September 19, 2021

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OBC Reservation In NEET:पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा-नीट में जल्द लागू होगा ओबीसी का अखिल भारतीय कोटा

नई दिल्ली|राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में ओबीसी का अखिल भारतीय कोटा जल्द लागू होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव के नेतृत्व में ओबीसी मंत्रियों, सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को इस आशय का आश्वासन दिया। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय और इससे जुड़े अन्य मंत्रालयों को इस संदर्भ में तैयारी करने का निर्देश दिया है।

 

 

श्रम मंत्री भूपेंद्र के नेतृत्व में पीएम से मिला ओबीसी मंत्रियों-सांसदों का प्रतिनिधिमंडल

 

पीएम ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि सरकार ओबीसी के हितों के प्रति बेहद संवेदनशील है। जल्द ही इस संबंध में सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। इस मामले में गठित हाईकोर्ट की समिति के समक्ष स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी ओबीसी का अखिल भारतीय कोटा लागू करने का समर्थन किया था। पीएम ने संकेत दिए कि सरकार इस मामले को अदालत से बाहर ही निपटा लेगी। यह मामला साल 2015 से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

 

प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह, अनुप्रिया पटेल, सांसद गणेश सिंह, सकलदीप राजभर, जेपी निषाद आदि शामिल थे। पीएम को सौंपे ज्ञापन में कहा गया है कि लंबे समय से नीट में ओबीसी का अखिल भारतीय कोटा लागू नहीं होने से इस वर्ग के लोग निराश हैं।

अदालत में यह मामला लंबे समय से विचाराधीन है। ऐसे में सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए नीट में ओबीसी का अखिल भारतीय कोटा लागू करने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए।

राज्यसभा में भाजपा सांसद सुशील मोदी ने मंगलवार को यह मामला उठाया था। इसके अलावा अनुप्रिया पटेल ने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री अमित शाह से व्यक्तिगत मुलाकात के साथ-साथ एनडीए की बैठक में भी यह मामला उठाया था।

 

 

क्‍या है मामला?
देश में नीट के जरिये चिकित्सा शिक्षा में दाखिले होते हैं। इस परीक्षा में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को आरक्षण मिलता है। लेकिन, परीक्षा में ओबीसी आरक्षण न दिए जाने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। दरअसल, 1979 में जनता पार्टी सरकार ने सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ी जातियों के मुद्दों को लेकर एक आयोग गठित किया था। इस आयोग का मुखिया सांसद बीपी मंडल को बनाया गया था।

 

 

मंडल ने तर्क दिया था कि ओबीसी देश की पूरी आबादी में करीब 52 फीसदी हैं। यह वर्ग अभाव का सामना करता रहा है। आयोग ने केंद्र सरकार की नौकरियों और इस वर्ग के लिए उसके शैक्षणिक संस्थानों में सीटों में 27 फीसदी आरक्षण की सिफारिश की थी। केंद्र सरकार के तहत नौकरियों में आरक्षण 1992 में शुरू हो गया। लेकिन, ओबीसी से जुड़े छात्रों को एडमिशन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में इस वर्ग के लिए आरक्षण की पुष्टि इस शर्त के साथ की कि उम्मीदवारों के परिवारों की कमाई सालाना 8 लाख रुपये से अधिक न हो।

हालांकि, जिन संस्‍थानों को राज्य सरकारें चलाती हैं, उनमें अलग से निर्धारित अखिल भारतीय कोटा सीटों में 27 फीसदी आरक्षण लागू करना मुश्किल रहा है। राज्य सरकारों के चिकित्सा संस्थानों में ओबीसी आरक्षण को समझने के लिए 1984 में सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर को समझना होगा।

 

 

सुप्रीम कोर्ट ने क्‍या कहा था?
शीर्ष अदालत के निर्देश में कहा गया था कि सभी राज्यों को ग्रेजुएशन में मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में 15 फीसदी सीटें और पोस्‍ट ग्रेजुएशन में 50 फीसदी सीटों को सेंट्रल पूल के लिए रखना होगा। बाकी सीटें स्‍टेट पूल में जाएंगी। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) की ओर से काउंसलिंग के बाद छात्रों को केंद्रीय पूल में सीटें दी जाती हैं।

