October 27, 2021

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Nobel Peace Prize 2021: मारिया रेसा और दिमित्री मुरातोव को मिला इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार

Nobel Peace Prize 2021: इस साल के प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार का एलान शुक्रवार को कर दिया है. फिलीपीन की पत्रकार मारिया रसा (Maria Ressa) और रूसी पत्रकार दमित्री मुरातोव (Dmitry Muratov) को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए उनके संघर्ष को लेकर 2021 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है. विजेताओं की घोषणा शुक्रवार को नॉर्वेजियन नोबेल समिति के अध्यक्ष बेरिट रीस-एंडरसन ने की.

 

गौरतलब है कि कुल 329 कैंडिडेट्स में से मारिया रेसा और दिमित्री मुराटोव को नोबेल शांति पुरस्कार 2021 के लिए चुना गया. मारिया न्यूज साइट रैप्ल की सह-संस्थापक हैं. उन्होंने फिलिपीन्स में सत्तावादी ताकतों के बढ़ते अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद किया था. जबकि दिमीत्री मुराटो ने स्वतंत्र समाचार पत्र नोवाजा गजेता निकाला और रूस में फ्रीडम ऑफ स्पीच के लिए लंबे समय तक काम किया.

मारिया रेसा और दिमित्री मुराटोव को इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है। उन्हें ये पुरस्कार ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए’ उनके प्रयासों के लिए दिया गया। यह पुरस्कार हमेशा किसी उस संगठन या व्यक्ति को दिया जाता है, जिसने राष्ट्रों के बीच भाइचारे और बंधुत्व को बढ़ाने के लिए सर्वश्रेष्ठ काम किया हो।

द नोबेल प्राइज ने अपने ट्वीट में लिखा- नार्वेजियन नोबेल समिति ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के प्रयासों के लिए मारिया रेसा और दिमित्री मुराटोव को 2021 का नोबेल शांति पुरस्कार देने का फैसला किया है, जो लोकतंत्र और स्थायी शांति के लिए एक पूर्व शर्त है।

पिछले साल यह पुरस्कार विश्व खाद्य कार्यक्रम को दिया गया था, जिसकी स्थापना 1961 में विश्व भर में भूख से निपटने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर के निर्देश पर किया गया था। रोम से काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी को वैश्विक स्तर पर भूख से लड़ने और खाद्य सुरक्षा के प्रयासों के लिए यह पुरस्कार दिया गया। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के तहत एक स्वर्ण पदक और एक करोड़ स्वीडिश क्रोनर (11.4 लाख डॉलर से अधिक राशि) दिये जाते हैं।

 

तंजानियाई नागरिक अब्दुलरजाक गुरनाह को साहित्य का नोबेल पुरस्कार

ब्रिटेन में रहने वाले तंजानियाई लेखक अब्दुलरजाक गुरनाह का नाम इस वर्ष के साहित्य के नोबेल पुरस्कार के विजेता के रूप में घोषित किया गया। स्वीडिश एकेडमी ने कहा कि ‘‘उपनिवेशवाद के प्रभावों को बिना समझौता किये और करुणा के साथ समझने’’ में उनके योगदान के लिए पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है। यूनिवर्सिटी ऑफ केंट में उत्तर-उपनिवेशकाल के साहित्य के प्रोफेसर के रूप में सेवाएं देते हुए वह हाल ही में सेवानिवृत्त हुए।

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