June 29, 2022

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RBI को कौन सी शादी करनी है, जो उसने सोना खरीदा है?

3 सितंबर की शाम को एक खबर आई थी. खबर ये थी कि भारतीय रिजर्व बैंक ने 9 साल के बाद सोना खरीदा है. अब हम-आप जैसे लोग तो घर में बेटी या बेटे की शादी पर सोना खरीदते हैं, कोई त्योहार होता है, एनिवर्सरी होती है तो सोना खरीदते हैं या फिर अगर पैसे बच जाते हैं तो सोना खरीद लेते हैं. लेकिन सोना रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने खरीदा है. उस बैंक ने जो देश का सबसे बड़ा बैंक है और जिसके बल पर पूरे देश की अर्थव्यवस्था चलती है. और बैंक ने जो सोना खरीदा है, वो थोड़ा नहीं, बहुत है. खरीदे गए सोने का वजन वजन 8.46 टन है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की हर साल जारी होने वाली रिपोर्ट के मुताबिक सोने की इस खरीद के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास 574.69 टन सोना है. इससे पहले रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 2009 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 200 टन सोना खरीदा था. 30 जून 2018 को रिजर्व बैंक के पास कुल 566.23 टन सोना था. पिछले साल यानी कि 2017 में 30 जून को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास कुल 557.77 टन सोना था.

 

लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया इस सोने का करता क्या है?

 

सोना एक ऐसी चीज़ है, जिसकी पूरी दुनिया में स्वीकार्यता है. दुनिया के हर देश की अपनी अलग-अलग मुद्रा है. भारत में रुपया चलता है, तो अमेरिका में डॉलर. यूरोपियन यूनियन के देशों में यूरो चलता है, तो रुबल, रियाल, टका, दिनार, फ्रैंक, दिरहम, पाउंड जैसी मुद्राएं भी दुनिया के कई देशों में चलती हैं. एक देश की मुद्रा दूसरे देश में नहीं चलती है. इसलिए जब एक देश को दूसरे देश से कोई खरीदारी करनी होती है, तो वो अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं जैसे डॉलर या फिर यूरो में भुगतान करता है. लेकिन अगर किसी देश की अर्थव्यवस्था को इस लिहाज से मापना हो कि वो विदेशों से कितनी खरीदारी कर सकती है तो पूरी दुनिया में इसके लिए एक जो कॉमन चीज है वो है सोना. 1946 में इंग्लैंड से इसकी शुरुआत हुई थी. उस वक्त इंग्लैंड पूरी दुनिया का चौधरी माना जाता था, इसलिए उसके बनाए नियम अधिकांश देशों पर लागू होते थे. इसके बाद ये माना जाने लगा कि जिस देश के पास जितना ज्यादा सोना होता है, वो देश दूसरे देशों से उतनी ज्यादा खरीदारी कर सकता है. अब भारत का सबसे बड़ा बैंक रिजर्व बैंक है, इसलिए वो अपने पास सोना रखता है ताकि उसके जरिए भारत दूसरे देशों से खरीदारी कर सकता है. ज़रूरत पड़ने पर कोई भी देश सोने को गिरवी रखकर उस देश से नकदी या सामान ले सकता है. इसलिए भारत ने अपने सोने का स्टॉक बढ़ाने के लिए इस सोने की खरीद की है. हालांकि ये खरीद कहां से की गई है और इसके लिए कितनी पेमेंट की गई है, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है.

 

1991 में भारत ने पहले सोना बेचा और फिर सोना गिरवी भी रखना पड़ा:-

उदाहरण के लिए 1991 में भारत में आर्थिक संकट इतना गहरा हो गया था कि देश के पास विदेशों से खरीदारी के पैसे नहीं बचे. फिर देश में स्मगलिंग के दौरान पकड़ा गया सोना स्विटजरलैंड को 20 करोड़ डॉलर में बेच दिया गया. जून 1991 में भी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 46.91 टन सोना गिरवी रखा और उससे 400 मिलियन डॉलर जुटाए. जब भारत का आर्थिक संकट खत्म हुआ तो उसी साल दिसंबर 1991 में गिरवी सोना छुड़ा लिया गया. 1998 और 2001 में रूस के पास भी जब संकट आया था तो उसने अपना करीब एक तिहाई सोना बेच दिया था और पैसे जुटाए थे.

 

क्या दूसरे देश भी भारत की तरह सोना रखते हैं?

हां, हर देश अपने पास सोने का एक भंडार रखता है. फिलहाल सबसे ज्यादा सोने का भंडार अमेरिका के पास है. अमेरिका के पास अभी 8133.5 मीट्रिक टन सोना है, जो उसके विदेशी मुद्रा भंडार का कुल 74.5 प्रतिशत है. दूसरे नंबर पर जर्मनी है, जिसके पास 3369.9 मीट्रिक टन सोना है. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष भी अपने पास सोने का भंडार रखता है. इटली, फ्रांस, रूस, चीन, स्विटजरलैंड, जापान, नीदरलैंड जैसे दुनिया के कई देश स्वर्ण भंडार रखते हैं. अब भारत को ही लें तो भारत के पास सोने का जो भंडार है, वो भारत की कुल विदेशी मुद्रा का करीब 5.5 फीसदी है.

 

देश में तो रुपया चलता है, फिर इतना सोना क्यूं?

ये एक सहज सवाल हो सकता है. भारत में लेन-देन के लिए रुपया चलता है. रुपया जारी करने का काम रिजर्व बैंक का है. देश में कितना रुपया रहेगा और कितने रुपये के नोट छपेंगे, इसे तय करने का काम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का है. लेकिन इसका ये कतई मतलब नहीं है कि रिजर्व बैंक जितना चाहे, उतना नोट छाप दे. रिजर्व बैंक को नोट छापते वक्त अपने सोने के भंडार का खयाल रखना पड़ता है. वो उतनी ही कीमत के नोट छाप सकता है, जितना उसके पास नोट की छपाई के लिए सोना होता है. जैसे फिलहाल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास नोट जारी करने के लिए 292.30 टन सोना है. बाकी का बचा हुआ सोना बैंकिंग विभाग की संपत्ति है. अगर रुपये में आंकलन करें तो बैंकिंग विभाग के पास जो 273.93 टन सोना है, उसकी कुल कीमत 69,674 करोड़ रुपये है. इस सोने की कीमत भी अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से घटती-बढ़ती रहती है. उदाहरण के लिए बैंकिंग सेक्टर के पास जिस सोने की कीमत 30 जून 2018 को 69,674 करोड़ रुपये थी, 30 जून 2017 को इस सोने की कीमत 62, 702 करोड़ रुपये ही थी.

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