May 20, 2022

Such Ke Sath

सच के साथ

 

स्टॉक मार्केट (STOCK MARKET) 

आपको जब किसी सामान की जरूरत होती है तो आप बाजार में उसे खरीदने के लिए जाते हैं और क्रेता यानि बॉयर्स (BUYERS) उस सामान को बेचने के लिए आते हैं. बाजार में आपको भी अपनी जरूरत का सामान मिल जाता है और बेचने वाले व्यक्ति को भी उसका प्रोफिट मिल जाता है. ठीक उसी तरह से शेयर बाजार में भी सेलर (SELLERS) और बॉयर्स (BUYERS) शेयर्स को खरीदते और बेचते हैं. स्टॉक को खरीदने और बेचने की जगह को स्टॉक मार्केट कहते हैं.

स्टॉक मार्केट एक ऐसी जगह है जहां पर इन्वेस्टर्स (INVESTORS) हर रोज़ स्टॉक (STOCKS), बॉन्ड्स (BONDS) और दूसरी सिक्योरिटिज़ (OTHER SECURITIES) को खरीदतें और बेचते हैं.

वर्ल्ड बैंक (WORLD BANK) के अनुसार 2016 में 77.5 ट्रिलियन ड़ालर के स्टॉक्स, स्टॉक एक्सचेंज (STOCK EXCHANGE) पर ट्रेड हुए है.

जब भारत में निष्पक्षत शेयर बाजार की बात आती है, तो दो मुख्य स्टॉक एक्सचेंज हैं जो थोक व्यापार की मात्रा का आनंद देती हैं। एक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज है, जिसे बीएसई के रूप में संक्षिप्त किया गया है, जबकि दूसरा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज है, जिसे एनएसई भी कहा जाता है। ये भारत के दो सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज हैं और एशिया के सबसे बड़े, जापान, चीन और हांगकांग के बाद सबसे बड़े हैं।

चाहे आप एक निवेशक हों या एक व्यापारी, यह समझना आवश्यक है कि ये स्टॉक एक्सचेंज क्या हैं और बीएसई और एनएसई के बीच महत्वपूर्ण अंतर सीखते हैं। इन दो स्टॉक एक्सचेंजों की कुछ मूल्यवान जानकारी यहां दी गई है जो आपको एनएसई और बीएसई के बीच के अंतर को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकती हैं।

एनएसई क्या है?(NSE- NATIONAL STOCK EXCHANGE) 

वर्ष 1992 में स्थापित, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) बाजार पूंजीकरण के मामले में भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। एनएसई भारत में इलेक्ट्रॉनिक और पूरी तरह से स्वचालित व्यापार की प्रणाली में लाया गया पहला स्टॉक एक्सचेंज था। कुछ ही वर्षों में, व्यापार की इस इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली ने प्राकृतिक शेयर प्रमाणपत्रों को शामिल करते हुए कागज आधारित शेयर ट्रेडिंग सिस्टम को पूरी तरह से बदल दिया है।

स्टॉक एक्सचेंज में एक बेंचमार्क इंडेक्स भी होता है जिसे निफ्टी (नेशनल फिफ्टी) के नाम से जाना जाता है। एनएसई निफ्टी इंडेक्स में इसका मूल्य अधिक निकलता है (बाजार पूंजीकरण के संदर्भ में) ऐसे सबसे बड़ी और सबसे अधिक कारोबार वाली 50 कंपनियों को सूचीबद्ध किया जाता है। इसके अलावा, एनएसई को थोक व्यापार की शर्तें पे दुनिया के सबसे बड़े एक्सचेंज के रूप में चुना गया है।

बीएसई क्या है?(BSE – BOMBAY STOCK EXCHANGE) 

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का पुराना समकक्ष है। बीएसई ने वर्ष 1875 में “द नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन” के नाम से अपना परिचालन शुरू किया। यह बीएसई को पूरे एशिया में सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज बनाता है। एनएसई के विपरीत, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज केवल ओपन-क्राय सिस्टम से पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग (बोल्ट) में 1995 में स्थानांतरित हो गया।

निफ्टी की तरह ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का भी अपना बेंचमार्क इंडेक्स है जिसे सेंसेक्स (सेंसेटिव इंडेक्स) के नाम से जाना जाता है। इस सूचकांक को पहली बार वर्ष 1986 में पेश किया गया था और मूलत: के औसत से ऊपर कारोबार करने वाली 30 कंपनियों को सूचीबद्ध किया गया।

एनएसई और बीएसई के बीच अंतर

अब जब आप इन दो स्टॉक एक्सचेंजों के बारे में अधिक जानते हैं, तो यहां कुछ और जानकारी दी गई है जो स्पष्ट रूप से बीएसई और एनएसई के बीच के अंतर को उजागर करती है।

क्या है सेंसेक्स और निफ्टीः

सेंसेक्स और निफ्टी यह दोनों ही बेंचमार्क इंडेक्स है. सेंसेक्स BSE का बेंचमार्क इंडेक्स है और निफ्टी NSE का बेंचमार्क इंडेक्स है. इन दोनों को ही थोड़ा विस्तार से समझते हैं.

