June 27, 2022

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UP: आतंकियों को मिल रही सजा, माफिया पर हो रही कार्यवाही; योगी

लखनऊ 24 जून |प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में भी कानून व्यवस्था को लेकर बहुत सख्त तेवर अपना रही है और जिसके परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रहे हैं। अपराधी या तो आत्मसमर्पण कर रहे है या फिर पकड़े जा रहे हैं जबकि माफियाओं की संपत्ति जब्त हो रही है। बुलडोजर नीति हो या तकनीक का प्रयोग करके पहचाने गए बलवाइयों के पोस्‍टर शहर के चौराहों पर चिपकाने की कार्यवाही इनके कारण अपराधियों, दंगाइयों, आतंकियों में कुछ हद तक खौफ दिख रहा है लेकिन उनके संरक्षणदाता तथाकथित राजनैतिक दलों में छटपटाहाट व बैचेनी दिखाई पड़ रही है।

बड़े अपराधी व माफिया आज प्रदेश में जिस तरह से बैचेनी का अनुभव कर रहे हैं और प्रदेश का वातावरण दूषित करने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपना रहे हैं उसे देखकर प्रदेश की जनता एक बार फिर कह रही है कि यदि कहीं गलती से भी योगी जी प्रदेश के मुख्यमंत्री न होते तो आज प्रदेश का हाल बंगाल ,केरल जैसे राज्यों से भी बुरा होता। योगी जी के सत्ता में वापस लौटने के कारण आज प्रदेश में कानून का राज व शांति का वातावरण बन रहा है।

वाराणसी में वर्ष 2006 में सिलसिलेवार बम धामाके के केस में गाजियाबाद के जिला एवं सत्र न्यायाधीश जितेंद्र कुमार सिन्हा की आदालत ने आतंकी वलीउल्लाह को फांसी की सजा सुनाते हुए चार लाख पांच हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। सात मार्च 2006 को वाराणसी के संकटमोचन मंदिर , दशाश्वमेघघाट और वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन के पास बम धमाके हुए थे जिनमें 18 लोगों की मौत हुई थी व 76 घायल हो गये थे।

 

भगवान शिव की नगरी वाराणसी में हुई इस वारदात के आतंकी वलीउल्लाह के मामले में 16 साल तक सुनवाई चली और इस दौरान 14 न्यायाधीश बदले गये। इस मामले की सबसे अधिक सुनवाई 15वें जिला जज की अदालत में हुई। वर्ष 2022 में अवकाश के दिन को छोड़कर एक माह लगातार सुनवाई चली तब जाकर फैसला आया है।

वलीउल्लाह वह आतंकवादी है जिसको राहत देने के लिए समाजवादी सरकार ने काफी पैरवी की थी और गुपचुप तरीके से तत्कालीन विशेष सचिव राजेंद्र कुमार की ओर से जिला प्रशासन को पत्र भेजा गया थ। इसकी भनक लगने पर हर तरफ विरोध शुरू हो गया और मुलायम सरकार को पीछे हटना पड़ा था।

 

2012 में भी समाजवादी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले अपने घोषणा-पत्र में वादा किया था कि सरकार बनने पर वह देखेगी कि कहीं मुस्लिम युवकों को आतंकी गतिविधियों में फंसाया तो नहीं गया है? आतंकी वलीउल्लाह को सजा मिलने के बाद भाजपा ने सपा पर हमला बोलते हुए आतंकवादियों का तुष्टिकरण और उन्हें बचाने का आरोप लगाया। भाजपा प्रवक्ता ने कहाकि तत्कालीन सपा सरकार वलीउल्लाह, शमीम सहित 15 विचाराधीन कैदियों को आरोपमुक्त करना चाहती थी।

यह तो गनीमत है कि उस समय इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी जिसमें कहा गया था कि आतंकी वारदातों के आरोपियों से यदि केस वापस लिये गये तो इससे गलत संदेश जाएगा और हिंसा को बढ़ावा मिलेगा । इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस समय अखिलेश यादव की सरकार को फटकार भी लगाई थी।

आजकल प्रदेश में कई ऐसी घटनाएं घटित हो रही है जिनसे प्रदेश का वातावरण चल रहा है अशांत हो सकता है लेकिन प्रदेश का पुलिस महकमा बहुत ही सतर्क है जिसके कारण अपराधी व दंगाई डर रहे हैं। राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री जी की कानपुर यात्रा के दौरान उपद्रवियों ने कानपुर को दंगो की आग में झोकने का असफल प्रयास किया था। कानपुर के दंगाई यह भूल गये थे कि उप्र में बुलडोजर बाबा जी की सरकार है। अराजक तत्वों ने अपना रंग दिखाया और परिणाम सबके सामने है। कानपुर के दंगाई का पूरा हिसाब लिया जा रहा हैं। शहर में उपद्रवियों के पोस्टर चिपका दिये गये हैं।

