June 18, 2021

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World Environment Day 2021: आज मनाया जा रहा विश्व पर्यावरण दिवस, जानिए क्या है इसका इतिहास

आज दुनियाभर में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है. हर साल 5 जून के दिन दुनियाभर में विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन किया जाता है. इस दिन का मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरुक करना है.

नई दिल्लीः आधुनिकता की दौड़ में भाग रहे प्रत्येक देश के बीच धरती पर हर दिन प्रदूषण काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है. जिसके दुष्परिणाम समय-समय पर हमें देखने को मिलते हैं. पर्यावरण में अचानक प्रदूषण का स्तर बढ़ने से तापमान में भी तेजी देखी जा रही है तो कहीं कहीं पर प्रदूषण के बढ़े हुए स्तर के कारण लंबे समय से बारिश भी नहीं हो पाती. ऐसे में लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरुक करने के लिए हर साल विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है.

 

दुनियाभर में 5 जून के दिन हर साल विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है. इस दिन कई कार्यक्रम का आयोजन कर लोगों को पर्यावरण और प्रदूषण से हो रहे नुकसान के प्रति जागरुक किया जाता है. प्रदूषण का बढ़ता स्तर पर्यावरण के साथ ही इंसानों के लिए खतरा बनता जा रहा है. इसके कारण कई जीव-जन्तू विलुप्त हो रहे हैं. वहीं इंसान कई प्रकार की गंभीर बिमारियों का शिकार भी हो रहे हैं.

 

विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास

 

विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत साल 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ की और से की गई थी. पर्यावरण दिवस की शुरुआत स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम से हुई थी. इसी दिन यहां पर दुनिया का पहला पर्यावरण सम्मेलन का आयोजन किया गया था. जिसमें भारत की ओर से तात्कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भाग लिया था.

 

इस सम्मेलन के दौरान ही संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की भी नींव पड़ी थी. जिसके चलते हर साल विश्व पर्यावरण दिवस आयोजन का संकल्प लिया गया. जिससे लोगों को हर साल पर्यावरण में हो रहे बदलाव से अवगत कराया जा सके और पर्यावरण में संतुलन बनाए रखने के लिए लोगों को समय-समय पर जागरुक किया जा सके.

 

विश्व पर्यावरण दिवस की थीम

 

विश्व पर्यावरण दिवस मनाए जाने से पहले हर साल के लिए एक थीम का चयन किया जाता है. विश्व पर्यावरण दिवस 2021 की थीम ‘पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली (Ecosystem Restoration)‘ है. जंगलों को नया जीवन देकर, पेड़-पौधे लगाकर, बारिश के पानी को संरक्षित करके और तालाबों के निर्माण करने से हम पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से रिस्टोर कर सकते हैं.

Global warming और Climate change दोनों एक ही बात नहीं है, लेकिन अक्सर इन्हें एक जैसा ही समझा जाता है. ग्लोबल वार्मिंग का अर्थ है वातावरण में ग्रीन हाउस गैसों (Green House Gas) की बढ़ती सांद्रता के कारण पृथ्वी की सतह का तापमान (Temprature of Earth) बढ़ जाना.

 

ये क्लाइमेट चेंज यानी जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का वो पहलू है, जो समुद्र स्तर बढ़ने (Sea level rise), ग्लेशियरों के पिघलने (Melting of Glaciers), उष्णकटिबंधीय तूफानों (Tropical cyclone) के बढ़ने, कोरल रीफ (Coral reef) के घटने और भयानक गर्मी के साथ-साथ ग्लोबल वार्मिंग के रूप में सामने आता है. ये सभी घटनाएं मुख्य रूप से मानव द्वारा किए गए कामों का परिणाम होती हैं.

 

आप कई तरह से कार्बन फुटफ्रिंट छोड़ते हैं

 

कार्बन फुट प्रिंट (Carbon Footprint) से पर्यावरण पर आपके प्रभाव की गणना की जाती है. एक व्यक्ति, संगठन, समुदाय या फिर किसी देश के कार्बन फुट प्रिंट, ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा है. मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड, जिसे उनकी गतिविधियों के परिणामस्वरूप वायुमंडल में छोड़ा जाता है.

