April 21, 2021

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सच के साथ – समाचार

Motivation Speech: विनाश का कारण निराशा

सफलता और असफलता, सुख और दु:ख तो जीवन का एक हिस्सा है परंतु निराशा और लालसा एक ऐसी चीज़ है जो आदमी के संपूर्ण जीवन को ही असफल कर देती है। कभी-कभी तो निराशा के चलते व्यक्ति आत्महत्या तक कर बैठता है। जीवन में निराशा का भाव नहीं होना चाहिए। आदमी खुद की निराशा से ही हारता है किसी दूसरे के द्वारा दिए जा रहे दु:ख से नहीं। निराश व्यक्ति जीवन के हर मोड़ पर असफल ही होता है, जबकि उसे यह नहीं मालूम रहता है कि रात के बाद दिन आता है इसी तरह हमारे प्रयासों से ही दु:ख के बाद सुख भी आ सकता है।

 

कुरुक्षेत्र के युद्ध में अर्जुन बहुत निराश हो जाता है कि श्रीकृष्‍ण उसे समझाते हैं।

 

 

मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः ।
आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत ॥2-14॥
यं हि न व्यथयन्त्येते पुरुषं पुरुषर्षभ ।
समदुःखसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय कल्पते ॥2-15॥
भावार्थ : हे कुंतीपुत्र! सर्दी-गर्मी और सुख-दुःख को देने वाले इन्द्रिय और विषयों के संयोग तो उत्पत्ति-विनाशशील और अनित्य हैं, इसलिए हे भारत! उनको तू सहन कर॥… क्योंकि हे पुरुषश्रेष्ठ! दुःख-सुख को समान समझने वाले जिस धीर पुरुष को ये इन्द्रिय और विषयों के संयोग व्याकुल नहीं करते, वह मोक्ष के योग्य होता है॥
संसार में सबकुछ आने जाने वाला और परिवर्तनशील है। सुख-दु:ख, हार-जीत, जीना मरना आदि सभी कुछ चलता रहेगा यह सोचकर मन में कभी भी निराशा का भाव नहीं लाना चाहिए। निराशा, हताशा और उदासी व्यक्ति के जीवन को नष्ट कर देती है। जीवन में उतार चढ़ाव तो जीवन का स्वभाव है। इस उतार चढ़ाव को उत्साह से पार करें। उत्साह ही सफलता का राज है।
त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः।
कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत्‌॥
भावार्थ : काम, क्रोध तथा लोभ- ये तीन प्रकार के नरक के द्वार (सर्व अनर्थों के मूल और नरक की प्राप्ति में हेतु होने से यहां काम, क्रोध और लोभ को ‘नरक के द्वार’ कहा है) आत्मा का नाश करने वाले अर्थात्‌ उसको अधोगति में ले जाने वाले हैं। अतएव इन तीनों को त्याग देना चाहिए॥21॥
व्याख्‍या : काम अर्थात किसी भी प्रकार की अनावश्यक भोग की इच्छा जिसमें संभोग भी शामिल है। क्रोध अर्थात गुस्सा, रोष, आवेश, तनाव, नाराजगी, द्वेष आदि प्रवृत्ति। लोभ अर्थात लालच, लालसा, तृष्णा आदि। बहुत से ज्योतिष, संत, कंपनियां या दूसरे धर्म के लोग लोगों को लालच में डालने के लिए प्रलोभन, गिफ्ट, इनाम आदि देते हैं। स्वर्ग, जन्नत का भी लालच दिया जाता है। लालच में फंसकर व्यक्ति अपने कुल का नाश कर लेता है।
हर आदमी के जीवन में एक ऐसा मौका आता है जबकि वह हदाश या निराश होकर खुद को हारा हुआ महसूस करता है। ऐसे में उसे मोटिवेशनल कोट्स या मोटिवेशनल स्टोरी फिर से खड़ा होने में मदद करती है। प्रेरक उद्धरण या विचार या मोटिवेशनल कोट्स आपको जीवन में आगे बढ़ने और सफल होने के लिए प्रेरित करते हैं। ऐसे हजारों मोटिवेशनल कोट्स है जो आपको प्रेरित कर सकते हैं।
आओ जानते हैं ऐसे ही 10 मोटिवेशनल कोट्स.
1. वक्त से कभी हारा या जीता नहीं जाता, केवल सीखा जाता है।-अज्ञात
2. जीवन ही है प्रभु और ना खोजना कहीं, भटकोगे तभी पहुंचोगे।-ओशो
3. समय और पैसा दोनों में से समय महत्वपूर्ण है, जो समय बर्बाद करते हैं वे स्वयं को बर्बाद करते हैं।-अज्ञात
4. सोच का अंधकार, रात के अंधकार से ज्यादा खतरनाक होता हो।
5. जब कोई काम हाथ में लें तो यह कैसा समय है, मेरे कौन मित्र हैं, इससे क्या लाभ है और क्या हानि ये बातें बार बार सोचें।-नीतिसार
6. इस ब्रह्मांड में अंधेरा अनंत है परंतु हमारे मन का उजाला उससे भी कहीं अधिक है। मन के किसी कोने में आशा का दीपक जलाएं और अंधेरें से मुक्त हो जाएं।-अज्ञात
7. जो मनुष्य अपनी शक्ति के अनुसार बोझ लेकर चलता है वह किसी भी स्थान पर गिरता नहीं है और ना दुर्गम रास्तों में विनष्ट होता है।-मृच्छकटिकम।
8. जिंदगी में सफल होने के लिए कार्य और व्यवहार पर ध्यान दें। आपको आपका काम ही विजयी दिलाता है। जो लोग आलसी, अकर्मण्य और दुराचारी हैं वे लोग भाग्य और भगवान को कोसते रहते हैं।
9. आंखें बंद कर लेने से मुसीबत का अंत नहीं होता और मुसीबत आए बिना कभी आंखें नहीं खुलती…।-अज्ञात
10. किसी के पैरों पर गिरकर मंजिल पाने से बेहतर है अपने पैरों पर भरोसा करके सफर करते रहना।-अज्ञात

