December 7, 2021

Such Ke Sath

सच के साथ

Farmers Need MSP Law: खेती कानून हट रहे, लेकिन MSP पर क्यों फंसा पेच, किसान इसे क्यों चाहते हैं, समझिए सबकुछ

किसान कानूनों की वापसी के बाद राकेश टिकैत के सुर थोड़ा बदले हुए हैं। पश्चिमी यूपी के इस जाट किसान नेता ने अब मोदी सरकार को एमएसपी पर घेरना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार जब तक एमएसपी पर कानून नहीं लाती, वह आंदोन खत्म नहीं करेंगे। आखिर क्या है एमएसपी…

हाइलाइट्स

  • कृषि कानूनों की वापसी के बाद राकेश टिकैत अब गाजीपुर बॉर्डर से एमएसपी को लेकर हुंकार भर रहे हैं
  • आखिर किसानों के मन में ऐसा क्या डर है कि वह सरकार से एमएसपी को लेकर कानून चाहते है
  • एमएसपी होता क्या है, सरकार इसको कैसे तय करती है, इसको लेकर क्या-क्या पेच फंसा है, समझिए

 

नई दिल्ली|पीएम मोदी कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर चुके हैं। बावजूद इसके किसान अभी अभी मोर्चे पर डटे हुए हैं। किसानों अब मांग कर रहे हैं कि कृषि कानूनों की संसद से वापसी के साथी ही सरकार अब एमएसपी को लेकर कानून भी बनाए। आखिर यह एमएसपी क्या है और किसान इसका कानून बनाने की जिद पर क्यों अड़े हैं, समझिए सबकुछ..

आखिर क्या है MSP?
एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य वह न्यूनतम मूल्य होता है जिस पर सरकार, किसानों की फसल खरीदती है। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि सरकार, किसान से खरीदी जाने वाली फसल पर उसे एमएसपी से नीचे भुगतान नहीं करेगी।

देश में कब शुरू हुआ एमएसपी का प्रावधान?
वर्ष 1965 में ग्रीन रिवॉल्यूशन के समय एमएसपी को घोषणा हुई थी। साल 1966-67 में गेहूं की खरीद के समय इसकी शुरुआत हुई। आयोग ने 2018-19 में खरीफ सीजन के दौरान मूल्य नीति रिपोर्ट में कानून बनाने का सुझाव दिया था।

क्यों तय किया जाता है MSP?
किसी फसल की एमएसपी इसलिए तय की जाती है ताकि किसानों को किसी भी हालत में उनकी फसल के लिए एक वाजिब न्यूनतम मूल्य मिलता रहे।

 

कौन तय करता है?
एसएसपी की घोषणा सरकार की ओर से कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिश पर साल में दो बार रबी और खरीफ के मौसम में की जाती है। गन्ने का समर्थन मूल्य गन्ना आयोग तय करता है।

 

कैसे तय होता है?
खेती की लागत के अलावा कई दूसरे फैक्टर्स के आधार पर सीएसीपी फसलों के लिए एमएसपी का निर्धारण करता है। सीएसीपी, एमएसपी की सिफारिश करने के लिए किसी फसल की लागत के अलावा उसकी मांग व आपूर्ति की परिस्थिति, मार्केट प्राइस ट्रेंड्स (घरेलू और वैश्विक) और अन्य फसलों से तुलना पर भी विचार करती है। सरकार इन सुझाव पर स्टडी करने के बाद एमएसपी की घोषणा करती है।

अभी लागत का कितना गुना है एमएसपी?
2004 में बने स्वामीनाथन आयोग ने एमएसपी तय करने के कई फॉर्म्यूले सुझाए थे। डॉ. एमएस स्‍वामीनाथन समिति ने यह सिफारिश की थी कि एमएसपी, औसत उत्‍पादन लागत से कम से कम 50 प्रतिशत अधिक होना चाहिए। वर्ष 2018-19 के बजट में मोदी सरकार ने एमएसपी को, उत्‍पादन लागत का कम-से-कम डेढ़ गुना करने का ऐलान किया।

 

