February 27, 2021

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UP:गोरखपुर में बनेगा आयुष विश्‍वविद्यालय, प्रदेश के सभी मेडिकल कालेज इसी से होंगे संबद्ध

आयुष विवि खुलने से एक ही छत के नीचे ही आयुर्वेदिक, यूनानी, सिद्धा, होम्योपैथी और योग चिकित्सा की पढ़ाई और उस पर शोध कार्य हो सकेगा। सूत्रों का कहना है कि प्रदेश के यूनानी व होम्योपैथी कॉलेज भी इससे संबद्ध किए जाएंगे। योगी सरकार योग सहित प्राकृतिक व परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों को प्रोत्साहित करने में लगी है।

गोरखपुर |प्रदेश का पहला आयुष विश्वविद्यालय अब चौरीचौरा के मलमलिया में नहीं बनाया जाएगा। यहां करीब 24.29 हेक्टेयर जमीन विश्वविद्यालय के नाम की जा चुकी थी लेकिन बाद में पता चला कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में उस जमीन पर मुकद्मा चल रहा है। आनन-फानन में जिला प्रशासन ने सदर तहसील में दूसरी जमीन तलाशने का काम शुरू कर दिया है। दो जमीनें फिलहाल देखी गई हैं। एक से दो दिनों में जमीनों को चिन्हित कर शासन को प्रस्ताव भेज दिया जाएगा। जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पाण्डियन एवं एसडीएम/ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सदर गौरव सिंह सोगरवाल ने बुधवार को सदर तहसील क्षेत्र में जंगल डुमरी नंबर दो एवं टिकरिया में जमीन का निरीक्षण किया।

प्रदेश के सभी मेडिकल कालेज होंगे संबद्ध

गोरखपुर में स्थापित किए जाने वाले आयुष विश्वविद्यालय से प्रदेश के सभी आयुष मेडिकल कालेजों को संबद्ध किया जाना है। प्रदेश कैबिनेट ने इसके नाम की घोषणा भी कर दी है। आयुष विवि के नाम महायोगी गुरु गोरक्षनाथ के नाम पर महायोगी गुरु गोरक्षनाथ उत्तर प्रदेश राज्य आयुष विश्वविद्यालय गोरखपुर रखा गया है। इसके लिए मलमलिया में फोरलेन से सटे जमीन चिन्हित की थी। यह जमीन विश्वविद्यालय के नाम भी की जा चुकी है। शासन की ओर से 10 करोड़ रुपये भी जारी किए जा चुके हैं। बाद में यह बात सामने आयी कि इस जमीन पर वाद लंबित है। प्रशासन ने पहले पैरवी कर वाद समाप्त कराने की कोशिश की लेकिन समय से निदान निकलता न देख विकल्प के तौर पर दूसरी जमीन देखी जा रही है। यह बात लगभग तय हो चुकी है कि आयुष विश्वविद्याालय के लिए नई जमीन सदर तहसील क्षेत्र में ही होगी। बांसस्थान, जंगल डुमरी नंबर दो, टिकरिया व कुछ अन्य स्थानों पर जमीन दी जा सकती है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद जमीन को विश्वविद्यालय के नाम कर दिया जाएगा।

जल्द ही चिह्नित कर ली जाएगी जमीन

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सदर गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि सदर तहसील में जमीन देखी जा रही है। अभी कोई जमीन फाइनल नहीं है। एक से दो दिनों में चिन्हित कर शासन को प्रस्ताव भेज दिया जाएगा। जिलाधिबारी के. पांडियन के अनुसार आयुष विश्वविद्यालय का लोकेशन मलमलिया से शिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए सदर तहसील में जमीन देखी जा रही है। जल्द ही जमीन चिन्हित कर ली जाएगी।

एक छत के नीचे चिकित्सा के विभिन्न आयाम
आयुष विवि खुलने से एक ही छत के नीचे ही आयुर्वेदिक, यूनानी, सिद्धा, होम्योपैथी और योग चिकित्सा की पढ़ाई और उस पर शोध कार्य हो सकेगा। सूत्रों का कहना है कि प्रदेश के यूनानी व होम्योपैथी कॉलेज भी इससे संबद्ध किए जाएंगे। योगी सरकार योग सहित प्राकृतिक व परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों को प्रोत्साहित करने में लगी है। गोरखपुर में इसे खोले जाने से पूर्वांचल की 6 करोड़ से अधिक जनता को चिकित्सा का एक और बेहतर विकल्प मिलेगा। मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में पहले से है जबकि एम्स की भी ओपीडी शुरू हो चुकी है।

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