पता करें आपकी निराशा का मुख्य कारण क्या है ?

हर निराश व्यक्ति को यह अवश्य पता करना चाहिए कि उसकी निराशा का मुख्य कारण क्या है। जीवन में व्यक्ति बहुत से अवसर पर निराश हो सकता है। एक पढ़ा लिखा व्यक्ति बेरोजगार होने पर निराश हो सकता है। एक दंपति संतान ना होने पर निराश हो सकता है। एक बिजनेसमैन व्यापार में नुकसान होने पर निराश (Disappoint) हो सकता है। एक नेता चुनाव हार कर निराश हो सकता है। इस तरह हर व्यक्ति के जीवन में कोई ना कोई निराशा का कारण स्वाभाविक है। पर इसका मुख्य कारण क्या है यह जानने का प्रयास करें। इस समस्या की जड़ तक पहुंचे और उसका निवारण करें।

 

1. धैर्य है सफलता की सबसे बड़ी कुंजी

धैर्य एक ऐसा गुण है जिसे धारण करना बहुत ही आवश्यक है। किसी भी काम को सफलतापूर्वक करने के लिए धैर्य चाहिए। धैर्य धारण करते हुए हमारे क्रांतिकारियों ने देश को अंग्रेजों के चंगुल से आजाद करवाया। जिंदगी में हर परीक्षा धैर्य पर आधारित होती है। एक बालक वर्ष भर धैर्य रखकर पढ़ाई करता है और सफलता में उच्च अंको से उत्तीर्ण होता है। किसी भी काम को करने के लिए धैर्य जरूरी है।