MSP पर विवाद क्यों?
आंदोलनकारी किसानों का तर्क है कि कृषि कानूनों के जरिए एमएसपी खत्म करने की साजिश हो रही थी। हालांकि, अब सरकार ने कानूनों को वापस लेने के फैसले के बाद एमएसपी को लेकर कुछ और कदम उठाने की बात कही है लेकिन किसानों को भरोसा नहीं है।

किसानों की क्या है मांग?
आंदोलनकारी किसानों को कहना है कि कृषि कानूनों को सरकार पहले संसद में लाकर रद्द करने की प्रक्रिया पूरी करे। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि सरकार पर भरोसा नहीं है। किसानों की मांग है कि सरकार एमएसपी की गारंटी दे और इसे लेकर कानून बनाया जाय। इसके साथ ही किसान बिजली संशोधन बिल को भी वापस करने की मांग कर रहे हैं।

MSP से जुड़ा ये पेच भी है डर की एक वजह
CACP अपने आप में संसद के अधिनियम के माध्यम से स्थापित कोई वैधानिक निकाय नहीं है। यह एमएसपी की सिफारिश कर सकता है, लेकिन फिक्सिंग (या फिक्सिंग नहीं भी) और प्रवर्तन पर फैसला आखिरकार सरकार के पास है। सरकार फसलों के लिए एमएसपी की घोषणा करती है, लेकिन उसके कार्यान्वयन को अनिवार्य बनाने वाला कोई कानून नहीं है। सरकार चाहे तो एमएसपी पर खरीद कर सकती है, कोई कानूनी मजबूरी नहीं है। न ही यह दूसरों (निजी व्यापारियों, संगठित खुदरा विक्रेताओं, प्रोसेसर या निर्यातकों) को भुगतान करने के लिए मजबूर कर सकता है।

 

किसानों को एमएसपी को लेकर क्या सता रहा डर?
दरअसल तीन कृषि कानूनों में से एक किसान उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक 2020 का उद्देश्य विभिन्न राज्य विधानसभाओं द्वारा गठित कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी) द्वारा विनियमित मंडियों के बाहर कृषि उपज की बिक्री की अनुमति देना था। किसान इस कानून के जरिए एपीएमसी मंडियों के बाहर भी अपनी उपज को ऊंचे दामों पर बेच सकते थे, निजी खरीदारों से बेहतर दाम प्राप्त कर सकते थे। इस कानून में कहीं भी एमएसपी का जिक्र नहीं है लेकिन किसानों को डर था कि इससे एमएसपी खत्म हो जाएगी क्योंकि सरकार ने इस कानून के जरिए एपीएमसी मंडियों को एक सीमा में बांध दिया। एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (APMC) के स्वामित्व वाले अनाज बाजार (मंडियों) को उन बिलों में शामिल नहीं किया गया। इसके जरिए बड़े कॉरपोरेट खरीदारों को खुली छूट दी गई, बिना किसी पंजीकरण और बिना किसी कानून के दायरे में आए हुए उन्हें किसानों की उपज खरीद-बेच सकने की आजादी दी गई। अब भले ही यह कानून वापस ले लिया गया हो लेकिन किसान चाहते हैं कि एक विधेयक के जरिए किसानों को लिखित में आश्वासन दिया जाए कि एमएसपी और कन्वेंशनल फूड ग्रेन खरीद सिस्टम खत्म नहीं होगा।

ये भी पढ़े: नई MSP घोषणा: गेहूं की बाल में गेहूं का दाना ही नहीं 

एमएसपी से जुड़ा ये पेंच भी है डर की एक वजह
CACP अपने आप में संसद के अधिनियम के माध्यम से स्थापित कोई वैधानिक निकाय नहीं है। यह एमएसपी की सिफारिश कर सकता है, लेकिन फिक्सिंग (या फिक्सिंग नहीं भी) और प्रवर्तन पर फैसला आखिरकार सरकार के पास है। सरकार फसलों के लिए एमएसपी की घोषणा करती है, लेकिन उसके कार्यान्वयन को अनिवार्य बनाने वाला कोई कानून नहीं है। सरकार चाहे तो एमएसपी पर खरीद कर सकती है, कोई कानूनी मजबूरी नहीं है। न ही यह दूसरों (निजी व्यापारियों, संगठित खुदरा विक्रेताओं, प्रोसेसर या निर्यातकों) को भुगतान करने के लिए मजबूर कर सकता है।

