January 20, 2021

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UP: हाथरस में नकली मसाला बनाने की फैक्ट्री का राजफाश, मिला रहे थे गधे की लीद और एसिड

हाथरस|अधिक धन कमाने के लालच में मिलावटखोर ‘स्वास्थ्य ही धन’ है का असली मंत्र भूल जाते हैं। यह मिलावट लोगों में धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों का कारण बनती है। ऐसी ही सेहत से खिलवाड़ कर नकली मसाला बनाने की फैक्ट्री का राजफाश उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि नकली मसाले में गधे की लीद, एसिड, भूसा और अखाद्य रंगों का उपयोग किया जा रहा था। इन मसालों को बनाकर विभिन्न कंपनियों के रैपर में पैक कर बाजार में सप्लाई किया जा रहा था।

हाथरस पुलिस ने गधे की लीद और एसिड का उपयोग कर स्थानीय ब्रांडों के नकली मसाले बनाने वाली एक फैक्ट्री का खुलासा किया है। हाथरस कोतवाली सदर इलाके के नवीपुर में चल रही मिलावटी मसाला बनाने की फैक्ट्री पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने एफडीए की टीम के साथ छापा मारा। यहां से भारी मात्रा में नकली मसाला बनाने का सामान भी बरामद किया गया। यह फैक्ट्री हिंदू युवा वाहिनी के सह मंडल प्रभारी अनूप वार्ष्णेय की है। वह भी मौके पर ही टीम को मिला। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में फैक्ट्री को सील किया गया। इधर, फैक्ट्री संचालक को फिलहाल शांति भंग के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। 27 से अधिक नमूनों को परीक्षणों के लिए भेजा गया है और लैब से रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रेम प्रकाश मीणा ने कहा कि स्थानीय ब्रांडों के नाम पर 300 किलोग्राम से अधिक नकली मसाले जब्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि छापे के दौरान नकली मसालों को तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कई सामग्री बरामद की गई है, जिनमें गधे का गोबर, भूसा, अखाद्य रंग और एसिड से भरे ड्रम शामिल हैं। दबिश के दौरान भारी मात्रा में नकली मसाले जैसे कि धनिया, हल्दी, लाल मिर्च, गरम मसाला इत्यादि भंडारित किए हुए पाए गए। खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मिलावट स्वास्थ्य के लिए खतरा साबित हो सकती है, खासकर अगर लंबे समय तक इसका सेवन किया जाए।

अधिकारियों के अनुसार, छापे के दौरान मौके पर विभिन्न ब्रांड के करीब 1000 खाली पैकेट और करीब 100 पैकेट भरे हुए मसालों के पाए गए। जब फैक्टरी मालिक अनूप वार्ष्णेय से इन ब्रांडों के लाइसेंस संबंधी कागजात मांगे गए तो मौके पर वह कोई भी लाइसेंस संबंधी कागज प्रस्तुत नहीं कर पाए। इस पर एसडीएम ने फैक्ट्री को सील कर दिया गया। अनूप वार्ष्णेय निवासी चौबे वाली गली की नवीपुर में अवैध रूप से मसाला फैक्ट्री चल रही थी। जहां पर नकली मसाले बनाकर उन्हें पैक करके बाजार में सप्लाई किया जाता था। मौके से भारी मात्रा में नकली मसाले बनाने का सामान बरामद किया गया है।

ब्यंग:

हाथरस एक जिला है। 1997 में बना, अलीगढ़, मथुरा वगैरह से काट-पीट कर एक और जिला बना। इस जिले की एक खूबी है यहां गधे ज्यादा मिलते हैं। इन गधों का उपयोग पहले धोबी करते थे, घर से घाट तक। अब मेहनत करने वाले मजूरों ने भी गधा पाल लिया है। ईंट, मिट्टी जैसे अन्य सामान ढोने के लिए। जाहिर है कि शहर में गधे लीद करेंगे ही।

गधे को मूर्ख समझना बंद कीजिए, गंभीर बीमारी का करता है इलाज

इसे अंग्रेजी में डंकी डंग कहते हैं। तुर्रा यह कि गधे की लीद म्युनिसिपल कार्पोरेशन ,जिला प्रशासन के लिए कभी समस्या नही बना। एक पढा-लिखा अधिकारी अचानक इस लीद को लेकर चिंतित हुआ – कमबख्त यह लीद जाती कहाँ है? उसने इसकी गुप्त तहकीकात की तो एक दिलचस्प किस्सा उजागर हुआ। लीद (गोबर से भिन्न होता है) इसे सूखा कर क्रश कर दीजिए तो यह भूसे के छोटे-छोटे तिनको की तरह हो जाता है। (रंग दीजिए तो केशर बन जाएगा)। लीद देने वाले तीन जानवर हैं – हाथी, घोड़ा और गधा। और यह बहुत फायदे का धंधा है।

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