यदि आप थोड़ी असफलता देखकर पूरी तरह निराश हो गए हैं तो यह बिल्कुल भी सही नहीं है। हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी धैर्य धारण किया। स्वतंत्रता संग्राम में अहिंसा और शांति का मार्ग अपनाया और अंग्रेजों को देश से खदेड़ दिया।

 

2. आत्मविश्वास जरूरी है

स्वयं पर विश्वास होना बहुत जरूरी है क्योंकि जीवन में ऐसी बहुत सी कठिनाइयां होती हैं जब लोग आपका साथ नहीं देते हैं। ऐसे में यदि आप स्वयं अपने विचारों और मूल्यों का साथ नहीं देंगे तो आप असफल हो सकते हैं। विपरीत स्थिति होने पर व्यक्ति को स्वयं पर, अपने विचार और मूल्यों पर विश्वास रखना चाहिए। जो लोग आत्मविश्वास से भरे होते हैं वह बड़ी से बड़ी मुसीबत को झेल लेते हैं। अंत में उन्हें विजय प्राप्त होती है।

 

3. असफलता है सबसे बड़ा गुरु

जो लोग जीवन में असफल होते हैं वे अपनी कमियों को जान पाते हैं और अगली बार वह सही रणनीति अपनाकर सफल होते हैं। इतिहास में ऐसे बहुत से उदाहरण देखने को मिलते हैं कि बहुत से राजा अनेक युद्ध हार कर दूसरे युद्ध में विजयी हुए। असफलता सबसे बड़ा गुरु होती है। यह बताती है की आपकी तैयारी में कोई कमी रह गयी। उसे पूरा करें।

 

4. क्या आप सफलता के योग्य हैं खुद से पूछे

बहुत बार यह देखा जाता है कि अयोग्य या कम योग्यता वाले व्यक्ति बहुत ऊँची महत्वाकांक्षा मन में पाल लेते हैं। उदाहरण के लिए एक औसत छात्र यदि आईएस पीसीएस (IAS, PCS) या किसी उच्च बौद्धिक परीक्षा में सफल होने का सपना देखता है तो यह उद्देश्य तो सही है परंतु इस परीक्षा को पास करने की मानसिक योग्यता भी उस व्यक्ति के अंदर होनी चाहिए।

यदि आपने किसी गलत मकसद को चुन लिया है तो आप असफल होंगे और फिर आप निराशा के शिकार बन जायेंगे। इसलिए व्यक्ति को अपना लक्ष्य अपनी मानसिक योग्यता के अनुसार ही चुनना चाहिए।

 

5. निराशावादी मित्रों से बचे, आशावादी मित्र बनाइये

किसी भी व्यक्ति के चारों ओर का वातावरण भी उसके व्यक्तित्व में बड़ा योगदान करता है। यदि आप ऐसे लोगों से घिरे हुए हैं जो सदैव निराशा की बात करते हैं तो धीरे-धीरे आप भी क्या सोचने लग जाएंगे कि आप जिंदगी में एक असफल और हारे हुए व्यक्ति हैं और सफल नहीं हो सकते। इस स्थिति में बेहतर होगा कि आप निराशावादी मित्रों से दूर रहें। ऐसे मित्र बनाएं जो आशा से भरे हुए हैं। जो सदैव सकारात्मक बात करते हैं। उस माहौल और वातावरण में आप अपनी मानसिक शक्तियों का भरपूर इस्तेमाल कर सकेंगे और सफलता प्राप्त कर सकेंगे।

 

6. ईश्वर पर विश्वास रखें

यदि आपने भरपूर प्रयास किया फिर भी आप असफल हुए तो आपको ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए। उसने कुछ दूसरी योजनाएं बनाई होगी। यह भी हो सकता है कि आपका भविष्य किसी और क्षेत्र में हो। किस्मत/ नियति ने कुछ और सोचा हो आपके लिए। इसलिए आपको ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए।

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