 

अब तक कानपुर उपद्रव के मास्टर माइंड सहित 50 से अधिक लोग हिरासत में लिये जा चुके हैं तथा सबसे बड़ी बात यह है कि पोस्टर चिपक जाने के बाद कुछ अपराधियों में भय व्याप्त हो गया और कुछ लोग थाने में अपने आप सरेंडर करने पहुंच रहे हैं। अवैध संपत्तियों की भी जांच की जा रही है और उन पर बुलडोजर चलने की तैयारी पूरी कर ली गयी है।

कानपुर हिंसा में पीएफआई का नाम आया है और सरकार उस पर भी कड़ी कार्यवाई करने की तैयारी कर रही है। पीएफआई्र व कानपुर के कुछ मौलानाओं ने सरकार को धमकियां भी जारी की हैं लेकिन फिलहाल बाबाजी की सरकार दबाव मे काम नहीं करती है। कानपुर के उपद्रवियों को कानून के दायरे में लाया जायेगा और सजा दिलायी जायेगी।

इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लखनऊ, अयोध्या, उन्नाव सहित कई जिलों के कार्यालयां को बम से उड़ाने की धमकी दी गयी थी लेकिन उसके आरोपी तमिलनाडु निवासी राज मोहम्मद को उप्र पुलिस 24 घंटे में ही तमिलनाडु से पकड़ने में सफल हो गयी है। इसी प्रकार जेल में बंद कुख्यात माफिया मुख्तार अंसारी की खातिरदारी करने वाले डिप्टी जेलर समेत 5 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर सरकार ने अपने तेवर दिखा दिये हैं कि सरकार फिलहाल माफियाओं व उनके प्रति सहानुभूति रखने वाले लोगों को कोई रियायत देने के मूड में है। सरकार की अपराध व अपराधियो के प्रति जीरो टालरेंस की नीति में कोई परिवर्तन नहीं आया है।

योगी सरकार पहले 100 दिन के लिए तय किये गये टारगेट में यूपी पुलिस आगे निकल गयी है। यूपी पुलिस ने मात्र तीन महीने मार्च से मई 2022 में 788 अपराधियों पर गैंगस्टर की कार्यवाई की गयी है। इतना ही नहीं, प्रदेश के पुलिस विभाग द्वारा मार्च 2022 में कुख्यात अपराधियों की नये स्तर से समीक्षा करते हुए 62 माफियाओं और उनके गैंग के खिलाफ योजनाबद्ध तरीके से पुलिस मुख्यालय से मानीटरिंग करते हुए कर्रवाई की जा रही है। प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद 1150 माफियाओं पर कार्रवाई हुयी है । इनमें 30 खनन माफिया , 228 शराब माफिया, 168 पशु माफिया, 347 भू माफिया, 18 शिक्षा माफिया, 359 अन्य माफिया शामिल हैं।

जब से प्रदेश में योगी राज आया है, तब से प्रदेश के अपराधियों व बड़े माफियाओं का हाल क्या से क्या हो गया है, यह पूरा देश देख रहा है। योगीराज में आज अतीक अहमद , मुख्तार अंसारी, गायत्री प्रसाद प्रजापति और आजम खान जैसे लोग जेल में जाने मजबूर होना पड़ा है। कभी किसी ने सपने में नहीं सोचा था कि ऐसे लोगों को कभी जेल जाना होगा। रामपुर के सपा नेता आजम खान को तो सुप्रीम कोर्ट की शरण में जाना पड़ा, तब कहीं जाकर माननीय कोर्ट ने अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए केवल अंतरिम जमानत ही दी है। वहीं जब मुख्तार अंसारी पंजाब भाग गया था, तब भी उप्र सरकार ने किस प्रकार से माननीय कोर्ट की सहायता से उसे वापस लाने में सफलता हासिल की थी यह भी सबने देखा था।

2022 के विधानसभा चुनावों में कानून व्यवस्था व महिलाओं की सुरक्षा एक बहुत बड़ा मुददा बना था और अब प्रदेश सरकार जनभावनाओं के अपने संकल्प को पूरा कर रही है। प्रदेश के पुलिस अधिकारियों का मनोबल बढ़ा हुआ है और अपराधियो में भय व्याप्त हो गया हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने दूसरे कार्यकाल में भी माफियाओं का काल बन गये हैं जिससे आज प्रदेश की जनता अपने आप को भयमुक्त समझ रही है और प्रदेश विकास की नयी ऊंचाई को छूने के लिए संकल्पित है।

 

 

 

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