं से संबंधित पूरे प्रदेश में तीन लाख से अधिक अभियोग दर्ज किए गए हैं. अब प्रदेश सरकार और प्रशासन ने इन तीन लाख मुकदमों में से, जिनमें आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल हो गए हैं, उन्हें वापस लिए जाने की अनुमति दे दी है.

 

दो वर्ष की सजा और जुर्माने के दर्ज मुकदमे वापस होंगे

अधिकतम दो वर्ष तक की सजा तथा जुर्माने के प्राविधान से संबंधित पूरे प्रदेश में दर्ज मुकदमों को वापस लेने के लिए लोक अभियोजक को न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने की अनुमति दी गई है. प्रमुख सचिव न्याय ने प्रदेश के समस्त जिलाधिकारियों को दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा-321 के प्रावधानों पर अमल करते हुए आवश्यक कार्रवाई कराने का निर्देश दिया है.

केंद्र सरकार ने दी मुकदमे वापस लेने की सलाह

विधि एवं न्याय मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने राज्यों को सलाह दी है कि कोविड-19 प्रोटोकाल के उल्लंघन की वजह से दर्ज आपराधिक मामलों की उपयुक्त समीक्षा कर वापस लेने पर विचार किया जाए. इसके बाद कोविड-19 महामारी से पूरे देश में उत्पन्न अभूतपूर्व स्थिति से निपटने के लिए केंद्र व राज्य सरकारों ने आपदा प्रबंध अधिनियम-2005, महामारी अधिनियम-1897 और भारतीय दंड संहिता-1860 आदि के प्रावधानों को लागू किया था.

 

90 हजार किसानों को दिया जाएगा मुआवजा

राज्य सरकार बाढ़ से बर्बाद हुई फसलों की भरपाई के लिए 35 जिलों के 90950 किसानों को कृषि निवेश अनुदान के तहत राहत सहायता प्रदान करेगी। इसके लिए इन जिलों को 30 करोड़ 54 लाख 16,203 रुपये जारी कर दिया गया है। अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने मंगलवार को इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया है।

 

अपर मुख्य सचिव राजस्व ने कहा है कि वर्ष 2021-22 में बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई फसलों से प्रभावित होने वाले किसानों को कृषि निवेश अनुदान के तहत राहत सहायता प्रदान की जाएगी। राहत आयुक्त कार्यालय की वेबसाइट पर 26 अक्तूबर तक 4,77,581 प्रभावित किसानों का डाटा फीड किया गया। इसके आधार पर 15928.95496 लाख रुपये किसानों को राहत राशि देने की मांग की गई है।

इस पैसे से प्रभावित किसानों को राहत राशि बांटी जाएगी। अपर मुख्य सचिव राजस्व ने अंबेडकरनगर, अलीगढ़, आजमगढ़, कानपुर देहात, कानपुर शहर, कुशीनगर, खीरी, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, चंदौली, चित्रकूट, जालौन, झांसी, देवरिया, पीलीभीत, बलरामपुर, बलिया, बस्ती, बहराइच, बाराबंकी, बिजनौर, मऊ, महराजगंज, महोबा, मीरजापुर, मुरादाबाद, ललितपुर, वाराणसी, श्रावस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, सीतापुर, सुल्तानपुर व हमीरपुर के डीएम को इस संबंध में निर्देश भेज दिया है।

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