August 9, 2022

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Rampur By Election 2022: कौन हैं घनश्याम लोधी जिन्होंने ढहा दिया आज़म खान किला

Rampur loksabha seat result: घनश्याम सिंह लोधी एमएलसी रहे हैं. लोधी भी कभी आजम खान के करीबी थे. उन्होंने 2022 में ही बीजेपी जॉइन की थी. घनश्याम सिंह लोधी को पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का भी बेहद करीबी माना जाता रहा है.

 

Rampur Loksabha By Election 26 जून 2022: उत्तर प्रदेश की रामपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार घनश्याम लोधी ने आसिम रजा को हरा दिया है. लोधी ने आसिम रजा को तकरीबन 42 हजार वोटों से शिकस्त दी है. वह इस से पहली बार सांसद बने हैं. रामपुर से आज़म खान ने अपने-अपने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया था. जिसके बाद रामपुर लोकसभा सीट पर 23 जून को चुनाव हुआ था. यह सीट काफी अहम मानी जा रही थी. क्योंकि ये समाजवादी पार्टी के लोकप्रिय नेता आज़म खान की सीट थी. यही वजह है कि बीजेपी ने आजम खान के ही करीबी रहे घनश्याम लोधी को अपना प्रत्याशी बनाया था.

 

इस सीट पर समाजवादी पार्टी ने भी प्रत्याशी के नाम का ऐलान कर किया था. सपा नेता आजम खान ने पार्टी पदाधिकारियों की बैठक के बाद खुद प्रत्याशी के नाम का ऐलान किया. लोकसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने आसिम रजा को मैदान में उतारा.

 

कौन हैं बीजेपी उम्मीदवार घनश्याम लोधी

 

जहां तक ​​घनश्याम सिंह के राजनीतिक सफर की बात है तो वह 1992 से 1998 तक भाजपा की युवा शाखा के जिलाध्यक्ष रहे. 1999 में, उन्होंने भाजपा छोड़ दी और वह बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए. इसके बाद घनश्याम लोधी ने 2004 में बहुजन समाज पार्टी छोड़ दी और राष्ट्रीय क्रांति पार्टी में शामिल हो गए. साल 2009 में घनश्याम लोधी फिर से बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए.

घनश्याम सिंह लोधी ने 2010 में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली और जनवरी 2022 में वे अपनी सबसे पुरानी पार्टी भाजपा में दोबारा शामिल हो गए. इसके साथ उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी. घनश्याम सिंह लोधी दो बार विधान परिषद चुने जा चुके हैं. सबसे पहले वह समाजवादी पार्टी के समर्थन से कल्याण सिंह की राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के टिकट पर रामपुर-बरेली स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र से 2004 में एमएलसी बने थे. इसके बाद इसी क्षेत्र से 2016 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर एमएलसी बने. वर्ष 2016 में आजम की वजह से ही सपा ने घनश्याम सिंह लोधी को एमएलसी चुनाव लड़ाया.

 

रामपुर में पहली बार उपचुनाव

 

सियासत में रामपुर की सीट हमेशा से काफी चर्चा में रही है. सपा नेता आजम खां के लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद रामपुर संसदीय सीट खाली हो गई थी. आजादी के बाद रामपुर में ऐसा पहली बार हुआ, जब यहां लोकसभा की सीट के लिए उपचुनाव हुए.

भाजपा उम्मीदवार घनश्याम सिंह लोधी कौन हैं? 
घनश्याम लोधी रामपुर के लिए कोई नया नाम नहीं है। घनश्याम लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं। उनकी राजनीति भी भारतीय जनता पार्टी से ही शुरू हुई थी। तब वह उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कल्याण सिंह के काफी करीबी थे। वह भाजपा के जिलाध्यक्ष भी रहे। 1999 में वह भाजपा छोड़कर बसपा में शामिल हो गए और लोकसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन जीत नहीं पाए। तब घनश्याम तीसरे नंबर पर रहे।

जब कल्याण सिंह ने भाजपा छोड़कर राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाई तो घनश्याम लोधी भी इसमें शामिल हो गए। 2004 में घनश्याम लोधी को इसका इनाम मिला। राष्ट्रीय क्रांति पार्टी ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करके घनश्याम को बरेली-रामपुर एमएलसी सीट से अपना प्रत्याशी बनाया। वह जीत भी गए।

 

फिर बसपा का दामन थाम लिया
2009 लोकसभा चुनाव के दौरान घनश्याम लोधी ने फिर से बहुजन समाज पार्टी का दामन थाम लिया। बसपा ने उन्हें रामपुर से अपना उम्मीदवार भी बनाया, लेकिन वह जीत नहीं पाए। तब समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी और अभिनेत्री जयाप्रदा ने जीत हासिल की थी। दूसरे नंबर पर कांग्रेस की बेगम नूर बानो और तीसरे पर घनश्याम लोधी थे। चौथे नंबर पर भाजपा की तरफ से मुख्तार अब्बास नकवी रहे। चुनाव में मिली हार के बाद 2011 में घनश्याम वापस समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए।

 

आजम खां के करीबी, चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए
रामपुर में घनश्याम लोधी ने समाजवादी पार्टी के पक्ष में खूब माहौल बनाया। 2012 में उन्होंने खूब मेहनत की। इसके बाद 2014 लोकसभा चुनाव और फिर 2019 लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने सपा के लिए प्रचार किया। घनश्याम को आजम खां का काफी करीबी माना जाता था। हालांकि, 2022 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लोधी ने समाजवादी पार्टी का दामन छोड़कर भाजपा जॉइन कर ली।

 

 

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