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद एक और ऑर्डर
एक और कानूनी लड़ाई के बाद 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि राज्य अपने पूल में भी अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए क्रमशः 15 फीसदी और 7.5 फीसदी सीटों के साथ आरक्षण मानदंडों को लागू कर सकते हैं। ऑर्डर में ओबीसी का कोई जिक्र नहीं था। बाद में भारतीय चिकित्सा परिषद ने 2010 में मेडिकल और डेंटल कोर्सों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा के साथ अपने नियमों को लागू किया। 2017 में ‘नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस्‍ट टेस्‍ट’ को पूरी तरह से लागू किया गया।

 

 

क्‍या है सरकार की मंशा?
हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑल इंडिया मेडिकल एजुकेशन कोर्ट में ओबीसी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के आरक्षण के मुद्दे की समीक्षा की। साथ ही संबंधित मंत्रालयों को इसे प्राथमिकता के आधार पर हल करने का निर्देश दिया। एक सूत्र ने बताया कि समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री ने इच्छा व्यक्त की कि चिकित्सा शिक्षा के अखिल भारतीय कोटा (एआईक्यू) में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा संबंधित मंत्रालयों की ओर से प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए। पीएम ने स्वास्थ्य मंत्रालय से चिकित्सा शिक्षा के लिए विभिन्न राज्यों की ओर से ईडब्ल्यूएस आरक्षण के कार्यान्वयन की स्थिति की समीक्षा करने को भी कहा। इस बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, कानून एवं न्याय और समाज कल्याण सचिवों के साथ-साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। बैठक में दो कोटे के मुद्दे पर चर्चा की गई।

पीएम से ओबीसी सांसदों के प्रतिनिधमंडल ने मुलाकात की
एनडीए के ओबीसी सांसदों के एक प्रतिनिधमंडल ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। उसने अखिल भारतीय चिकित्सा शिक्षा कोटे में ओबीसी और आर्थिक रूप से पिछड़े (ईडब्ल्यूएस) वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण लागू करने की मांग की। इस प्रतिनिधिमंडल में भाजपा के भूपेंद्र यादव, गणेश सिंह, सुरेद्र सिंह नागर और अपना दल (सोनेलाल) की अनुप्रिया पटेल शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री को एक पत्र सौंपा और अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट चिकित्सा पाठ्यक्रमों में ‘ऑल इंडिया कोटा’ में ओबीसी और आर्थिक रूप से पिछड़े (ईडब्ल्यूएस) वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण लागू करने की मांग की।

 

 

 

जाति आधारित जनगणना हो, ‘नीट’ में ओबीसी आरक्षण सुनिश्चित किया जाए : संगठनों की मांग

पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति और जनजाति वर्गों के कई प्रबुद्ध व्यक्तियों और संगठनों ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस बार जनगणना में जाति आधारित आंकड़े भी एकत्र किये जाए ताकि विभिन्न क्षेत्रों में सभी पात्र समुदायों को आरक्षण का उचित लाभ मिल सके। इन व्यक्तियों और संगठनों ने ‘सोशल रिवूल्यूशन अलायंस’ (एसआरए) के बैनर तले आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यह भी कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा में ओबीसी के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

आंध प्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश वी. ईश्वरैया, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह यादव, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अवधेश कुमार साह, ‘वोटर एजुकेशन फाउंडेशन’ नामक संगठन के पदाधिकारी अशोक कुमार सिंह, ओबीसी महासभा (मध्य प्रदेश) के अध्यक्ष धर्मेंद्र कुशवाहा तथा कुछ अन्य लोग शामिल थे। उन्होंने कहा, ‘‘हम सरकार के इस फैसले से आहत और हतप्रभ हैं कि 2021 की जनगणना में जाति आधारित जनगणना शामिल नहीं होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘इस बार की जनगणना में जाति आधारित जनगणना को शामिल किया जाए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो पिछड़े वर्गों के लोग आंदोलन करने को विवश होंगे।’’ एसआरए की ओर से यह मांग भी गई है कि ‘नीट’ की परीक्षा में ओबीसी आरक्षण सुनिश्चित किया जाए, ओबीसी वर्गों के कल्याण के लिए केंद्र के स्तर पर अलग मंत्रालय बनाया जाए और संघ लोक सेवा आयोग की तर्ज पर राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग बनाया जाए।

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