January 25, 2021

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Hanuman Beniwal: कृषि कानूनों के विरोध में हनुमान बेनीवाल ने छोड़ा एनडीए का साथ, कहा-कृषि से जुड़े 3 बिल किसान विरोधी

नई दिल्ली| नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली में जारी किसान आंदोलन (Kisan Andolan) के बीच बीजेपी (BJP) के एक और सहयोगी ने उसका साथ छोड़ दिया. सरकार अपने रुख पर कायम हैं तो किसान संगठन अपने रुख पर अड़े हैं. ऐसे में गतिरोध के बीच एनडीए के सहयोगी दल जो अभी तक बागी तेवर अपनाए हुए थे वो धीरे धीरे उसका साथ छोड़ रहे हैं. अकाली दल के बाद अब RLP ने NDA से अलग होने का फैसला सुना दिया.

हनुमान बेनीवाल ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि यदि तीनों कानून निरस्त नहीं किए जाते तो आंदोलन को तेज करेंगे। लोकसभा चुनाव में बेनीवाल एनडीए में शामिल हुए थे। वे नागौर से सांसद हैं, भाजपा ने उनका समर्थन किया था। उन्होंने भी प्रदेश की सभी सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार किया था। उल्लेखनीय है कि बेनीवाल ने दो लाख किसानों के साथ दिल्ली कूच की घोषणा की थी, लेकिन करीब सात-आठ हजार किसान ही उनके साथ कोटपुतली से शाहजहांपुर-खेड़ा बॉर्डर तक गए। बॉर्डर पर पहुंचकर उन्होंने सभा की। उधर, पिछले 14 दिन से से बॉर्डर पर पड़ाव डालकर बैठे किसानों से दूर बेनीवाल के समर्थकों ने अलग पांडाल डाला। पहले से पड़ाव डालकर बैठे किसान नहीं चाहते थे कि बेनीवाल उनके साथ आए। इस कारण बेनीवाल ने अलग पांडाल डालकर सभा की। उनके समर्थक अब वहीं डटे रहेंगे। बॉर्डर पर योगेंद्र यादव व किसान महापंचात के अध्यक्ष रामपाल जाट के नेतृत्व में किसान पड़ाव डालकर बैठे हैं। माकपा के नेता भी अपने समर्थकों के साथ यहीं जमे हुए हैं। 

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) संयोजक हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने किसान आंदोलन के बीच कहा कि शिवसेना और अकाली दल पहले ही NDA छोड़ चुके हैं और अब RLP ने भी एनडीए छोड़ने का मन बना लिया है. उन्होंने कहा, ‘मैं एनडीए छोड़ने का ऐलान करता हूं. मैंने तीन कृषि कानूनों के विरोध में NDA छोड़ दिया है. ये कानून किसान विरोधी हैं. मैंने एनडीए छोड़ दिया है लेकिन कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करूंगा.’ गौरतलब है कि RLP से पहले कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल भी NDA छोड़ चुकी है.

हनुमान बेनीवाल की गिनती राजस्थान के कद्दावर और जमीनी नेताओं में होती है. जनता के बीच बेहतर छवि और मिलनसारिता की वजह से वो नागौर से सांसद चुने गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की नीतियों का मुखर समर्थक होने की वजह से बेनीवाल को कभी पीएम मोदी का हनुमान कहा जाने लगा था. हालांकि नए कृषि कानूनों को लेकर बात ऐसी बिगड़ी की वो कई हफ्तों से NDA के खिलाफ हमलावर बने हुए थे. इससे पहले बेनीवाल ने कहा था कि नरेंद्र मोदी सरकार के पास 303 सांसद हैं जिस वजह से वह कृषि कानूनों को वापस नहीं ले रही है.

NDA के सहयोगी दलों में BJP सबसे बड़ी पार्टी है, जो किसानों को कृषि कानून के लाभ समझाने की कोशिशों में लगी है. सरकारी कोशिशों के बीच किसान संगठन टस से मस होने को तैयार नहीं है. इस मुद्दे पर शिवसेना, अकाली दल समेत अन्य विपक्षी दलों के बयानों के बीच हनुमान बेनीवाल का फैसला BJP के लिए किसी झटके से कम नहीं है.    

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