सेंसेक्स (SENSEX) 

सेंसेक्स BSE का बेंचमार्क इंडेक्स है और इसमें 30 कंपनियां शामिल है. बीएससी में 5 हजार से भी ज्यादा कंपनियां लिस्टिड है. कोई भी इतनी सारी कंपनिओं को एक साथ मॉनिटर नहीं कर सकता है. इसलिए ही इन कंपनियों का सही सूचकांक प्राप्त करने के उद्देश्य से 1986 में सेंसेक्स की शुरूआत हुई थी. सेंसेक्स टर्म को पहली बार स्टॉक मार्केट ऐनालिस्ट दीपक मोहोनी ने यूज़ किया था.

सेंसेक्स, BSE में लिस्टिड कंपनियों में से टॉप 30 कंपनियों का मार्केट कैप के हिसाब से इंडेक्स करता है. इन 30 कंपनियों को चुनने के लिए एक कमैटी होती है. इन 30 कंपनियों में से अगर कोई कंपनी अच्छा प्रदर्शन नहीं करती है तो उसे इस इंडेक्स से निकाल दिया जाता है.

उसकी जगह पर जो कंपनी अच्छा प्रदर्शन करती है उसे इसमें शामिल कर लिया जाता है. किसी कंपनी को निकाल कर अन्य कंपनी को शामिल करने का फैसला इंडैक्स कमैटी द्वारा लिया जाता है.

जब सेंसेक्स का निशान हरे रंग में होता है तो बाजार अच्छा परफॉर्म कर रहा होता है और जब सेंसेक्स लाल निशान में होता है तो शेयर बाजार खराब हालत में होता है.

निफ्टी (NIFTY) 

निफ्टी NSE का बेंचमार्क इंडेक्स है और इसमें 50 कंपनियां शामिल है. इसलिए ही इसे निफ्टी-50 के नाम से भी जाना जाता है. निफ्टी में भी टॉप की ऐसी 50 कंपनियां शामिल होती है जिनका बाजार में प्रदर्शन अच्छा होता है.

निफ्टी टॉप पर शामिल इन 50 कंपनियों के शेयर्स का सूचकांक जारी करता है. इसकी शुरूआत 1996 में हुई थी. निफ्टी को इंडियन इंडेक्स सर्विसिस एंड प्रोडक्टस् लिमिटेड (IISL – INDIAN INDEX SERVICES AND PRODUCTS LTD.) द्वारा संचालित किया जाता है और  IISL पूरी तरह से एनएसई स्ट्रैटिजिक इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NSE STRATEGY INVESTMENT CORPORATION LDT.) के अधीन है.

 

निफ्टी उन 50 कंपनियों के शेयर्स का हाल दर्शाता है जो उसमें शामिल है. इसमें शामिल कंपनियों के शेयर ज्यादा खरीदे और बेचे जाते हैं. इसमें लिस्टिड कंपनिया अलग-अलग सेक्टर से चुनी जाती है और इन कंपनियों को इंडेक्स कमैटी चुनती है.

सेंसेक्स की तरह ही जब निफ्टी में शामिल कंपनिया खराब प्रदर्शन करती है तो निफ्टी निचे की तरफ आ जाता है और जब कंपनियां अच्छा प्रदर्शन करती है तो निफ्टी ऊपर की ओर जाता है.

सेंसेक्स और निफ्टी में अंतरः

सेंसेक्स और निफ्टी भारत के दो बड़े स्टॉक एक्सचेंज के बेंचमार्क इंडेक्स है. लेकिन फिर इन दोनों में काफी अतंर हैं…

  • सेंसेक्स BSE का बेंचमार्क इंडेक्स है और निफ्टी NSE निफ्टी का बेंचमार्क इंडेक्स है.
  • सेंसेक्स में 30 कंपनिया शामिल है और निफ्टी में 50 कंपनिया लिस्टिड है.
  • निफ्टी में 50 कंपनिया शामिल होने की वजह से इसके सूचकांक पर ज्यादा भरोसा किया जाता है.
  • सेंसेक्स की शुरूआत 1986 में हुई थी और निफ्टी की शुरूआत 1996 में हुई थी.

निफ्टी और सेंसेक्स दोनों का काम बीएससी और एनएसई के लिए सूचकांक जारी करना होता है. कुछ छोटी-बड़ी बातें ही इन्हें एक दूसरे से अलग बनाती हैं.

सेंसेक्स और निफ्टी में समानताः

सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही स्टॉक एक्सचेंज (BSE & NSE) के बेंचमार्क इंडेक्स के तौर पर काम करते हैं. दोनों का ही काम काफी समान है बस इन दोनों के काम को इनमें शामिल कंपनियां अलग बनाती है. दोनों का काम बाजार का हाल बताना है. दोनों में ही अलग-अलग सेक्टर्स की बड़ी कंपनियां शामिल होती है और दोनों में ही शामिल बड़ी कंपनियों का चुनाव इंडेक्स कमैटी करती है. इंडेक्स कमैटी ही तय करती हैं कि कौन-सी कंपनी सेंसेक्स और निफ्टी में बनी रहेगी और कौन-सी कंपनी इनका हिस्सा नहीं होगी.

