आजादी के इतने बर्षो बाद भी क्यों लगते हैं, “हमें चाहिए आजादी” के नारे???

आजादी के 72 बरस पूरे हों गये और इस दौर में भी कोई ये कहे , हमें चाहिये आजादी । या फिर कोई पूछे, कितनी है आजादी। या फिर कानून का राज […]

निष्पन्न अपराध है सांस्कृतिक राष्ट्रवाद

यह वर्चुअल युग है, यथार्थ और उसके समस्त संदर्भों के विध्वंस का युग है, इसमें अन्य या हाशिए के लोगों को मीडिया यथार्थ के बाहर खदेड़कर विध्वंस के हवाले कर दिया गया […]

लोकतंत्र में बढ़ती सत्ता- साधना की चाहत;

किसी शायर ने कहा है, कि यहाॅं पर तहजीब बिकती है, यहाॅ पर फरमान बिकते हैं। अरे जरा तुम दाम तो बदलो, यहाॅ  ईमान बिकते हैं।इस शायरी की चंद लाइनों को वर्तमान […]

अबकी बार- किसकी सरकार या आजादी की दरकार

आपातकाल में जेपी की अगुवाई में संघ के स्वयंसेवकों का संघर्ष रंग लाया । देशभर के छात्र-युवा आंदोलन से जुड़े। 1977 में जीत होने की खुफिया रिपोर्ट के आधार पर चुनाव कराने […]

लोकतंत्र एक जीवित तंत्र है

वर्तमान में भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। लोकतंत्र एक जीवित तंत्र है, जिसमें सबको समान रूप से अपनी-अपनी मान्यताओं के अनुसार चलने की पूरी स्वतंत्रता होती है। लोकतंत्र की […]

क्या पैसा ही सबकुछ है;

दोस्तों हम समझते हैं कि पैसा का हमारे जीवन में बहुत अहम रोल होता है लेकिन हम लोगों को यह बात सोच कर चलना चाहिए कि भगवान ने हमको जिंदगी केवल पैसा […]

एक देश में दो संविधान क्यू?

कश्मीर में इन दिनों जो हो रहा है उसे देखकर संदेह होता है कि हमारा देश वास्तव में एक सम्प्रभु राष्ट्र है अथवा टुकड़ों में बाटे भू-भागके अतिरिक्त और कुछ नहीं जहाँ […]

एक कम्बल उढ़ाकर उड़ाते हैं गरीबी का मज़ाक..

देश में रहनें वालें करोड़ों गरीब गरीबी का दंश झेल कर भी अमीरों की शान बढ़ानें में कारगर साबित होतें है भलें ही गरीब व्यक्ति अपनी इज़्ज़त को बचानें के लिए अपनी […]

ज्यादा आजादी ठीक नहीं – लोकतंत्र

देश की तमाम समस्याओं की जड़ भारतीय लोकतंत्र है। मैंने लोकतंत्र को दोष न देकर भारतीय लोकतंत्र पर दोषारोपण किया है। क्योंकि भारत में लोकतंत्र ही सत्ता तक पहुंचने का मार्ग है […]

गरीब का कोई रिश्तेदार नहीं होता !!!

एक पाँच छे. साल का मासूम सा बच्चा अपनी छोटी बहन को लेकर मंदिर के एक तरफ कोने में बैठा हाथ जोडकर भगवान से न जाने क्या मांग रहा था.कपड़े में मेल […]