सरकार क्यों खरीदती है फसल?
राशन सिस्टम के तहत जरूरतमंद लोगों को सस्ती दरों पर अनाज मुहैया कराने के लिए सरकार, किसानों से फसल की खरीद करती है। इसके अलावा सरकार अनाज व दालों का बफर स्टॉक भी बनाती है ताकि बाजार में कीमतें बेहद ज्यादा बढ़ने या अकाल/बाढ़ जैसी किसी आपदा की स्थिति में सरकार अपने स्टॉक में से अनाज खुले बाजार में ला सके।

क्या सब्जियों का भी है एमएसपी?
सब्जियों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने वाला केरल पहला राज्य बन गया है। सब्जियों का यह न्यूनतम या आधार मूल्य (Base Price) उत्पादन लागत (Production Cost) से 20 फीसदी अधिक है। एमएसपी के दायरे में फिलहाल 16 तरह की सब्जियों को लाया गया है। हरियाणा भी केरल की तर्ज पर सब्जियों को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य के दायरे में लाने की पहल कर रहा है।

 

ये भी पढे: एमएसपी की लीगल गारंटी नहीं पड़ेगी देश की जेब पर भारी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था संभल जाएगी

 

कितने फसलों पर एमएसपी है?

 

कृषि लागत और मूल्य आयोग हर साल खरीफ और रबी सीजन की फसल आने से पहले MSP को लेकर अध्ययन करता है. इस वक्त  23 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य सरकार तय करती है जिसमें अनाज, दलहन और कुछ कमर्शियल फसल भी शामिल हैं. गेहूं, मक्का, धान, जौ, बाजरा, चना, मूंग, उड़द, मसूर, सरसों, सोयाबीन, सूरजमूखी, गन्ना, कपास, जूट समेत कई फसलों के दाम सरकार निर्धारित करती है और फिर उसी दाम पर किसानों से खरीदती है.

 

एमएसपी के दायरे में कुछ सब्जियों को भी रखा गया है. कृषि सुधारों के लिए 2004 में स्वामीनाथन आयोग बना था. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में एमएसपी तय करने के कई फार्मूलों को लागू करने का सुझाव दिया था. डॉ. एमएस स्‍वामीनाथन कमेटी ने  सिफारिश की थी कि एमएसपी औसत उत्‍पादन लागत से कम से कम 50 फीसदी अधिक होना चाहिए. अगर ऐसा होता है तो किसानों की आमदनी बढ़ेगी.

 

 

अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या ऐलान किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि एमएसपी को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए और ऐसे सभी विषयों पर, भविष्य को ध्यान में रखते हुए. सरकार ने बड़ा फैसला किया है. इन सभी मामलों के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा. इस कमेटी में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के प्रतिनिधि होंगे, किसान होंगे, कृषि वैज्ञानिक होंगे, कृषि अर्थशास्त्री होंगे.

 

किसानों पर क्या होगा असर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि कमेटी के फैसलों पर ही एमएसपी तय होगी. साथ ही, किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार आगे भी कई और बड़े कदम उठा सकती है.

 

1 thought on “Farmers Need MSP Law: खेती कानून हट रहे, लेकिन MSP पर क्यों फंसा पेच, किसान इसे क्यों चाहते हैं, समझिए सबकुछ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

CCC Online Test 2021 CCC Practice Test Hindi Python Programming Tutorials Best Computer Training Institute in Prayagraj (Allahabad) Best Java Training Institute in Prayagraj (Allahabad) Best Python Training Institute in Prayagraj (Allahabad) O Level NIELIT Study material and Quiz Bank SSC Railway TET UPTET Question Bank career counselling in allahabad Sarkari Naukari Notification Best Website and Software Company in Allahabad Website development Company in Allahabad
Copyright © All rights Reserved with Suchkesath. | Webinfomax IT Solutions by .