August 9, 2022

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Indian Railway: वेटिंग टिकट पर PQWL, CKWL, RLWL आदि का क्या होता है मतलब, कितनी होती है इनके कंफर्म होने की संभावना जानिए

बहुत से टिकट वेटिंग में रह जाते हैं. सामान्य रूप से हम वेटिंग टिकट को एक जैसा ही समझते हैं. जबकि वेटिंग टिकट कई तरह के होते हैं.

नई दिल्ली:  ट्रेन से लंबी दूरी की यात्रा करने के लिए आपको कई दिन पहले ही रिजर्वेशन कराना पड़ता है. टिकटों के लिए महामारी में बड़ी मुश्किल से कंफर्म टिकट मिल पाता है. त्योहार का समय हो तो कंफर्म टिकट मिलना और भी मुश्किल हो जाता है. हालांकि यात्रियों को इस परेशानी से बचाने के लिए समय-समय पर रेलवे कई कदम भी उठाता रहता है. बावजूद इसके बहुत से टिकट वेटिंग में रह जाते हैं. सामान्य रूप से हम वेटिंग टिकट को एक जैसा ही समझते हैं. जबकि वेटिंग टिकट कई तरह के होते हैं. वेटिंग टिकट पर कभी PQWL, CKWL, GNWL, तो कभी RLWL, RQWL आदि लिखा होता है, जिसका अलग-अलग मतलब होता है. इसके अलावा इन अलग-अलग वेटिंग टिकट के कंफर्म होने के चांस भी अलग-अलग हैं. ऐसे में हम आपको यहां बताते हैं कि इनका अलग-अलग क्या मतलब होता है और इन टिकट के कंफर्म होने की संभावना कितनी होती है.

1. PNR:(Passenger Name Record)

हम सबसे पहले आपको पीएनआर नंबर के बारे में बताते हैं. पीएनआर नंबर ही टिकट का सबसे महत्वपूर्ण भाग है, चाहे वह टिकट चेकिंग की बात हो या वेटिंग चेक करने की. टिकट के बाईं ओर ऊपर पीएनआर यह नंबर होता है. हर टिकट का पीएनआर नंबर होता है. इसका मतलब होता है, ‘पैसेंजर नेम रिकॉर्ड नंबर’. पीएनआर नंबर से टिकट की वैधानिकता को चेक किया जाता है.

2. PQWL:(Pool Quota Waiting List)

PQWL का मतलब ‘पूल्ड कोटा वेटिंग लिस्ट’ होता है. जब कोई लंबी दूरी की ट्रेन में बीच के किन्ही दो स्टेशनों के बीच यात्रा करता है और उसकी टिकट वेटिंग आती है तो वह टिकट PQWL वेटिंग लिस्ट में जाती है. यह लिस्ट एक बड़े क्षेत्र के छोटे-छोटे कई स्टेशनों के लिए होती है. यह तभी कंफर्म होगी जब उस क्षेत्र का कोई यात्री अपनी टिकट कैंसिल कर देता है. मतलब, आप किसी छोटे स्टेशन से यात्रा शुरू कर रहते हैं और आपका टिकट पूल्ड वेटिंग लिस्ट में है तो कंफर्म होने के लिए आपके एरिया (पूल कोड) के किसी व्यक्ति को अपनी टिकट कैंसिल करनी पड़ेगी.

 

3. GNWL:(General Waiting List)

GNWL का मतलब ‘जनरल वेटिंग लिस्ट’ होता है. जब कोई यात्री ट्रेन के रूट के प्रारंभिक स्टेशन से यात्रा करता है और टिकट कंफर्म नहीं होती है तो वह GNWL वेटिंग लिस्ट में चली जाती है. टिकटों के वेटिंग लिस्ट में यह सबसे सामान्य है, ऐसे में इस टिकट के कंफर्म होने की संभावना भी सबसे ज्यादा रहती है.

4. RLWL:(Remote Location Waiting List)

RLWL का मतलब होता है ‘रिमोट लोकेशन वेटिंग लिस्ट’. जब कोई यात्री दो बड़े स्टेशनों के बीच का किसी ऐसे स्टेशन की टिकट लेता है, जहां से ज्यादा ट्रेनें नहीं होतीं तो ऐसी स्थिति में यात्री को किसी कैंसिलेशन पर पहले सीट दी जाती है. ऐसे टिकट के कंफर्म होने की संभावना तभी होती है जब रिमोट लोकेशन का टिकट कैंसिल होता है. टिकट के कैंसिल होने पर RLWL टिकटधारिओं को प्राथमिकता मिलती है. RLWL में टिकट कंफर्म होने की संभावना कम होती है.