 

इसलिए अगर आप काम पर गाड़ी चलाकर जाते हैं, जिसमें चलने के बजाय ईंधन जलता है, स्थानीय उत्पादों को खरीदने के बजाए वो सामान खरीद रहे हैं जिन्हें बाहर से लाना पड़ता है, प्लास्टिक को रीसाइकिल करने के बजाए उन्हें इस्तेमाल करके फेंक रहे हैं, तो आप एक कार्बन फुटप्रिंट छोड़ रहे हैं.

 

कुछ न भी जलाएं, तो भी होता है कार्बन उत्सर्जन

 

आपकी पसंद अप्रत्यक्ष रूप से वायुमंडल में कार्बन उत्सर्जन कर सकती है. अगर आप काम पर जाने के लिए ड्राइव करते हैं या कैब लेते हैं, तो आप जिम्मेदार हैं. अगर आप मांसाहारी हैं, तो आप जिम्मेदार हैं. मीट उत्पादन से मीथेन उत्सर्जन के सबसे बड़े कारणों में से एक है. ट्रेन उपलब्ध होने के बावजूद भी अगर आप कम दूरी के लिए फ्लाइट लेते हैं तो आप जिम्मेदार हैं.

 

क्या आप अपने प्लास्टिक के कचरे को रीसाइकिल नहीं करते और हर मौसम में घर या अपने दफ्तर में एयर कंडीशनर (AC) का इस्तेमाल करते हैं तो आप जिम्मेदार है. आखिरकार ये सब भी आपकी ही पसंद के मामले ही तो हैं.

ज्यादा टूरिज्म भी सही नहीं

 

लोगों को घूमना फिरना बड़ा अच्छा लगता है. पर्यटन से आय उत्पन्न होती है. ये रोजगार भी देता है. कोरोना काल में भले ही इस सेक्टर पर बुरा असर पड़ा हो लेकिन जो पहले हो चुका है या आगे जब जिंदगी पटरी पर लौटेगी तब भी हमें इस सेक्टर में हो रहे अतिरेक को रोकना होगा. क्योंकि अक्सर गैर-जिम्मेदार पर्यटक लुप्तप्राय वातावरण और स्थानीय हैरिटेज साइट को प्रदूषित करते हैं और उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं?

 

वहीं सैलानियों की आमद उस क्षेत्र की क्षमता से ज्यादा हो जाती है, तो वहां के प्राकतिक संसाधन बुरी तरह प्रभावित होते हैं. उदाहरण के लिए भारत की बात करें तो यहां लेह और शिमला जैसे बेहतरीन टूरिस्ट स्पॉट कई सालों से पानी के संकट से जूझ रहे हैं. ये भी ज्यादा टूरिज्‍म का परिणाम हैं.

 

‘बंद हो सिंगल यूज प्लास्टिक’

 

जैसा कि नाम से ही पता चलता है, सिंगल यूज प्लास्टिक (Single use plastic) वाली चीजें डिस्पोजेबल प्लास्टिक पानी की बोतलें, पैकिंग, बैग, डिस्पोजेबल रेज़र, स्ट्रॉ, ईयरबड, फूड कंटेनर- ये सभी सिंगल यूज प्लास्टिक हमारे महासागरों में इकट्ठे हो जाते हैं इन्हें नष्ट होने में सदियों का समय लग जाता है. प्लास्टिक की एक बोतल को गलने में 500 साल लगते हैं.

 

विशेषज्ञ भी इन्हें दोबारा इस्तेमाल न करने की सलाह देते हैं क्योंकि अगर उन्हें बार-बार इस्तेमाल किया जाता है तो वे हानिकारक रसायन छोड़ सकते हैं. किसी किसी में तो कार्सिनोजेनिक गुण भी हो सकते हैं. इसका एक ही समाधान है- बायोडिग्रेडेबल अपनाएं.

 

आज ही के दिन दुनिया भर में कई शहरों में पेंटिंग, ड्राइंग या क्विज प्रतियोगिताओं के आयोजन के जरिए बच्चों को भी जागरूक किया जाता है. ऐसे में हम सब भी अपने हिस्से का योगदान करके धरती को हरा-भरा बनाने के साथ अपने पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं.

 

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