August 4, 2021

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Lockdown:वर्क फ्रॉम होम ने छीना बुजुर्गों का चैन, बुजुर्ग खांसने से भी डरने लगे…जानिए

कोरोना काल के दौरान वर्क फ्रॉम होम ने जहां काम करने वालों को घर में रहने का मौका दिया, वहीं घर के बुजुर्गों का चैन भी छीन लिया। हालात यहां तक पहुंच गए कि बुजुर्ग खांसने से भी डरने लगे। आश्रित बुजुर्गों ने सबसे अधिक अपनों की प्रताड़ना अप्रैल और मई के महीनों में झेली। गाइड संस्था के तीनों हेल्पलाइन नंबरों में से एक नंबर पर आने वाले फोन कॉल का ब्यौरा देखें तो अकेले अप्रैल में 353 और मई में 242 फोन कॉल आए। इनमें से 99 फीसदी शिकायतें गोंडा, बहराइच, कानपुर और लखनऊ के लोगों से जुड़ी हैं जबकि लखनऊ की 60 प्रतिशत शिकायतें हैं।

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केस-1: दोबारा चाय मांगी तो बहू ने पलट दिया फ्रिज
83 वर्षीय बुजुर्ग ने फोन करके बताया कि उन्हें बेटा-बहू के घर से निकालकर गांव पहुंचा दिया जाए। दरअसल बहू घर से काम कर रही है, ससुर ने दोबारा चाय मांग ली तो उसने गुस्से में फ्रिज पलट दिया। गुस्सा बढ़ा तो घर का दूसरा सामान तोड़ दिया। इस तरह के व्यवहार से तंग आए बुजुर्ग ने हेल्पलाइन से मदद मांगी थी। बहू की काउंसिलिंग के बाद ससुर को गांव के घर पहुंचाया गया। ससुर का कहना था कि वे खांस भी नहीं सकते घर में, क्योंकि इससे बहू-बेटे कोविड हो जाने को लेकर प्रताड़ित करते हैं।

 

केस-2: लॉकडाउन में घर के काम के लिए मां को बुलाया, किया नजरबंद
गोमतीनगर में रहने वाली मां को उनका बड़ा अधिकारी बेटा जबरदस्ती दूसरे शहर ले गया। घर में काम वाला कोई आ नहीं रहा था, पति-पत्नी दोनों को दिक्कत हो रही थी। मां ने हेल्पलाइन को फोन कर मदद मांगी तो उन्हें दूसरे शहर से रेस्क्यू कर लखनऊ लाया गया।

युवाओं को पहल करनी होगी, वरना कोई नहीं समझेगा
गाइड समाज कल्याण संस्थान की संस्थापक और एमडी डॉक्टर इंदु सुभाष कहती हैं कि वृद्धजनों से दुर्व्यवहार लगातार बढ़ता जा रहा है, यह चिंतनीय है। जरूरत है कि युवा पीढ़ी में ऐसे संस्कार विकसित किए जाएं जो बुजुर्गों को समझ सके.

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अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस पर गाइड समाज कल्याण संस्थान की पहल पर गोल्डन एज हेल्प मूवमेंट के तहत विभिन्न विश्वविद्यालयों के 300 युवाओं ने आगे आकर बुजुर्गों के लिए काम करने की हामी भरी है। इसके तहत ये युवा बुजुर्गों की जरूरतों को पूरा करने के साथ पेश आने के तरीकों और लोगों को कैसे वृद्धों के प्रति संवेदनशील बनाएं इस बारे में सीखेंगे। प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो चुका है, इसके तहत युवा वृद्धजनों को कानूनी परामर्श देने, चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने, उनके शौक को एक नई दिशा देने और दादा-दादी क्लब के जरिए उनसे संवाद बनाए रखने का पाठ पढ़ रहे हैं।

 

दवा चाहिए या दबंगों से है खतरा…. समाधान के लिए बुजुर्ग मिला रहे 14567
हैलो, 14567 एल्डर हेल्पलाइन…, मैं एक सीनियर सिटीजन बोल रहा हूं और मुझे वृद्धाश्रम में जाना है। क्या आप मेरी मदद कर सकते हैं? मेरे बेटे चाहते थे कि जीते जी मैं मकान उनके नाम कर दूं, नहीं किया तो उन्होंने मेरा परित्याग कर दिया है। मैं सुलह भी नहीं चाहता हूं, क्योंकि सात-आठ साल से कोशिश कर रहा हूं, मुझे वृद्धाश्रम पहुंचा दीजिए। ये उदाहरण महज बानगी हैं। वरिष्ठ नागरिक अपनी हर छोटी से छोटी और बड़ी समस्या का हल इस वक्त एल्डर हेल्पलाइन 14567 पर तलाश रहे हैं।

वृद्धाश्रम जाना हो, किसी को दवा चाहिए, प्रॉपर्टी के कारण किसी को दबंग से खतरा है या फिर किसी की पेंशन की समस्या हल नहीं हो पा रही है और कोई अपनों की प्रताड़ना का शिकार है, हर कोई इस हेल्पलाइन की मदद ले रहा है। ये वही हेल्पलाइन है जिसके प्रयासों की सराहना पीएम नरेंद्र मोदी ने भी की है।

लखनऊ में इस हेल्पलाइन की इम्प्लीमेंटेशन एजेंसी है यूपीकॉन। गोमतीनगर में इसका कनेक्ट सेंटर हैं, जहां से 75 जिलों के लोगों की समस्याओं को सुनकर उनके समाधान की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रोजेक्ट मैनेजर रजत त्रिपाठी कहते हैं कि प्रतिदिन कॉल का औसत 250 है, इसमें से यदि 50 कॉल को हम रजिस्टर न किए जाने योग्य मान लें तो भी 200 का औसत हर दिन का है। हमारे पास पेंशन, अपनों द्वारा प्रताड़ना, रेस्क्यू, प्रॉपर्टी विवाद से जुड़े मामले आ रहे हैं। 17 मई 2021 से हेल्पलाइन शुरू हुई है। कोविड से जुड़ी जानकारियों के लिए, समस्याओं को लेकर लोगों के बहुत फोन आए।

हेल्पलाइन सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक सक्रिय रहती हैं। 6742 काल रिसीव की गई है, जिसमें से 4767 कॉल का त्वरित निस्तारण करवा दिया गया है। लखनऊ में कनेक्ट ऑफिसर और जिले में फील्ड रिस्पॉन्स ऑफिसर होते हैं। जरूरत पड़ने पर हम हमारे प्रतिनिधियों और एनजीओ, समाज कल्याण विभाग, पुलिस या अन्य एजेंसियों की मदद से समस्या के समाधान की कोशिश करते हैं। हां, जो मामले अदालत में लंबित हैं, उन्हें हम नहीं लेते हैं।

 

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