 

5. CKWL/TQWL (Tatkal Quota Waiting List)

पहले इसका नाम CKWL था. लेकिन साल 2016 के बाद इसे बदलकर  TQWL कर दिया गया, जिसका मतलब ‘तत्काल कोटा वेटिंग लिस्ट’ होता है. इसमें आपका टिकट तब कंफर्म होगा जब तत्काल सूची का टिकट कैंसिल होता है. इस श्रेणी में आपको RAC का ऑप्शन भी नहीं मिलता है. हालांकि टिकट कंफर्म नहीं होने की स्थिति में टिकट खुद-ब-खुद कैंसिल होकर पैसे आपके खाते में आ जाता है.

तत्काल में ली गई टिकट कंफर्म नहीं होती है वह CKWL में चली जाती है. तत्काल टिकट बुकिंग में टिकटों की संख्या सामान्य रूप से बुक किए जाने वाले टिकटों की संख्या से काफी कम होती है तो इसमें टिकट कंफर्म होने की गुंजाइश भी कमोबेश उसी अनुपात में होती है. तत्काल में वेटिंग टिकट होती है तो ऐसे में 10 वेटिंग लिस्ट तक के टिकट के कंफर्म होने की संभावना होती है.

6. RQWL:(Request Waiting List)

RQWL का मतलब ‘रिक्वेस्ट वेटिंग लिस्ट’ होता है, जो सबसे आखिरी वेटिंग लिस्ट होती है. किसी रूट में कोई पूल्ड कोटा न हो तो इस तरह की वेटिंग लिस्ट को बनाया जाता है. इन टिकटों के कंफर्म होने के चांस काफी कम होते हैं.

7. RAC (Reservation Against Cancelation)

RAC में दो पैसेंजर को एक ही बर्थ पर यात्रा करने की अनुमति दी जाती है. जिन यात्रियों का टिकट कंफर्म होता है और वह यात्रा नहीं करते तो उनकी बर्थ आरएसी के तौर पर दूसरे यात्रियों को अलॉट कर दी जाती है.

 

8. CNF (Confirm)

 

अगर आपके रिजर्वेशन टिकट पर CNF लिखा है और बर्थ का अलॉटमेंट नहीं हुआ है. तो इसका मतलब है कि आपकी सीट कंफर्म है. चार्ट तैयार होने के बाद सीट नंबर अलॉट किया जाएगा.

9. CAN (Cancel)

 

जब आप अपना टिकट कैंसिल कराते हैं तो उसके बाद जो प्रिंटआउट आता है उस पर CAN लिखा होता है. इसका मतलब है पैसेंजर का टिकट कैंसिल कर दिया गया है.

 

10. NOSB (No Seat Bearth)

 

12 साल से कम उम्र के बच्चों से चाइल्ड फेयर लिया जाता है. लेकिन उन्हें सीट अलॉट नहीं की जाती. ऐसे में पीएनआर स्टेट्स NOSB शो करता है.

ट्रेन में बच्चों का आधा किराया कब लगता है..

Half Ticket Age in Train: भारतीय रेलवे में पांच साल से छोटे बच्चे का किराया नहीं लगता, लेकिन बच्चे की जानकारी टिकट की बुकिंग करते समय देनी होती है| इसी के साथ भारतीय रेलवे 05 साल से अधिक बच्चों को आधे किराए पर यात्रा करने की अनुमति देता है, लेकिन इसमें बच्चे को सीट या बर्थ नहीं मिलती| इस सुविधा को NOSB कहते हैं| आइये जानते हैं ट्रेन में बच्चों का आधा किराया किस आयु तक लगता है (Half Ticket Age in Train):

 

भारतीय रेलवे 05 साल से अधिक और 12 साल तक के छोटे बच्चों को आधे किराये पर बिना सीट के यात्रा करवाती है| यहाँ पर 12 साल का मतलब 12 वर्ष से छोटी आयु से है, यानि 11 साल के बच्चे|

यदि 05 साल से अधिक और 12 साल से छोटे बच्चे को ट्रेन में अकेले सफर करना हो तो उसे आरक्षित बर्थ लेनी ही होती है| आधे किराए वाली सुविधा के कुल बच्चों की संख्या, पीएनआर पर कुल आरक्षित बर्थ से कम होनी चाहिए|

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