निफ्टी और सेंसेक्स की महत्वताः

आप जान ही चुके हैं कि BSE और NSE में कितनी कंपनियां लिस्टिड है. हर रोज़ हज़ारों की सख्या में इन्वेस्टर्स शेयर्स को खरीदते और बेचते हैं. अब अगर इन सभी कंपनियों के सूचकांक नहीं होगें तो इन्वेस्टमेंट में काफी परेशानी होगी.

 

इसलिए ही बाजार के  हाल को सही तरह से जानने के लिए इंडेक्स की जरूरत भी होती है और इस इंडेक्स का निफ्टी और सेंसेक्स करते हैं.

सेंसेक्स और निफ्टी के सूचकांक से बाजार का हाल तुरंत ही पता चल जाता है. शेयर बाजार कितना ऊपर गया या जाने वाला है या फिर कितना निचे गिरेगा इसका अंदाजा सेंसेक्स और निफ्टी के इंडेक्स से चल जाता है. शेयर बाजार की चाल को जानने के लिए सेंसेक्स और निफ्टी काफी जरूरी है.

शुरुआत

बीएसई एशिया में सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है और 18 वीं शताब्दी से अस्तित्व में है। इसके विपरीत, एन.एस.ई. 30 साल से भी कम समय में अपेक्षाकृत नजर आया था। ग्लोबल स्टॉक एक्सचेंज रैंकिंग में, बीएसई 10 वें स्थान पर है, जबकि एनएसई 11 वें स्थान पर है।

इलेक्ट्रॉनिक व्यापार

जब यह एनएसई बनाम बीएसई की बात आती है, तो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग के संबंध में ऊपरी हाथ है। अपने शुरुआत के समय से, एनएसई हमेशा पेपरलेस ट्रेडिंग सिस्टम को बढ़ावा देने वाला एक पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक स्टॉक एक्सचेंज रहा है। दूसरी ओर, बीएसई लंबे समय से पेपर-आधारित प्रणाली का अनुसरण कर रहा था, और इसने वर्ष 1995 से ही केवल इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग के साथ ही शुरुआत कि बीएसई को ऑन-लाइन ट्रेडिंग (बोल्ट) से परिचय करवाया।

डेरिवेटिव अनुबंध

डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट सेगमेंट में, एनएसई की एक बड़ी शुरुआत है और इसने लगभग पूरे सेगमेंट पर एकाधिकार कर लिया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के दो प्रमुख सूचकांक – निफ्टी 50 और बैंक निफ्टी – असाधारण रूप से तरल हैं और भारत में डेरिवेटिव सेगमेंट में सबसे अधिक कारोबार वाले अनुबंध के रूप में आते हैं। इसकी तुलना में, बीएसई निवेशकों और व्यापारियों के बीच समान रूप से कम मात्रा में लाभ उठाता है।

सूचीबद्ध कंपनियों की संख्या

एनएसई बनाम बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों की संख्या की तुलना में, यह स्पष्ट है कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज निश्चित रूप से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज से आगे है। एनएसई के पास स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध 1600 से अधिक कंपनियां हैं, जबकि बीएसई अपने एक्सचेंज में 5000 से अधिक कंपनियों को शामिल करता है। जबकि दो स्टॉक एक्सचेंजों के बीच का अंतर इस संबंध में चौंका देने वाला है, यह समझ में आता है, क्योंकि बीएसई एनएसई की तुलना में लंबे समय से अस्तित्व में है।

स्टॉक एक्सचेंज की लिस्टिंग

एनएसई बनाम बीएसई की सूची के संबंध में, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज भारत में एकमात्र सूचीबद्ध एक्सचेंज है। बीएसई सूचीबद्ध है अपने प्रतिद्वंद्वी स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज से। जबकि एनएसई के पास स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने की योजना भी थी, लेकिन दुर्भाग्य से यह कई कानूनी बाधाओं के कारण कभी भी पास नहीं हुआ।

निष्कर्ष 

बीएसई और एनएसई दोनों दुनिया के सबसे सफल स्टॉक एक्सचेंजों में से एक हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, अपने 5000+ निवेश सूचीबद्ध कंपनियों के साथ, शुरुआती लोगों के लिए आदर्श मंच है। विकल्प रूप से, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, थोक व्यापार के अपने उत्कृष्ट प्रदर्शनों की सूची के साथ, अनुभवी निवेशकों और व्यापारियों के लिए सही मंच है। अब आप एनएसई और बीएसई के बीच मुख्य अंतर जानते हैं, तो आप सही तरीके से आगे बढ़ सकते हैं और अपनी पसंद के स्टॉक एक्सचेंज में निवेश करना शुरू कर सकते हैं।

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